30 दिन में 2 इस्तीफे और इन फैसलों ने मचाई हलचल; क्या नेपाल को बदल पाएंगे 'Gen Z' नेता' बालेन शाह?
नेपाल में बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के 30 दिनों के भीतर कई बड़े बदलाव हुए, जिसमें पूर्व पीएम की गिरफ्तारी, सरकारी दफ्तरों में नेताओं की तस्वीर पर ...और पढ़ें

नेपाल के पीएम बालेन शाह की फाइल फोटो। (सोर्स - रॉयटर्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल में 'सड़क बालक' नाम का गाना लिखने वाला लड़का कल को देश के शीर्ष नेताओं को सड़क पर ले आएगा, किसको पता था। यह कहानी है, एक ऐसे लड़के की जो भले ही एक बार अपना वोट पढ़ाई के कारण न दे सका हो, लेकिन उसे पता था अगली बार वोट देने के लिए नहीं बल्कि वोट लेने के लिए काम करना है।
नेपाल में हुए पिछले 30 दिनों का एक्शन
तारीख थी 27 मार्च 2026, यानी आज से ठीक एक महीने पहले और जगह थी राष्ट्रपति भवन शीतल निवास, काठमांडू। मंच पर 35 साल के बालेन शाह आते है और नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है एक्शन का दौर, पीएम बनते ही बालने सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा देते है।
सरकारी दफ्तरों से लेकर नेताओं के घर तक, यह खबर आग की तरह फैल जाती है। इसके साथ ही बालेन पास करते है एक आदेश, जिसमें लिखा होता है कि अब से किसी भी सरकारी दफ्तरों में किसी नेता की तस्वीर नहीं लगेगी। छात्र राजनीति पर रोक लगाने का आदेश दे दिया जाता है।
सरकारी अफसरों के लिए भी आया फरमान
नेताओं के बाद बारी आती है, सरकारी अफसरों की। इस दिशा में भी, एक ठोस कदम उठाने के लिए आदेश निकाला जाता है। आदेश के अनुसार, सरकारी अफसरों और नेताओं के बच्चों को अब से सरकारी स्कूलों में ही पढ़ना होगा। इस आदेश के पीछे तर्क दिया जाता है कि, इससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी और समाज में वीआईपी कल्चर (VIP Culture) खत्म होगा।
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इस दौरान एक आदेश में आम जनता और सरकारी तंत्र के बीच तालमेल बैठाने की भी खबर सामने आती है। इसमें, नेपाल के सभी सरकारी कर्मचारियों को सैलरी के लिए महीने के अंत का इंतजार नहीं करना होगा; उन्हें अब हर 15 दिन में सैलरी दी जाएगी। इसको लेकर आर्थिक तरलता और कर्मचारियों के मनोबल बढ़ने की बात कही गई।
नेताओं और अफसरों के बाद बारी आई आम जनता की
नेपाल में चल रहे 30 दिनों के एक्शन में अगली बारी आती है आम जनता की। पीएम बालेन शाह की सरकार एक और नियम को सख्ती से लागू करने में लगा जाती है। इसमें भारत के साथ होने वाले सीमा व्यापार की ओर ध्यान दिया जाता है। भारत से 100 रुपए से अधिक का सामान लाने पर टैक्स देना अनिवार्य कर दिया जाता है। हालांकि, यह नियम पहले से ही है, इसे बस बालेन शाह ने सख्ती से लागू करने को कहा जाता है।
इस फैसले से सीमावर्ती इलाकों (Border Areas) के लोगों में भारी विरोध देखने को मिलता है। इसके साथ ही लोग प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाते है। इस नियम को लेकर नेपाल के स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि, संरक्षण के नाम पर लिए गए इस फैसले ने आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है।

दैनिक उपभोग की वस्तुओं के लिए भारत पर निर्भर रहने वाले नेपाली नागरिकों में इस आदेश को लेकर काफी गुस्सा है। इसके अलावा आलोचकों का कहना है कि यह फैसला भारत और नेपाल के बीच के सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों में दरार डाल सकता है।
इस्तीफे और विरोधों का दौर शुरू
इन सब के बीच बालेने शाह की कार्यशैली को लेकर उनकी अपनी कैबिनेट में ही असंतोष दिखने लगा है। महज 30 दिनों के भीतर उनके दो वरिष्ठ मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों का कहना है कि बालेन शाह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय व्यक्तिगत आदेशों (Dictatorial style) पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।
जेन-जी (Gen-Z) और छात्र, जो कभी बालेन के सबसे बड़े प्रशंसक थे, अब छात्र राजनीति पर प्रतिबंध और उनकी “वन-मैन शो” वाली छवि पर सवाल उठा रहे हैं। बालेन शाह के पास नेपाल को आधुनिक और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का विजन तो है, लेकिन उनकी तेज और कड़क कार्यशैली उन्हें विवादों के घेरे में भी ला रही है। अब ऐसे में सवाल उठ रहें हैं कि क्या ये बदलाव नेपाल को एक नई दिशा देंगे या देश को एक तानाशाही की ओर धकेल देंगे।
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