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    समुद्री जीवों को बचाने की ऐतिहासिक पहल, प्रभाव में आई 'हाई सीज ट्रीटी'

    Updated: Sun, 18 Jan 2026 01:53 AM (IST)

    अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में समुद्री जीवन की रक्षा के लिए दुनिया का पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता 'हाई सीज ट्रीटी' शनिवार से प्रभाव में आ गया। लग ...और पढ़ें

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    अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में समुद्री जीवन की सुरक्षा के लिए दुनिया का पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता लागू

    एपी, न्यूयॉर्क। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में समुद्री जीवन की रक्षा के लिए दुनिया का पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता 'हाई सीज ट्रीटी' शनिवार से प्रभाव में आ गया। लगभग दो दशकों की लंबी बातचीत के बाद लागू हुई यह संधि महासागर संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह संधि उन समुद्री क्षेत्रों पर लागू होगी, जो किसी भी देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।

    खुले समुद्र आज विनाशकारी मछली पकड़ने, जहाजों से होने वाले प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे, अति दोहन और संभावित गहरे समुद्री खनन जैसे खतरों से जूझ रहे हैं।

    जलवायु परिवर्तन ने इन चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है, जबकि महासागर कार्बन डाइआक्साइड सोखने और आक्सीजन पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।चीन-जापान जैसे देशों ने दी मंजूरी संयुक्त राष्ट्र की पहल पर सितंबर में 60 देशों द्वारा अनुमोदन की शर्त पूरी होने के 120 दिन बाद संधि लागू हुई।

    अब तक चीन और जापान सहित 83 देश इसे मंजूरी दे चुके हैं। इसके माध्यम से पहली बार खुले समुद्र में 'मरीन प्रोटेक्टेड एरिया' स्थापित करने का ढांचा तैयार हुआ है, जबकि फिलहाल ऐसे जलक्षेत्र का मात्र एक प्रतिशत ही संरक्षित है।

    संधि के लागू होते ही सदस्य देशों को समुद्री विज्ञान व तकनीक में सहयोग बढ़ाने, विकासशील देशों की क्षमता निर्माण में मदद करने और समुद्री गतिविधियों से पहले सख्त पर्यावरणीय प्रभाव आकलन सुनिश्चित करने होंगे। दवाओं जैसे व्यावसायिक उपयोग वाले समुद्री अनुसंधान की जानकारी साझा करना भी अनिवार्य किया गया है।

    अमेरिका ने हस्ताक्षर किए, पर पुष्टि नहीं की

    विशेषज्ञों का कहना है कि 2030 तक 30 प्रतिशत महासागरों को संरक्षित करने के वैश्विक लक्ष्य के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। ग्रीनपीस की मेगन रैंडल्स ने चेताया कि संरक्षित क्षेत्र उतने ही प्रभावी होंगे, जितनी सरकारों की इच्छाशक्ति। हालांकि निगरानी और प्रवर्तन की व्यवस्था अभी तय होनी बाकी है।

    अमेरिका ने संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं, पर पुष्टि नहीं की, इसलिए उसे मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। इसके बावजूद समर्थकों का मानना है कि यह समझौता विभाजित दुनिया में प्रकृति संरक्षण की साझा जीत का प्रतीक है।