ईरान की ताकत बड़ी शक्तियों को न कहने की उसकी क्षमता: अब्बास अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान की असली ताकत बड़ी शक्तियों को 'ना' कहने की उसकी क्षमता में निहित है। उन्होंने यूरेनियम संवर्धन ...और पढ़ें

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (फोटो-रॉयटर्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशव्यापी प्रदर्शनों और अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सख्त रुख अपनाते हुए रविवार को कहा कि तेहरान की ताकत 'बड़ी शक्तियों को न कहने' की उसकी क्षमता है।
तेहरान में एक शिखर सम्मेलन में राजनयिकों को संबोधित करते हुए अराघची ने संकेत दिए कि ईरान अपने इस रुख पर कायम रहेगा कि उनके देश के पास यूरेनियम संवर्धन की क्षमता होनी चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ विवाद का भी यह एक प्रमुख मुद्दा है।
अराघची ने कहा, 'मेरा मानना है कि ईरान की शक्ति का रहस्य दूसरों की दादागिरी, प्रभुत्व और दबावों के विरुद्ध खड़े होने की उसकी क्षमता में निहित है। वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम नहीं बना रहे हैं। हमारा परमाणु बम बड़ी शक्तियों को न कहने की शक्ति है। हमारी शक्ति का रहस्य शक्तियों को न कहने की शक्ति में है।''
हालांकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ओमान में अमेरिका के साथ वार्ता की सराहना करते हुए इसे आगे बढ़ा हुआ कदम करार दिया, लेकिन अराघची की टिप्पणियां आगे की चुनौतियों को दर्शाती हैं।
खामेनेई का आशीर्वाद मिलने के बाद अराघची को अमेरिका से बातचीत का आदेश देने वाले पेजेश्कियन ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'क्षेत्र में मित्र सरकारों के प्रयासों से हुई ईरान-अमेरिका वार्ता आगे बढ़ा एक कदम थी। शांतिपूर्ण समाधान के लिए वार्ता हमेशा हमारी रणनीति रही है। ईरान ने हमेशा सम्मान का उत्तर सम्मान से दिया है, लेकिन वह ताकत की भाषा सहन नहीं करता।'
अभी यह साफ नहीं है कि वार्ता के दूसरे चरण का आयोजन कब और कहां होगा। शुक्रवार की वार्ता के बाद ट्रंप ने ज्यादा विवरण तो नहीं दिया, लेकिन कहा, 'ऐसा लगता है कि ईरान बेहद खराब तरीके से समझौता करना चाहता है, जैसा उसे करना भी चाहिए।'
(समाचार एजेंसी एपी के इनपुट के साथ)
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