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    रूस और यूक्रेन में कैदियों की अदला-बदली पर बनी सहमति, युद्धविराम पर नहीं बन रही सहमति

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 02:37 AM (IST)

    कीव अमेरिका की मध्यस्थता से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी शहर में रूस और यूक्रेन के बीच दो दिनी शांति वार्ता गुरुवार को खत्म हो गई। दूसरे दिन ...और पढ़ें

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    रूस और यूक्रेन में कैदियों की अदला-बदली पर बनी सहमति (फाइल फोटो)

    रॉयटर, अबू धाबी। कीव अमेरिका की मध्यस्थता से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी शहर में रूस और यूक्रेन के बीच दो दिनी शांति वार्ता गुरुवार को खत्म हो गई। दूसरे दिन की वार्ता में दोनों देशों के बीच कैदियों की अदला-बदली को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। पिछले पांच महीने में कैदियों की यह पहली अदला-बदली होगी।

    इस वार्ता का उद्देश्य लगभग चार वर्ष से जारी युद्ध को समाप्त करना है। हालांकि ट्रंप प्रशासन के दबाव के बावजूद दोनों पक्षों में अभी तक युद्धविराम पर सहमति नहीं बन पाई है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि अमेरिका, यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधिमंडलों ने 314 युद्ध बंदियों की अदला-बदली पर सहमति जताई है।

    उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'हालांकि महत्वपूर्ण काम अभी भी बाकी है, लेकिन इस तरह के कदम से जाहिर होता है कि निरंतर कूटनीतिक जुड़ाव ठोस परिणाम दे रहा है और यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के प्रयास आगे बढ़ रहे हैं।' विटकॉफ ने शांति वार्ता को विस्तृत और फलदायी करार दिया है। जबकि रूस और यूक्रेन दोनों ने कहा कि अब तक की वार्ता सकारात्मक रही है।

    एक यूक्रेनी अधिकारी ने कहा कि वार्ता अब समाप्त हो गई है। बुधवार रात यूक्रेन के शीर्ष वार्ताकार रुस्तम उमेरोव ने पहले दिन की बातचीत को अर्थपूर्ण और फलदायी बताया, जो ठोस कदमों और व्यावहारिक समाधानों पर केंद्रित रही। जबकि रूसी दूत किरील दिमित्रीव ने कहा कि प्रगति हुई है और सकारात्मक दिशा में कदम बढ़े हैं।

    बाद में रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी आरआइए ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच 157-157 युद्ध कैदियों की अदला-बदली हुई है। कु‌र्स्क क्षेत्र के तीन नागरिकों को भी रूस वापस लाया गया है।

    रूस ने जर्मन राजनयिक को निकाला

    रूस ने जवाबी कदम उठाते हुए जर्मनी के एक राजनयिक को निकाल दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी और कहा कि बर्लिन ने जासूसी के बेबुनियाद आरोप में जनवरी में एक रूसी राजनयिक को निकाल दिया था, जिसके जवाब में यह कदम उठाया गया है।