Explainer: चीन की चाल में फंस रहा बांग्लादेश या भारत के साथ बातचीत की रणनीति?
क्या नए नेतृत्व में चीन का 'रणनीतिक मोहरा' बन रहा है बांग्लादेश या फिर भारत के साथ बातचीत के लिए सिर्फ ढाका की सोची समझी एक चाल? ...और पढ़ें
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तारिक रहमान और शी जिनफिंग।
HighLights
नए नेतृत्व में चीन का 'रणनीतिक मोहरा' बन रहा बांग्लादेश।
तीस्ता परियोजना और मोंगला पोर्ट पर चीन का बढ़ता दखल।
भारत के साथ बातचीत के लिए बांग्लादेश चल रहा ये चाल।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद जब नए प्रधानमंत्री के रूप में तारिक रहमान ने कमान संभाली, तो इस बात की उम्मीद थी कि भारत-बांग्लादेश के संबंधों में एक नया और मजबूत अध्याय शुरू होगा। हालांकि, रहमान के शपथ ग्रहण से लेकर आज तक की जमीनी हकीकत इन उम्मीदों के ठीक उलट दिख रही है। इतना ही नहीं इन अपेक्षाओं के बीच बांग्लादेश की चीन के साथ नजदीकियां भी लगातार बढ़ रही है।
हां इसमें कोई दोहराई नहीं कि बतौर एक पड़ोसी बांग्लादेश का ये रवैया भारत के लिए थोड़ा चिंताजनक तो है। हालांकि अब इन नजदीकियों का एक अलग पहलू भी सामने आया है, जिससे एक साथ कई सारे सवाल भी खड़े होने लगे हैं।
बांग्लादेश-चीन की ये कैसी नजदीकियां?
अब इस पूरे मामले को ऐसे समझिए कि इन दिनों ढाका और बीजिंग के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक नजदीकियों जैसे तीस्ता परियोजना पर चीन के साथ सरकारी स्तर के सहयोग से लेकर मोंगला पोर्ट को लेकर हुए नए समझौतों के एलान तक, बांग्लादेश का रुख साफ तौर पर चीन की तरफ पूरा-पूरा झूका दिख रहा है।
बहरहाल अब सवाल ये खड़ा हो रहा है कि ढाका का यूं बीजिंग का दामन थामना क्या यह वाकई भारत से दूरी है, या फिर बातचीत की मेज पर भारत के सामने खुद को मजबूत करने की बांग्लादेश की कोई सोची-समझी रणनीति? आइए समझते हैं।
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चीन का 'खुला दरवाजा' और कॉरिडोर की राजनीति
बीते दिनों चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। इसी बीच चीन ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है।
इस दांव को शुरुआत से ऐसे समझिए कि लगभग 15 साल पहले एक कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया था बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (BCIM)। हालांकि भारत के रुख के कारण इसमें ज्यादा प्रगति नहीं हुई। ऐसे में अब चीन ने भारत को छोड़कर चीन-म्यांमार-बांग्लादेश आर्थिक कॉरिडोर (CMBC) पर तेजी से आगे बढ़ने का फैसला किया है।
यहां दिखी ड्रैगन की चालबाजी
अब चीन की चालबाजी की बात करें तो बीते दिनों बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने कहा है कि भारत के लिए दरवाजे अभी भी खुले हैं, बशर्ते वह आना चाहे। लेकिन चीन अब भारत का इंतजार किए बिना आगे बढ़ने के लिए दृढ़ है। ऐसा करके चीन इस पूरे इलाके की पावर डायनेमिक्स को अपने हाथ में रखना चाहता है।
तीस्ता प्रोजेक्ट और मोंगला पोर्ट, भारत के लिए चिंता क्यों?
इस बात को ऐसे समझिए कि फाइटर प्लेन खरीदने से लेकर नदी घाटी प्रबंधन तक, चीन अब बांग्लादेश के उन सेक्टर्स में घुस चुका है जो भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। कारण है कि तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन अब बांग्लादेश के साथ मिलकर सरकारी स्तर पर काम करने और अपने वैज्ञानिकों से सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है।
तीस्ता का इलाका भारतीय सीमा के बेहद करीब है, इसलिए वहां चीन की मौजूदगी भारत के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि बांग्लादेश के साथ भारत का विकास सहयोग एक तय रोडमैप पर चलता है। भारत तीस्ता से जुड़े हर घटनाक्रम पर नजर रख रहा है और अपनी रणनीति में इसे शामिल करेगा।
म्यांमार में भारत बनाम चीन की जंग
बंगाल की खाड़ी और म्यांमार में अपना दबदबा बनाने के लिए भारत और चीन दोनों ही अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।
| विशेषता | भारत का प्रोजेक्ट (कालादान) | चीन का प्रोजेक्ट (क्यौकप्यू) |
| मुख्य केंद्र | म्यांमार का सिटवे पोर्ट। | म्यांमार का क्यौकप्यू डीप-सी पोर्ट। |
| रूट/रास्ता | कोलकाता से सिटवे (समुद्र द्वारा), फिर कालादान नदी और सड़क मार्ग से मिजोरम तक। | चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' का हिस्सा, जो इसे सीधा बंगाल की खाड़ी से जोड़ता है। |
| रणनीतिक फायदा | भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच आसान होगी और संवेदनशील 'चिकन नेक' (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) पर निर्भरता कम होगी। | चीन को मलक्का जलडमरूमध्य के लंबे और व्यस्त रास्ते से गुजरे बिना सीधे हिंद महासागर में एंट्री मिल जाएगी। |
भारत के लिए बड़े टेकअवेज, समझिए कैसे?
तीन देशों के इस जटिल कूटनीति और फिर इसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक पंडितों का भी अपना अलग रुख है। विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश के इस कदम के पीछे दो मुख्य वजहें हैं। पहला कि बांग्लादेश पूरी तरह से चीन के पाले में नहीं जा रहा है। वह चीन के साथ अपनी नजदीकी दिखाकर भारत को यह संदेश देना चाहता है कि उसके पास विकल्प मौजूद हैं, ताकि वह भारत से बातचीत के दौरान ज्यादा रियायतें या बेहतर डील हासिल कर सके।
दूसरी वजह है कि बांग्लादेश के भीतर इस समय भारत-विरोधी सुरों को हवा मिल रही है, जिसका फायदा वहां के नेता उठा रहे हैं। हालांकि, बांग्लादेश यह भी जानता है कि संकट के समय भारत ने ही उसकी सबसे ज्यादा मदद की थी।