अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली है डील? ट्रंप ने तेहरान भेजा नया मसौदा; गलीबाफ मांग रहे सबूत
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को एक संशोधित, सख्त शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत दोनों देश एक समझौते के करीब बताए जा रहे हैं। ...और पढ़ें

अमेरिका-ईरान के बीच अंतिम चरण में डील (फोटो-रॉयटर्स)

समय कम है?
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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते के मसौदे में कुछ बदलाव सुझाए हैं और संशोधित प्रस्ताव तेहरान को भेज दिया है। नए प्रस्ताव में पहले की तुलना में अधिक कड़ी शर्तें शामिल की गई हैं।
ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ 'बहुत अच्छा समझौता' होने के करीब हैं। अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस ने दावा किया है कि यदि वार्ता में कोई बड़ा गतिरोध नहीं आया तो एक सप्ताह के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
दूसरी ओर, ईरान के प्रमुख वार्ताकार और हाल ही में सातवीं बार संसद अध्यक्ष चुने गए मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने स्पष्ट किया है कि तेहरान को विरोधी पक्ष के वादों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक बातचीत के ठोस नतीजे सामने नहीं आते, ईरान अपनी ओर से कोई नई प्रतिबद्धता नहीं देगा।
इस बीच, आइआरजीसी ने दावा किया है कि उसने रविवार को एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया। साथ ही दावा किया कि पिछले 24 घंटों में 20 मालवाहक जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर गए हैं।
ट्रंप बोले- जल्दबाजी में नहीं होगा समझौता
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं। अगर हमारी प्रमुख शर्तें पूरी नहीं होतीं तो हम दूसरे तरीके से आगे बढ़ेंगे।'
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ट्रंप ने कहा कि ईरान यह दावा करता रहा है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा, लेकिन अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वह भविष्य में ऐसे हथियार न बनाए और न ही विदेश से खरीदे।
एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप की ओर से भेजा गया संशोधित और अधिक सख्त प्रस्ताव ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि वह पहले से भेजे गए समझौता ढांचे को जल्द स्वीकार करे।
यह मसौदा ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की मंजूरी के लिए भेजा गया है।सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्तावों पर जवाब देने में हो रही देरी से भी नाराज हैं।
सर्वोच्च नेता तक प्रस्ताव पहुंचाने और उनकी प्रतिक्रिया मिलने की प्रक्रिया जटिल है। ऐसे में मसौदे में किसी भी नए बदलाव से समझौते में और देरी हो सकती है।
प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाए गए प्रतिबंध हटाता है तो अमेरिका और इजरायल अपने सैन्य अभियान को समाप्त कर सकते हैं। तेल और गैस आपूर्ति के लिए यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में गिना जाता है।
समझौते से जुड़े सबसे जटिल मुद्दों, जैसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य, पर फिलहाल अंतिम फैसला नहीं होगा। इन विषयों को बातचीत के अगले दौर के लिए टालने की योजना है।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है, लेकिन इसकी समयसीमा तय करना मुश्किल है। इसमें एक सप्ताह या उससे कम समय लग सकता है। ईरान की प्रतिक्रिया आने में तीन दिन तक का समय लग सकता है।'
गलीबाफ बोले- ईरान को झुकाने का सपना देख रहा अमेरिका
एएनआइ के अनुसार, गलीबाफ ने अमेरिका पर आर्थिक दबाव और मीडिया अभियानों के जरिए ईरान को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह अमेरिका का 'दिवास्वप्न' है।
गलीबाफ ने कहा कि ईरानी जनता किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी और देश की एकता को कमजोर करने की कोशिशों का मुकाबला करेगी।
अमेरिकी ड्रोन मार गिराने का दावा
प्रेट्र के अनुसार, आइआरजीसी ने दावा किया है कि रविवार तड़के एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया गया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और सेंटकाम की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आई है।
वहीं, रॉयटर्स के अनुसार, ईरान ने इराक में अलगाववादियों के एक ठिकाने पर भी हमला किया है। हालांकि हमले के सटीक स्थान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान के कट्टरपंथी धड़े समझौते के लिए तैयार नहीं
एएनआइ के अनुसार, अमेरिकी थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फार द स्टडी आफ वार-क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट (आइएसडब्ल्यू-सीटीपी) का मानना है कि ईरान के भीतर मौजूद कट्टरपंथी धड़ा कई मुद्दों पर झुकने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर सहमति बनने में कठिनाई आ रही है।
थिंक टैंक की रिपोर्ट में आइआरजीसी कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों को सबसे सख्त रुख वाला समूह बताया गया है। कहा गया कि आइआरजीसी कोई बड़ा समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं। वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अपने नियंत्रण को नई यथास्थिति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
थिंक टैंक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों का विरोध करना चाहिए क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
ट्रंप के दावे के उलट, होर्मुज में नाकेबंदी बरकरार
तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ट्रंप के दावे के उलट होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी अब भी कायम है और ईरानी जहाजों को होर्मुज से आगे बढ़ने से लगातार रोका जा रहा है।
ईरानी नाविकों के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया कि ईरानी जहाजों को लगातार अमेरिकी सेंट्रल कमांड की तरफ से चेतावनी मिल रही है कि वे नाकाबंदी से जुड़े क्षेत्र में प्रवेश न करें।
बता दें कि शुक्रवार को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि होर्मुज से नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जा रही है और अमेरिकी सैनिकों की घर वापसी हो सकेगी।
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