लेबनान-इजरायल में 10 दिन का युद्धविराम, ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर क्या पड़ेगा असर?
ट्रंप ने इजरायली और लेबनानी नेताओं को व्हाइट हाउस में प्रत्यक्ष वार्ता के लिए आमंत्रित किया है, यह 34 वर्षों में दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक आमने- ...और पढ़ें

इजरायल-लेबनान के बीच युद्धविराम से ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर क्या असर पड़ेगा? (फोटो- एक्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम का एलान किया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि युद्धविराम शाम पांच बजे ईटी (भारतीय समयानुसार तड़के 3.30 बजे) से लागू हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने इस पर सहमति जताई है। ट्रंप ने इजरायली और लेबनानी नेताओं को व्हाइट हाउस में प्रत्यक्ष वार्ता के लिए आमंत्रित किया है, यह 34 वर्षों में दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक आमने-सामने की बातचीत होगी।
ट्रंप ने कहा कि लंबे समय से कोई प्रत्यक्ष संवाद नहीं हुआ था। यह तनाव कम करने और स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस घोषणा से इजरायल-हिजबुल्ला संघर्ष में अस्थायी राहत मिली है, जो मार्च 2026 से जारी है और ईरान समर्थित हिजबुल्ला के हमलों के बाद भड़का था।
लेबनान में तनाव कम होने से ईरान पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि हिजबुल्ला ईरान का प्रमुख प्रॉक्सी है। यदि लेबनान में शांति स्थापित होती है, तो ईरान को क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने का एक हथियार कमजोर पड़ सकता है।
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा (जो अमेरिका-ईरान वार्ता के नए दौर को सुगम बनाने के लिए हो रही है) को इस युद्धविराम से अतिरिक्त बल मिल सकता है। मुनीर ने ईरानी शांति वार्ताकारों (जिनमें मोहम्मद बागेर गालिबफ शामिल) से मुलाकात की।
विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्धविराम ट्रंप की डिप्लोमेसी रणनीति का हिस्सा है। यदि लेबनान में शांति टिकी, तो ईरान-अमेरिका वार्ता में प्रगति हो सकती है। लेकिन यदि नाकाबंदी और सैन्य धमकियां जारी रहीं, तो तेहरान सख्त रुख अपनाने की आशंका है।
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