इजरायल-ईरान युद्ध: फारस की खाड़ी में अभी भी फंसे हैं सैकड़ों जहाज, मदद के लिए UN की एजेंसी बना रही प्लान
फारस की खाड़ी में इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण फंसे सैकड़ों जहाजों को निकालने के लिए संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी (IMO) ने एक योजना बनाई है। ...और पढ़ें

फारस की खाड़ी में फंसें जहाज

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष के बीच फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को निकालने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने कदम बढाया है। फारस की खाड़ी में सात हफ्ते से अधिक समय से फंसे सैकड़ों अंतर्राष्ट्रीय जहाजों को निकालने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने एक योजना तैयार कर ली है।
IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने मंगलवार को सिंगापुर समुद्री सप्ताह के दौरान यह जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना केवल तभी लागू की जा सकेगी, जब क्षेत्र में तनाव कम होने के साफ संकेत मिलेंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जहाजों को सुरक्षित निकासी से पहले संयुक्त राष्ट्र की इस समुद्री एजेंसी को यह पुष्टि करनी होगी कि हार्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं या नहीं? डोमिंगुएज ने कहा, 'हमारी प्राथमिकता सभी जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा है। बिना सुरक्षा गारंटी के हम कोई जोखिम नहीं उठा सकते।'

अमेरिकी धमकियों के बीच एक और जहाज पहुंचा ईरान
इस बीच, ईरान की सेना ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना की बार-बार दी गई धमकियों के बावजूद एक ईरानी तेल टैंकर 'सिली सिटी' सफलतापूर्वक अरब सागर से होते हुए ईरानी जलक्षेत्र में प्रवेश कर गया है।
मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरानी नौसेना के सहयोग से यह टैंकर देश के दक्षिणी बंदरगाहों में से एक पर कई घंटों से लंगर डाले खड़ा है। ईरानी सेना के जनसंपर्क कार्यालय ने इसे अमेरिकी दबाव के खिलाफ एक सफल ऑपरेशन बताया है।

इस्लामाबाद में क्या है तैयारी?
दूसरी ओर, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने ईरान से इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत करने को कहा है। ब्रुसेल्स में यूरोपीय विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले उन्होंने कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति इस्लामाबाद आने को तैयार हैं और ईरान को अपने लोगों के हित में इस अवसर का पूरा फायदा उठाना चाहिए।
वाडेफुल ने चेतावनी दी कि अगर ईरान इस प्रस्ताव को ठुकराता है तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ेगा। IMO की निकासी योजना सफल हुई तो हजारों नाविकों को राहत मिलेगी और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की राह भी सुगम हो सकेगी।
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