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    ईरान पर हमला कर ट्रंप ने आजाद कर दिया 'जिन्न', दुनिया में शुरू होने वाली है न्यूक्लियर पावर बनने की रेस

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 05:21 PM (IST)

    ईरान में अमेरिका-इजरायल के साथ 31 दिन से जारी संघर्ष और ट्रंप की ईरान को परमाणु हथियार न रखने की जिद ने वैश्विक परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू कर दी है। ...और पढ़ें

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    यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के युद्ध को आज 31 दिन हो गए हैं। लेकिन दोनों में से कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। हमेशा की तरह ट्रंप अपने बयानों से पलट रहे हैं, लेकिन वह एक बात पर अडिग हैं कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं होने चाहिए।

    इस एक जिद ने दुनिया को एक ऐसे मुहाने पर खड़ा कर दिया है, जहां जल्दग ही न्यूक्लियर पावर बनने की रेस शुरू होने वाली है। ट्रंप के इस कदम ने एक ऐसा न्यूक्लियर जिन्न बाहर ला दिया है, जिसे वापस बोतल में डालना मुश्किल होगा।

    ईरान के पास एनरिच्ड यूरेनियम

    अपने मकसद को हासिल करने के लिए अमेरिका ने पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होंगे, तो मिडिल ईस्ट में कभी भी शांति नहीं हो पाएगी। ट्रंप का ये डर सिर्फ उनके दिमाग की उपज ही नहीं है।

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    इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने 408.6 किलोग्राम यूरेनियम को 60 फीसदी तक एनरिच कर लिया है। इतना यूरेनियम 9 वॉरहेड में इस्तेमाल करने के लिए काफी है। IAEA का ये भी कहना है कि ईरान के पास 200 किलो तक 20 फीसदी फिसाइल मैटेरियल भी है, जिसे आसानी से 90 प्रतिशत वेपन-ग्रेड यूरेनियम में बदला जा सकता है।

    अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है ईरान

    ईरान ने मिडिल ईस्ट में खुद को शक्तिशाली बनाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। उसके पास करीब 2500 बैलेस्टिक मिसाइलें हैं, जो मिडिल ईस्ट में सबसे ज्यादा हैं। वह पूरे इलाके में आतंकवादी प्रॉक्सी को समर्थन देता है, जिससे उसकी रक्षा क्षमता में इजाफा हुआ।

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    एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान पर अमेरिका का हमला भले ही कुछ समय के लिए उसकी न्यूक्लियर पावर बनने की महत्वाकांक्षाओं को धीमा कर दे, लेकिन अगर वहां का शासन इस युद्ध में बच गया, तो वह परमाणु हथियार हासिल करने के लिए और भी दृढ़ हो जाएगा, क्योंकि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए उसके पास यही एकलौता साधन होगा।

    ट्रंप की मनमौजी से दुनिया परेशान

    इन उपजी स्थितियों के लिए सिर्फ ईरान का पागलपन ही जिम्मेदार नहीं है। अमेरिका और खासकर ट्रंप ने भी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी है। पहले अमेरिका ने ईरान के साथ परमाणु संधि की और फिर ट्रंप ने हाथ पीछे खींच लिए। ट्रंप ईरान को बातचीत के मंच पर भी लेकर आए और फिर उसी दौरान उस पर हमला कर दिया।

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    इससे दुनिया को यह संदेश गया कि मनमौजी अमेरिका के साथ कोई समझौता करना बेकार है, जहां कोई भी प्रशासन अपने से पहले वाले प्रशासन द्वारा किए गए वादों से पीछे हट सकता है। ईरान के लिए न्यूक्लियर पावर अब सिर्फ अपने दुश्मनों के बराबर ओहदे तक पहुंचने की कोशिश भर नहीं है, बल्कि उससे आगे बढ़कर वहां के कट्टरपंथी शासन के खिलाफ उठने वाली आवाजों को हमेशा के लिए खत्म करने का एक जरिया भी बनेगा।

    पूरी दुनिया में शुरू होगी रेस

    न्यूक्लियर पावर बनने की यह रेस सिर्फ ईरान तक सीमित भी नहीं रहने वाली है। पिछले हफ्ते नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने कह दिया है कि ईरान के मौजूदा हालात उस फैसले को सही साबिक करते हैं, जब नॉर्थ कोरिया ने न्यूक्लियर हथियारों को न छोड़ने का जो फ़ैसला किया था।

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    दुनिया के सामने लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी और इराक के सद्दाम हुसैन का उदाहरण भी मौजूद है, जिन्हें न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने के बाद सत्ता से हटा दिया गया था। सोवियत संघ के विघटन के बाद न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने के फैसले पर यूक्रेन को भी जरूर अफसोस होता होगा। ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी और नाटो की आलोचना कर ट्रंप ने पहले ही अपने साथियों को नाराज कर दिया है।

    अमेरिका की गारंटी का महत्व खत्म

    • दूसरी तरफ एशिया में भारत और पाकिस्तान दोनों ही पहले से परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र हैं और हाल ही में संघर्ष के बाद दोनों देशों में से कोई भी अपने प्रयासों में कमी नहीं करेगा। ताइवान भी एक वक्त परमाणु शक्ति बनना चाहता था, लेकिन 1988 में अमेरिका ने दबाव डालकर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
    • दक्षिण कोरिया के 76 फीसदी लोगों ने न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए समर्थन दिया है। यह दिखाता है कि अब कोई भी देश सिर्फ अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर निर्भर नहीं रहना चाहता। अब दुनिया में न्यूक्लियर हथियारों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। यह अंतहीन रेस कहां जाकर खत्म होगी, इसकी कल्पना करना भी अभी मुश्किल है।

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