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    तुर्किये की जगह ओमान में अमेरिका के साथ वार्ता करना चाहता है ईरान, परमाणु मुद्दों के साथ इस

    Updated: Wed, 04 Feb 2026 11:43 PM (IST)

    अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को तुर्किये में होने वाली वार्ता पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं, क्योंकि वह वार्ता स्थल बदलवाना चाहता है। उसने तुर्कि ...और पढ़ें

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    तुर्किये की जगह ओमान में अमेरिका के साथ वार्ता करना चाहता है ईरान (फोटो- रॉयटर)

    रॉयटर, दुबई। अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को तुर्किये में होने वाली वार्ता पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं, क्योंकि वह वार्ता स्थल बदलवाना चाहता है। उसने तुर्किये की जगह ओमान में अमेरिका के साथ वार्ता करने की मांग की है और बातचीत केवल परमाणु मुद्दों तक सीमित रखने की इच्छा जताई है।

    तेहरान के इस रुख से कूटनीतिक प्रयासों के समक्ष नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, क्योंकि पिछले महीने देशभर में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की हिंसक कार्रवाई के बाद अमेरिका के साथ तनातनी पहले से ही बढ़ी हुई है और क्षेत्रीय युद्ध का अंदेशा जा रहा है।

    मामले से जुड़े एक क्षेत्रीय सूत्र ने मंगलवार को बताया, 'ईरान ने तुर्किये के बजाय ओमान में अमेरिका के साथ वार्ता करने की मांग की है और केवल परमाणु मुद्दों पर ही बातचीत करने की इच्छा जताई है।'

    ईरान का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ रही है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को बताया कि उसने अरब सागर में विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन की तरफ आक्रामक तरीके से बढ़ रहे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है।

    ईरानी शाहीद-139 ड्रोन को अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-35 ने मार गिराया। जबकि ईरान ने दावा किया कि उसका सर्विलांस मिशन सफल रहा।

    इससे पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी युद्धपोत ईरान की तरफ बढ़ रहे हैं और बुरी चीजें होंगी।

    उन्होंने बताया कि ईरान के साथ वार्ता चल रही है। जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा था कि वह निष्पक्ष और तर्कसंगत बातचीत चाहते हैं।

    उन्होंने वार्ता में शामिल होने वाले विदेश मंत्री अब्बास अराघची को इस संबंध में निर्देश दिए हैं।तुर्किये के इस्तांबुल शहर में शुक्रवार को निर्धारित वार्ता में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकाफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अलावा सऊदी अरब और मिस्त्र जैसे देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।