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    नेपाल बॉर्डर पर बालेन शाह के सख्त तेवर, 79 साल बाद फिर एक बार ब्रिटिशर्स को बुलाने की मांग

    Updated: Sun, 31 May 2026 06:58 PM (IST)

    नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सीमा विवाद पर कूटनीतिक बातचीत के लिए ब्रिटिशर्स को शामिल करने की मांग की है। ...और पढ़ें

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    नेपाल बॉर्डर पर बालेन शाह के सख्त तेवर (फोटो-प्रतिनिधि सभा, नेपाल)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सरकार बनाने के दो महीने बाद सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक बातचीत करने की बात कही है। इसके साथ ही बालेन शाह ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ब्रिटिशर्स को भी बातचीत में शामिल करने की बात कही।

    27 मार्च से नेपाल की सत्ता संभालने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रतिनिधि सभा को संबोधित किया। शाह ने विपक्षी सांसदों के प्रश्नों का उत्तर दिया। उन्होंने सीमा प्रबंधन के लिए सहयोगात्मक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

    बालेन शाह के सख्त तेवर

    प्रधानमंत्री बालेन शाह के संबोधन की अहम बात यह थी कि उन्होंने इस कूटनीतिक बातचीत में यूनाइटेड किंगडम को भी औपचारिक रूप से शामिल करने की बात कही।

    बालेन शाह का कहना है कि इस क्षेत्र की आधुनिक सीमाएं औपनिवेशिक काल से जुड़ी हैं, इसलिए ब्रिटिश सरकार की इस मामले में ऐतिहासिक जवाबदेही बनती है और उनके पास इससे जुड़े अहम दस्तावेजी सबूत भी मौजूद हैं।

    अंग्रेज हमारे सामने समस्या छोड़कर गए

    संसद में बोलते हुए पीएम बालेन शाह ने कहा, 'जब ब्रिटिशर्स भारत छोड़कर जा रहे थे, तो यह समस्या आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ गए। इसीलिए हमारा मानना है कि इंग्लैंड को भी इस मामले पर ध्यान देना चाहिए।'

    बालेन शाह ने आगे कहा, 'ये सभी मुद्दे बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से ही सुलझाए जाएंगे।'

    भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत

    नेपाल सरकार ने इस संबंध में नई दिल्ली के साथ पहले ही कूटनीतिक बातों का आदान-प्रदान कर लिया है। बालेन शाह के मुताबिक, इस पर बनी सहमति के तहत दोनों पक्षों के इतिहासकारों, विशेषज्ञ सर्वेक्षकों और सीमा मामलों के जानकारों को एक साथ लाकर बातचीत की जाएगी, ताकि इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का व्यवस्थित रूप से मूल्यांकन किया जा सके।

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    भारत ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वह नेपाल के साथ द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।

    इसमें बातचीत और कूटनीति के जरिए सीमा से जुड़े उन सभी लंबित मुद्दों को सुलझाना भी शामिल है, जिन पर दोनों पक्षों के बीच पहले ही सहमति बन चुकी है।

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