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    अब ढाका किसका? बीएनपी की जीत ने बढ़ाया दिल्ली और बीजिंग का सस्पेंस

    Updated: Mon, 16 Feb 2026 08:17 PM (IST)

    बांग्लादेश संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 210 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है, जिससे वहां एक स्थिर सरकार का रास्ता साफ हो गया है। जमात-ए-इस्लामी ...और पढ़ें

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    शेख हसीना के बाद अब भारत के साथ रिश्तों पर टिकी दुनिया की नजर। फाइल फोटो

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें
    जागरण टीम, नई दिल्‍ली। बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 210 सीटें जीतकर करीब दो तिहाई बहुमत हासिल किया है। इससे बांग्लादेश में एक स्थिर निर्वाचित सरकार का रास्ता साफ हो गया है। धार्मिक कट्टरता और अपनी अतिवादी सोच के लिए जानी जाने वाली जमात-ए-इस्लामी की अगुआई वाले गठबंधन को लोगों ने नकार दिया है। चुनाव में बांग्लादेश के लोगों ने संविधान में बदलाव के पक्ष में वोट किया है।
     
    इसका मतलब है कि संविधान में बदलाव किए जाएंगे और इसके तहत प्रधानमंत्री की शक्तियों पर अंकुश लगाते हुए राष्ट्रपति के पद को सशक्त बनाया जाएगा। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में हिंसा और अस्थिरता का माहौल है। खासकर एक करोड़ हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं।

    यह देखना होगा कि बीएनपी की अगुआई में नई सरकार बांग्लादेश में स्थिरता कायम कर पाती है या नहीं। भारत के लिए भी एक मौका है कि वह नई सरकार के साथ काम करते हुए द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाए, जो यूनुस सरकार में निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। नई सरकार के कार्यकाल में बांग्लादेश एक उदार और समावेशी लोकतंत्र का रास्ता चुनेगा या अतिवादी सोच वाली इस्लामी ताकतें हावी होंगी, इसकी पड़ताल आज प्रासंगिक है...

    • 4000 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा तय करते हैं भारत-पाकिस्‍तान।
    • 475 अरब डॉलर है बांग्लादेश की जीडीपी का आकार वर्तमान में ।

    भारत-बांग्लदेश: सहयोगपूर्ण लेकिन जटिल संबंध

    • बंगाल क्षेत्र साझा भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा रहा है।
    • 1971 के मुक्ति संग्राम में भारत की सहायता ने स्थायी मित्रता की नींव रखी।
    • साहित्य, संगीत, भोजन और त्योहारों में समानता।

    राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग

    1972 मैत्री संधि।
    2015 भूमि सीमा समझौता- दशकों पुराने एन्क्लेव विवाद समाप्त।
     
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    लोकतंत्र और स्थिरता

    • लोकतांत्रिक सरकारों के दौरान संबंध अधिक मजबूत रहे।
    • राजनीतिक बदलावों से कभी-कभी दूरी भी आई।

    सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग

    • पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय उग्रवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई।
    • सीमा पार आतंकवाद पर नियंत्रण।

    सीमा प्रबंधन

    • लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की संयुक्त निगरानी।
    • तस्करी और मानव तस्करी रोकने के प्रयास।
    • समुद्री सहयोग बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा और संसाधन प्रबंधन।

    आर्थिक और व्यापारिक सहयोग

    • बांग्लादेश भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार।
    • वस्त्र, दवाइयां, मशीनरी और खाद्य उत्पादों का व्यापार।
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    कनेक्टिविटी परियोजनाएं

    • रेल, सड़क और जलमार्ग संपर्क।
    •  ऊर्जा सहयोग और बिजली आपूर्ति।

    क्षेत्रीय संपर्क

    • पूर्वोत्तर भारत की अर्थव्यवस्था को गति।

    जल संसाधन और पर्यावरण सहयोग

    • साझा नदियों के जल प्रबंधन पर सहयोग।
    • 1996 गंगा जल संधि।
    •  तीस्ता नदी जल बंटवारा अभी भी लंबित मुद्दा।
    • बाढ़ नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन पर सहयोग आवश्यक।

    सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क

    • शैक्षणिक आदान-प्रदान और छात्रवृत्तियां।
    • फिल्म, संगीत और मीडिया सहयोग।
    • धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन।

    संबंधों की जटिलताएं

    • सुरक्षा: अवैध आव्रजन और सीमा सुरक्षा चिंताएं।
    • व्यापार असंतुलन: बांग्लादेश भारत के साथ व्यापार घाटे की चिंता जताता है।
    • जल बंटवारा विवाद: विशेषकर तीस्ता जल समझौता लंबित।
    • घरेलू राजनीति का प्रभाव: राष्ट्रवादी भावनाएं और आंतरिक राजनीति संबंधों को प्रभावित करती हैं।
    • चीन का बढ़ता प्रभाव: बुनियादी ढांचा निवेश और रणनीतिक संतुलन का मुद्दा।
    • 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करते हैं  भारत- बांग्लादेश
    • 475 अरब डालर है बांग्लादेश की जीडीपी का आकार वर्तमान में
    • बांग्लादेश में चीन और अमेरिका की बढ़ती भूमिका

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    चीन का निवेश

    • बंदरगाह, पुल, सड़क और ऊर्जा परियोजनाओं में भारी निवेश
    • पदमा ब्रिज जैसे बड़े प्रोजेक्ट में सहयोग
    • बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत रणनीतिक पहुंच बढ़ाना
    • सैन्य सहयोग (चीन–बांग्लादेश)
    • बांग्लादेश की सेना को हथियार और नौसैनिक उपकरण की आपूर्ति
    • पनडुब्बियां और रक्षा तकनीक सहयोग

    अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति

    • अमेरिका का क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर जोर
    • लोकतंत्र, मानवाधिकार और मुक्त व्यापार के नाम पर रणनीतिक साझेदारी
    • समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की कोशिश


    भारत की सुरक्षा चिंताएं

    रणनीतिक घेराबंदी का खतरा

    • चीन की ‘स्ट्रिंग आफ पर्ल्स’ नीति से भारत के चारों ओर रणनीतिक दबाव
    •  बंदरगाहों और सैन्य पहुंच से निगरानी क्षमता बढ़ सकती है

    पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा

    • बांग्लादेश की सीमा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी है
    •  बाहरी शक्तियों की उपस्थिति से सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है

    समुद्री सुरक्षा और बंगाल की खाड़ी

    • बंगाल की खाड़ी में बढ़ती सैन्य और रणनीतिक गतिविधियां
    • भारत के समुद्री व्यापार मार्गों पर संभावित प्रभाव

    राजनीतिक प्रभाव और संतुलन

    • बांग्लादेश की विदेश नीति में चीन और अमेरिका का बढ़ता प्रभाव
    •  भारत की पारंपरिक क्षेत्रीय भूमिका को चुनौती

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    इस पर क्‍या सोचते हैं भारतीय?

    दिल्‍ली निवासी युगल किशोर राही कहना है-

    तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। तारिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर है। कट्टरपंथी पार्टी जमात विपक्ष में अवश्य बैठेगी । मगर उसकी नजरें भारत पर ही रहेगी। जमात-ए-इस्लामी से आने वाली चुनौती के लिए भारत को तैयार रहना होगा। जमात गठबंधन ने संसद में 75 से अधिक सीटें जीतकर अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। भारत को अतीत में बीएनपी-नेतृत्व वाले राजनीतिक शासन के साथ काम करने का अनुभव है।

    नोएडा निवासी राजेश चौहान कहते हैं -

    हमें नहीं लगता है कि बांग्लादेश में नवनिर्वाचित सरकार तारिक रहमान के राज में भी हमारे देश के साथ संबंध मधुर हो पाएंगे और वहां हिंदुओं के अच्छे दिन आ सकते हैं, क्योंकि यह भी वहां के उन कट्टरपंथी लोगों के हाथ की कठपुतली बन जाएंगे जो हमारे देश के प्रति बेवजह की संकीर्ण मानसिकता पाले बैठे हैं। इन्हें उन लोगों ने चुना है जो शेख हसीना के कट्टर विरोधी थे, हमारे देश ने शेख हसीना को शरण दी और शेख हसीना हमेशा ही हमारे देश के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश करती आईं हैं, जबकि बांग्लादेश के कट्टरपंथी हमारे देश के साथ नफरत की भावना भी रखते हैं।

    देवानंद राय का कहना है- 

    बीएनपी के सत्ता में लौटते ही बांग्लादेश में हिंसा और अस्थिरता का माहौल समाप्त हो जाएगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी क्योंकि इस चुनाव में दूसरे पायदान पर रहने वाली पार्टी जमात चुनाव नतीजे से संतुष्ट नहीं है। पड़ोसी देश में आंदोलन, हिंसा और राजनीतिक उठा-पटक का एक लंबा इतिहास रहा है जिसका भुक्तभोगी अंततः वहां का अल्पसंख्यक अर्थात हिंदू होता है।

     किस राह बांग्लादेश.. इस पर एक्‍सपर्ट्स का क्‍या कहना है?

    बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का अक्सर शरणार्थियों की आवाजाही, अवैध प्रवासन, सीमा तनाव और कट्टरपंथी गतिविधियों के रूप में पड़ सकता है। इसलिए भारत का मुख्य हित यह सुनिश्चित करना है कि अगली सरकार आंतरिक व्यवस्था को बहाल करे, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करे और कट्टरपंथी नेटवर्क पर नियंत्रण रखे। - डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव असिस्टेंट प्रोफेसर, जेएनयू

    अंतराष्‍ट्रीय मामलों के जानकार ऋषि गुप्ता का कहना है-

    तारिक रहमान ने चुनाव में समावेशी बांग्लादेश का वादा किया था। इसका मतलब है कि बीएनपी सभी नागरिकों की सुरक्षा और उनका विकास सुनिश्चित करेगी। बांग्लादेश में हिंसा और अस्थिरता का दौर खत्म करना है तो इस चुनावी वादे को जमीन पर लागू करना होगा।

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