केशम आइलैंड: ईरान का वो खूबसूरत द्वीप जो बना होर्मुज की 'चाबी', कैसे दुश्मनों को बना रहा निशाना?
पश्चिम एशिया में टकराव के बीच ईरान का केशम द्वीप होर्मुज स्ट्रेट में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। यह द्वीप अपनी 'मिसाइल सिटी' और भूमिगत ठिकानो ...और पढ़ें

होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित केशम द्वीप रणनीतिक रूप से अहम

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी टकराव के बीच ईरान का केशम द्वीप अचानक वैश्विक रणनीति के केंद्र में आ गया है। होर्मुज स्ट्रेट के ठीक मुहाने पर स्थित यह द्वीप न केवल भौगोलिक रूप से अहम है, बल्कि सैन्य दृष्टि से भी ईरान के लिए एक मजबूत किले की तरह काम कर रहा है।
अमेरिका द्वारा सात मार्च को केशम द्वीप पर स्थित एक मीठे पानी के डिसेलिनेशन प्लांट पर हमले के बाद इसकी अहमियत और भी बढ़ गई। इस प्लांट से आसपास के करीब 30 गांवों को पानी की आपूर्ति होती थी। इस हमले को कई विशेषज्ञों ने रेड लाइन पार करना बताया, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के देश पीने के पानी के लिए बड़े पैमाने पर ऐसे संयंत्रों पर निर्भर हैं।

केशम द्वीप रणनीतिक रूप से अहम
होर्मुज पर पकड़ का केंद्रकेशम फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसकी आबादी करीब 1.5 लाख है और क्षेत्रफल लगभग 1,500 वर्ग किलोमीटर। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लोकेशन है यह ठीक उस जगह स्थित है, जहां फारस की खाड़ी होर्मुज स्ट्रेट से मिलती है।
होर्मुज स्ट्रेट अपने सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन जहाजों के लिए इस्तेमाल होने वाले रास्ते इससे भी कहीं संकरे हैं करीब 3.2 किलोमीटर का एक चैनल अंदर जाने के लिए और उतना ही बाहर आने के लिए। ऐसे में केशम की स्थिति ईरान को यह क्षमता देती है कि वह यहां से गुजरने वाले हर जहाज पर नजर रख सके और जरूरत पड़ने पर बहुत कम समय में हमला भी कर सके।

जमीन के नीचे बना खतरनाक जाल
विशेषज्ञों के अनुसार केशम द्वीप ईरान की असिमेट्रिक वारफेयर रणनीति का अहम हिस्सा है। हाल ही में जारी एक वीडियो में यहां जमीन के नीचे बने एक विशाल नेटवर्क को दिखाया गया, जिसे मिसाइल सिटी कहा जा रहा है। इस भूमिगत ठिकाने में बड़ी संख्या में एंटी-शिप मिसाइलें, नौसैनिक ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगें (माइंस) रखी गई हैं।
इसके अलावा, 'सुसाइड स्पीडबोट' और समुद्री ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो सीधे टैंकरों से टकराकर विस्फोट कर सकते हैं। हाल के हमलों में ऐसे ही ड्रोन ने तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिससे यह साफ संकेत गया कि ईरान होर्मुज के समुद्री रास्तों को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है।
सस्ती रणनीति, महंगा नुकसानईरान की रणनीति का सबसे बड़ा पहलू यह है कि वह अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन और हथियारों का इस्तेमाल कर महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे रहा है। यानी कम लागत में दुश्मन को ज्यादा नुकसान पहुंचाना इसी को असिमेट्रिक वारफेयर कहा जाता है। यही रणनीति केशम द्वीप पर भी लागू होती है, जहां से कम समय में लगातार हमले कर किसी भी काफिले या जहाज को रोकना संभव है।
लगभग ठप हो चुका है होर्मुज मार्ग
युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती दिनों में ही ट्रैफिक करीब 90 प्रतिशत तक घट गया और कुछ समय तो ऐसा भी आया जब पूरे दिन में केवल एक जहाज ही इस रास्ते से गुजर पाया। हालांकि कुछ देशों ने अपने जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए बातचीत की है, लेकिन स्थिति अब भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
अमेरिका के सामने चुनौतीअमेरिका ने होर्मुज को फिर से खोलने की बात कही है और यहां तक कि नौसैनिक काफिलों के जरिए जहाजों को सुरक्षित ले जाने की योजना भी सामने आई। लेकिन केशम द्वीप की भौगोलिक स्थिति और वहां मौजूद मिसाइल, ड्रोन और माइंस का जाल इस योजना को बेहद चुनौतीपूर्ण बना देता है। यानी साफ है कि केशम केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि होर्मुज पर नियंत्रण की चाबी बन चुका है।
पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अब सिर्फ जमीन और आसमान तक सीमित नहीं रहा। केशम द्वीप और वहां की 'मिसाइल सिटी' ने यह दिखा दिया है कि समुद्र के रास्ते भी अब उतने ही असुरक्षित हो चुके हैं।
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