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    ट्रंप के 'बगदाद वाले आदमी' अली अल जैदी कौन हैं? अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती

    Updated: Mon, 11 May 2026 10:14 PM (IST)

    इराक की राजनीति में कारोबारी अली अल जैदी अगले प्रधानमंत्री बनने के प्रबल दावेदार के रूप में उभरे हैं, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर् ...और पढ़ें

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    इराक के प्रधानमंत्री की रेस में अली अल जैदी। (फोटो क्रेडिट- ईराकी प्रधानमंत्री कार्यालय)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इराक की राजनीति में एक ऐसा नाम अचानक सबसे आगे आ गया है, जिसने कभी कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला, लेकिन अब वही देश का अगला प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। कारोबारी और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अली अल जैदी को लेकर दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप खुलकर उनका समर्थन कर रहे हैं।

    वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने जैदी को वॉशिंगटन आने का निमंत्रण दिया और कहा कि अमेरिका पूरी तरह उनके साथ खड़ा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इराक में लंबे समय से प्रधानमंत्री पद को लेकर राजनीतिक गतिरोध बना हुआ था।

    शुरुआत में पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी का नाम आगे बढ़ाया जा रहा था, जिन्हें ईरान समर्थक माना जाता है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि यदि मलिकी को प्रधानमंत्री बनाया गया तो अमेरिका इराक को मिलने वाली सहायता रोक सकता है।

    इसके बाद इराकी सांसदों ने अली अल जैदी को समझौता उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाया। रिपोर्ट के अनुसार, उनके नाम की घोषणा से पहले अमेरिका और ईरान दोनों से बातचीत की गई थी।

    कारोबारी दुनिया से राजनीति तक

    अली अल जैदी पारंपरिक राजनेता नहीं हैं और इराक के बाहर उनका नाम बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने बैंकिंग, सैटेलाइट प्रसारण और सरकारी ठेकों के जरिए अपनी कारोबारी पहचान बनाई।

    करीब एक दशक पहले उन्होंने 'अल जनूब इस्लामिक बैंक' की स्थापना की थी। इसके अलावा उन्होंने 'अल अवीस' नामक कंपनी भी बनाई, जो इराक के व्यापार मंत्रालय के लिए कृषि उत्पादों का आयात करती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में जैदी की बातचीत एक ओर डोनल्ड ट्रंप से हुई तो दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी। इसे इराक की जटिल राजनीति में संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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    हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के लिए उन्हें अभी संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा। आने वाले हफ्तों में उनके और उनके मंत्रिमंडल के नामों पर मतदान हो सकता है।

    जब अमेरिकी प्रतिबंधों के घेरे में आया जैदी का बैंक

    अमेरिका का समर्थन मिलने से पहले अली अल जैदी विवादों में भी रहे हैं। 2024 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 'अल जनूब इस्लामिक बैंक' समेत इराक के दो दर्जन बैंकों को डॉलर लेन-देन प्रणाली से बाहर कर दिया था।

    अमेरिका का आरोप था कि बैंक के संबंध ईरान समर्थित मिलिशिया नेता शिब्ल अल जैदी से हो सकते हैं। हालांकि बैंक ने इन आरोपों को अफवाहों और अटकलों पर आधारित बताते हुए खारिज कर दिया था।

    शिब्ल अल जैदी की पार्टी इराकी संसद में नौ सीटें जीत चुकी है। अमेरिका ने 2018 में उन पर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और लेबनान के हिज्बुल्लाह से संबंध रखने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों का यह भी दावा था कि बैंक के संबंध कताइब हिज्बुल्लाह नामक संगठन से हो सकते हैं, जिसे अमेरिका आतंकवादी संगठन मानता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, अली अल जैदी के पास बैंक के करीब 9.9 प्रतिशत शेयर हैं और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर उनका बैंक पर बहुमत नियंत्रण है। हालांकि बैंक के चेयरमैन माजेन अहमद ने दावा किया कि जैदी 2019 में चेयरमैन पद छोड़ने के बाद बैंक के संचालन में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं निभा रहे हैं।

    प्रधानमंत्री बनने पर सबसे बड़ी चुनौती

    यदि अली अल जैदी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। व्हाइट हाउस चाहता है कि नई इराकी सरकार में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों को शामिल न किया जाए और तेहरान का प्रभाव कम किया जाए।

    अमेरिका का आरोप है कि इन मिलिशिया समूहों ने अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद इराक में अमेरिकी सैन्य और राजनयिक ठिकानों पर 600 से ज्यादा हमले किए हैं।

    दूसरी ओर, ईरान इन समूहों को सत्ता से बाहर करने के खिलाफ है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ अधिकारी जनरल इस्माइल कानी ने हाल ही में बगदाद का दौरा किया और इराकी नेताओं से कहा कि मिलिशिया नेताओं को सरकार से बाहर न किया जाए तथा उन्हें निशस्त्र करने की कोशिश न हो।

    इराक की राजनीति में मिलिशिया का गहरा प्रभाव

    ये मिलिशिया समूह इराक की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं। इनका उदय अमेरिकी कब्जे के दौर में हुआ था और बाद में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ लड़ाई में इनकी बड़ी भूमिका रही। समय के साथ इन संगठनों ने इराक की राजनीति, प्रशासन और आर्थिक व्यवस्था में मजबूत पकड़ बना ली।

    अमेरिकी विदेश विभाग में इराक नीति संभाल चुकीं विक्टोरिया टेलर ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि मिलिशिया समूह इराकी राज्य और आर्थिक व्यवस्था में गहराई तक जड़ें जमा चुके हैं। उन्होंने कहा कि चाहे प्रधानमंत्री कोई भी बने, इन समूहों के प्रभाव को कम करना लंबी और बेहद चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होगी और इससे हिंसक प्रतिक्रिया का खतरा भी पैदा हो सकता है।

    इराक के लिए निर्णायक मोड़

    विश्लेषकों का मानना है कि अली अल जैदी का उदय इराक की राजनीति में एक नए प्रयोग की तरह है, जहां पहली बार एक बड़े कारोबारी को अमेरिका और ईरान दोनों की सहमति से आगे बढ़ाया जा रहा है। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या वे इराक को अमेरिकी दबाव और ईरानी प्रभाव के बीच संतुलित रख पाएंगे, या फिर देश एक बार फिर क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष का केंद्र बन जाएगा।

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