अमेरिका-ईरान युद्ध: होर्मुज के बंद होने से कितनी प्रभावित होगी तेल आपूर्ति? उत्पादकों के सामने नया धर्मसंकट
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी बंदी ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गहरा झटका दिया है। इस संकट ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा म ...और पढ़ें

अमेरिका-ईरान युद्ध: होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रभाव पड़ता है (फोटो- रॉयटर)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी बंदी ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गहरा झटका दिया है। इस संकट ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग को लगभग ठप कर दिया है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हड़कंप मच गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल का जीवनरेखा
ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग (सबसे संकरे बिंदु पर मात्र 33 किमी चौड़ा) दुनिया के सबसे रणनीतिक चोकपॉइंट्स में से एक है। सामान्य स्थिति में यहां से प्रतिदिन औसतन 20 मिलियन बैरल (लगभग 20% वैश्विक तेल खपत) कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं। इसके अलावा, वैश्विक LNG (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) का भी करीब 20-25% इसी मार्ग से होता है।
अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने इस जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट घोषणा की है कि अमेरिका-इजरायल हमले रुकने तक कोई जहाज गुजरने नहीं दिया जाएगा। परिणामस्वरूप, वाणिज्यिक जहाजरानी लगभग ठप हो गई है, केवल कुछ ईरानी और चीनी जहाज सीमित रूप से गुजर रहे हैं। बीमा कंपनियां और बड़े तेल व्यापारी इस मार्ग से पूरी तरह हट गए हैं।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रभाव
20% वैश्विक तेल आपूर्ति सीधे प्रभावित: खाड़ी देशों (सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई, कतर) से निर्यात रुक गया है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे प्रमुख उत्पादकों ने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है क्योंकि उनके भंडार भर चुके हैं और टैंकर नहीं लोड हो पा रहे।
तेल कीमतों में उछाल: ब्रेंट क्रूड कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि लंबे समय तक बंदी बनी रहने पर कीमतें 130-200 डॉलर तक जा सकती हैं।
LNG पर गहरा असर: कतर जैसे प्रमुख निर्यातक प्रभावित हैं, जिससे एशियाई देशों (चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया) में गैस संकट गहरा सकता है। LNG बाजार तेल से ज्यादा प्रभावित हो सकता है क्योंकि उत्पादन केंद्रित है और वैकल्पिक मार्ग सीमित हैं।
एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित: होर्मुज से गुजरने वाला 80-90% तेल एशियाई बाजारों के लिए जाता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में ईंधन की कमी और महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
वाणिज्यिक जहाजरानी ठप, केवल सीमित जहाज गुजर रहे
परिणामस्वरूप, वाणिज्यिक जहाजरानी लगभग ठप हो गई है, केवल कुछ ईरानी और चीनी जहाज सीमित रूप से गुजर रहे हैं। बीमा कंपनियां और बड़े तेल व्यापारी इस मार्ग से पूरी तरह हट गए हैं। मरीनट्रैफिक डेटा के अनुसार, फारस की खाड़ी में करीब 500 तेल टैंकर लंगर डाले खड़े हैं।
ऊर्जा अवसंरचना पर हमले
- सऊदी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी (550,000 बैरल/दिन क्षमता) पर ड्रोन हमले के बाद इसे बंद कर दिया गया। यह सऊदी का सबसे बड़ा घरेलू रिफाइनरी और प्रमुख निर्यात टर्मिनल है।
- बहरीन की सिट्रा रिफाइनरी (380,000 बैरल/दिन) पर हमला हुआ और फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया गया।
- इजरायल के गैस फील्ड्स और अन्य सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं।
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