'हमें सैन्य तैनाती से डर नहीं लगता', अमेरिका से बातचीत के बीच ईरान ने ट्रंप को दी चेतावनी
अमेरिकी-ईरान के बीच ओमान में कूटनीतिक चर्चा के बावजूद तनाव जारी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी सैन्य तैनाती से न डरने की बात कही और ब ...और पढ़ें
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युद्ध की धमकी के बीच ईरान की चेतावनी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी और ईरान के बीच ओमान में हुई कूटनीतिक चर्चा के बीच एक बार फिर तनाव देखने को मिल रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची अरब सागर में अमेरिकी सेना की तैनाती को लेकर कहा कि हमें डर नहीं लगता है।
दरअसल, एक ओर जहां राष्ट्रपति ट्रंप 'शक्ति के माध्यम से शांति' की नीति पर जोर दे रहे हैं, वहीं, दूसरी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची तेहरान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ईरान को वाशिंगटन पर बहुत कम भरोसा है और उसे संदेह है कि अमेरिकी पक्ष नए सिरे से शुरू हुई बातचीत को गंभीरता से ले रहा है।
यूरेनियम संवर्धन छोड़ने से इनकार
वहीं, ईरानी विदेश मंत्री अराघची परमाणु वार्ता में यूरेनियम संवर्धन रोकने की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईरान अपने फैसलों के लिए किसी के निर्देश का मोहताज नहीं है। यूरेनियम इनरिचमेंट करना ईरान का अधिकार है। इसे जारी रहना चाहिए।
सैन्य तैनाती से हमें डर नहीं
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने अरब सागर में अमेरिका द्वारा तैनात किए गए विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के आगमन का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य तैनाती से हमें डर नहीं लगता। ईरान वार्ता के संबंध में अपने रणनीतिक साझेदार चीन और रूस से परामर्श कर रहा है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को ओमान में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू हुई। यह बातचीत पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध के बाद पहली बार हुई है, जिसमें अमेरिका भी कुछ समय के लिए शामिल हुआ था।
अमेरिकी दबाव हटाने की कोशिश में ईरान
ईरान अपने ऊपर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को हटवाने की कोशिश कर रहा है, जिसके बदले में अराघची ने फोरम में कहा कि परमाणु कार्यक्रम से संबंधित विश्वास-निर्माण उपायों की एक श्रृंखला हो सकती है।
वहीं, मध्य पूर्व का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाने वाला इजरायल का कहना है कि ईरान परमाणु बम हासिल करने की कोशिश कर रहा है, जिसे इस्लामी गणराज्य नकारता है।
अराघची ने कहा ने कहा कि वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम की तलाश में नहीं हैं। हमारा परमाणु बम महाशक्तियों को 'ना' कहने की शक्ति है।
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