होर्मुज में ठहराव और लाल सागर में बढ़ा तनाव: हूती के दबाव में वापस लौटने को मजबूर हुए सऊदी के 6 टैंकर
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच लाल सागर में हूती विद्रोहियों के दबाव के कारण छह सऊदी तेल टैंकरों को वापस लौटना पड़ा, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री या ...और पढ़ें
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HighLights
हूती दबाव से लाल सागर में 6 सऊदी टैंकर लौटे।
होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात लगभग ठप, चिंताएं बढ़ीं।
ट्रंप ने सऊदी प्रिंस की सलाह पर ईरान हमले टाले।
जेएनएन, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सोमवार को होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति अपेक्षाकृत शांत रही, लेकिन लाल सागर में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव और बढ़ गया। हूती विद्रोहियों के दबाव के कारण सोमवार को सऊदी अरब के छह तेल टैंकरों को बीच रास्ते से ही यू-टर्न लेकर लौटना पड़ा।
दूसरी ओर, होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात अब भी लगभग ठप बना हुआ है।यूके मैरिटाइम ट्रेड आपरेशंस (यूकेएमटीओ) के अनुसार, शनिवार के बाद से केवल तीन जहाज ही होर्मुज स्ट्रेट पार कर सके हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
रायटर के अनुसार, बीते सप्ताह केवल दो सऊदी टैंकर- लेसवोस और देश वैभव- ही बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पार कर सके। इनमें से देश वैभव लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत के सिक्का बंदरगाह के लिए रवाना हुआ, जहां रिलायंस इंडस्ट्रीज आमतौर पर कच्चे तेल की खेप प्राप्त करती है। दोनों टैंकरों ने अपनी पहचान सार्वजनिक न हो, इसके लिए आटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) ट्रांसपोंडर बंद रखे।
शिपिंग डाटा कंपनी केप्लर के अनुसार, बढ़ते तनाव के कारण रविवार को लाल सागर से केवल 18 जहाज गुजर सके। इससे एक दिन पहले शनिवार को यह संख्या 27 और शुक्रवार को 28 थी, जो समुद्री यातायात में लगातार गिरावट का संकेत है।
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ट्रंप बोले- सऊदी की सलाह पर टाले हमलेएपी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को खुलासा किया कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित नए सैन्य हमले सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सलाह के बाद टाल दिए।
न्यू जर्सी से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करने की तैयारी में थे। इसी दौरान उन्होंने क्राउन प्रिंस से पूछा कि यदि वह उनकी जगह होते तो क्या करते। ट्रंप के अनुसार, मोहम्मद बिन सलमान ने सैन्य कार्रवाई के बजाय समझौते का रास्ता अपनाने की सलाह दी और कहा कि ऐसे हमलों के नतीजे किस दिशा में जाएंगे, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।
ट्रंप ने बताया कि इस बातचीत में कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के नेता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब समेत अन्य खाड़ी देश किसी बड़े सैन्य संघर्ष के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि इसका सबसे अधिक असर इसी क्षेत्र पर पड़ता।
हालांकि, ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भी दी कि यदि उसने समझौते की दिशा में कदम नहीं बढ़ाया तो अमेरिका अब तक का सबसे बड़ा हमला करेगा। उन्होंने दावा किया कि सोमवार से दोनों देशों के बीच नई वार्ता शुरू हो सकती है। वहीं, ईरानी मीडिया ने विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा कि तेहरान फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं कर रहा है।