चीन के रेगिस्तान में क्या कर रहा है अमेरिकी युद्धपोत, कुछ बड़ा सोच रहे शी चिनफिंग?
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन ने अपने रेगिस्तान में अमेरिकी युद्धपोत का हूबहू ढांचा बनाकर उस पर मिसाइल दागने का अभ्यास शुरू किया है। ...और पढ़ें

डोनाल्ड ट्रंप और शी चिनफिंग।
HighLights
चीन ने अमेरिकी युद्धपोत का नकली ढांचा बनाया।
शिनजियांग रेगिस्तान में मिसाइल परीक्षण के लिए उपयोग।
अमेरिकी नौसेना के लिए हिंद-प्रशांत में खतरा।
डिजिटल डेस्क, बीजिंग। किसके पास कितने हथियार? कौन है ज्यादा ताकतवर? वैश्विक मंच पर ये सवाल अमूमन चीन और अमेरिका एक दूसरे से पूछते ही रहते हैं। सवाल जब ऐसे हो तब ये कहना कहीं से गलत नहीं होगा कि वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच वर्षों से जारी ये सैन्य होड़ कभी नहीं थम सकता। इन्हीं सवाल जवाब के बीच अब चीन की एक नई चालबाजी ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है।
पूरे मामले को ऐसे समझिए कि हाल ही में सामने आई एक नई सैटेलाइट तस्वीर ने ड्रैगन के मंसूबे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस तस्वीर से खुलासा हुआ है कि चीन ने शिनजियांग के सुदूर रेगिस्तान में स्थित 'रुओकियांग टेस्ट रेंज' में अमेरिका के सबसे घातक युद्धपोत 'अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर' का हूबहू और असली आकार का नकली ढांचा तैयार किया है।
क्या सोच रहा चीन, क्यों किया ऐसा?
वैसे तो ये पहली बार नहीं है कि चीन ने अपने नापाक इरादे से दुनिया को चौंकाया हो। इसके बाद भी सवाल अब पूछे जा रहे हैं कि आखिर चीन ने ऐसा कदम क्यों उठाया? दुनियाभर में जारी कई युद्धों के बीच चीन सोच क्या रहा है?
इन सवालों के जवाब को ऐसे समझिए कि चीन इस नकली अमेरिकी युद्धपोत का इस्तेमाल अपनी 'एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल' के निशाने को पक्का करने और सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए कर रहा है। यह बात रक्षा विशेषज्ञ और अमेरिकी नौसेना संस्थान ने कही है।
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चलने वाले टारगेट के क्या मायने?
इसके अलावा सैटेलाइट तस्वीरों में रेगिस्तान के बीचों-बीच 6 मीटर चौड़ा एक रेल सिस्टम भी दिखा है, जिस पर जहाज के आकार का यह ढांचा चलता है। यानी चीन चलती हुई समुद्री जहाजों पर सटीक निशाना लगाने की तैयारी कर रहा है।
इतना ही नहीं तस्वीरों का विश्लेषण करने वाली संस्था 'ऑलसोर्स एनालिसिस' के अनुसार, इस नकली जहाज पर कई तरह के सेंसर भी लगाए गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि चीन लंबी प्लानिंग के साथ अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी को अमेरिकी जहाजों को तबाह करने के लिए अपग्रेड कर रहा है।
क्यों खास है 'अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर'?
बता दें कि चीन ने इसी अमेरिकी युद्धपोत को ही अपना टारगेट क्यों चुना? इसकी बड़ी वजह है कि यह गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर अमेरिकी नेवी का सबसे मुख्य और ताकतवर हथियार है। इसके अलावा यह अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स को सुरक्षा देता है, हवा से होने वाले हमलों को रोकता है और दूर तक मिसाइल से हमला करने में माहिर है।
हाल ही में ईरान के साथ हुए टकराव में भी अमेरिका ने इसका जमकर इस्तेमाल किया था। इसके अलावा ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि जापान में तैनात अमेरिका के 7वें बेड़े (के पास ऐसे 10 युद्धपोत हैं, जो अक्सर प्रशांत महासागर में चीनी नौसेना के सामने आ जाते हैं।
क्या युद्ध की तैयारी में है चीन?
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम साफ इशारा करता है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी संभावित युद्ध को बेहद गंभीरता से ले रहा है। भले ही दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही हो, लेकिन चीन अंदर ही अंदर युद्ध की तैयारी में जुटा है।
ऐसे में अब इस बात को समझना ज्यादा अहम हो गया है कि आखिर चीन के इस कदम का क्या असर होने वाला है? इस बात को ऐसे समझिए कि अगर चीन इस टेस्टिंग के जरिए अपनी मिसाइलों की गाइडेंस प्रणाली (सटीक निशाना लगाने की क्षमता) को और मजबूत कर लेता है, तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों के लिए खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।