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    शेयर बाजार में उछाल, तेल की कीमतों में कटौती... US-Iran समझौते के पॉजिटिव रिजल्ट; आखिरी रोडमैप तैयार

    Updated: Mon, 22 Jun 2026 11:46 PM (IST)

    अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में 60 दिनों के भीतर स्थायी शांति समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति बनी है। ...और पढ़ें

    अमेरिका-ईरान के बीच अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार (फोटो-रॉयटर्स)

    अमेरिका-ईरान के बीच अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार (फोटो-रॉयटर्स)

    HighLights

    1. अमेरिका-ईरान वार्ता में 60 दिन का रोडमैप तय।

    2. कतर-पाकिस्तान की मध्यस्थता से वैश्विक बाजारों को राहत।

    3. होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान संघर्ष पर भी सहमति।

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने के लिए स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय वार्ता सोमवार तड़के समाप्त हो गई।

    कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए रोडमैप पर सहमति जताई है।

    वार्ता के सकारात्मक रुख से वैश्विक बाजारों ने भी राहत की सांस ली। शेयर बाजारों में उछाल दर्ज किया गया, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई।

    हालांकि, कीमतें 80 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं। इन सबके बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य से भी कुछ जहाजों के निकलने की खबरें हैं। लेबनान पर भी शनिवार के बाद से इजरायली हमले नहीं हुए।

    US-Iran वार्ता में अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार

    न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, लेक ल्यूसर्न शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कतर और पाकिस्तान ने कहा कि बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में हुई।

    वार्ता के दौरान आगे की तकनीकी बैठकों के लिए एक व्यवस्था बनाने पर भी सहमति बनी है। मध्यस्थों ने प्रगति को उत्साहजनक बताया।

    समझौते के तहत एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी, जो मध्यस्थता प्रक्रिया को राजनीतिक दिशा देगी। यह समिति मुख्य वार्ताकारों से नियमित रिपोर्ट लेगी और परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों तथा विवाद निपटान से जुड़े विशेष कार्य समूहों की निगरानी करेगी।

    पक्षों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने, किसी भी गलतफहमी या अप्रिय घटना को रोकने के लिए एक विशेष संपर्क माध्यम भी स्थापित करने पर सहमति दी है।

    लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए ‘डी-कन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने का भी निर्णय हुआ है। इसमें अमेरिका, ईरान, लेबनान और मध्यस्थ देश शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सैन्य गतिविधियां बंद कराने संबंधी समझौते के पालन की निगरानी करना है।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता के बाद कहा कि लेबनान संघर्ष समाप्त करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। उन्होंने डी-कन्फ्लिक्शन सेल को इस प्रक्रिया की पहली वास्तविक परीक्षा बताया। हालांकि, स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच आगे भी बातचीत होगी या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि स्विट्जरलैंड में पूरे हफ्ते बातचीत चलेगी। वहीं ईरानी प्रतिनिधिमंडल 18 घंटे की बातचीत के बाद तेहरान लौट गया।

    ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, बातचीत मुख्य रूप से लेबनान पर केंद्रित थी और इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर कोई चर्चा नहीं हुई। ईरान की सरकारी तेल कंपनी के प्रबंध निदेशक हामिद बोवार्ड ने बताया कि देश के तेल और उससे जुड़े उद्योगों पर से प्रतिबंध हटाने के बारे में भी चर्चा की गई।

    गौरतलब है कि रविवार को वार्ता पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद दबाव बढ़ गया था। ट्रंप ने फाक्स न्यूज से बातचीत में कहा था कि समझौते पर बातचीत के 60 दिनों की अवधि के बाद मैं जो चाहूंगा, वही करूंगा। उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की परमाणु संवर्धन से जुड़ी टिप्पणी पर कहा था कि उनकों जबान संभालकर बात करनी चाहिए, वरना ईरान पर फिर भारी बमबारी हो जाएगी।

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    हालांकि, वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करनेवाले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप पश्चिम एशिया में ईरान के साथ नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं।

    जेडी वेंस ने कहा कि शांति के लिए परस्पर सहयोग की जरूरत होती है। ये ऐतिहासिक मुलाकात रही। उन्होंने कहा कि हमने तकनीकी पहलुओं पर बातचीत शुरू की है, जो हर तरह की असहमति का समाधान नहीं करेगी, लेकिन इसके जरिये हमें एक टीम के तौर पर साथ बैठकर बात करने की सुविधा मिलेगी।

    वेंस ने कहा कि रविवार की बातचीत ने अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।

    होर्मुज पर ट्रंप की धमकी को ईरानी सांसद का जवाब

    एएनआइ के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण लेने संबंधी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका का निजी ‘कैसीनो’ या आधुनिक समुद्री लुटेरों का पिछवाड़ा नहीं है।

    अजीजी ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका धमकियां देता है, जबकि ईरान कार्रवाई करता है। उन्होंने होर्मुज को ईरान का संप्रभु जलक्षेत्र बताते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अंतिम फैसला ईरान की जनता और उसके सशस्त्र बल करेंगे। यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच जारी तकनीकी वार्ता के दौरान आया है।

    ईरान के बाजार पर अमेरिका की नजर

    एपी के अनुसार, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री स्काट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ईरान को अगले 60 दिनों के लिए तेल बेचने का लाइसेंज जारी कर रहा है।

    खास बात ये है कि ईरान अमेरिका को भी तेल निर्यात कर सकेगा। ईरान पर 1990 से तेल प्रतिबंध लागू थे। बेसेंट ने कहा कि ईरान को ये छूट 21 अगस्त तक जारी रहेगी।

    वहीं, वेंस ने कहा कि अमेरिका ईरान की विदेश में जब्त संपत्तियों को जारी कर सकता है ताकि ईरान अपने नागरिकों के लिए अमेरिकी सोयाबीन, मक्का और गेहूं खरीद सके। उन्होंने कहा कि ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने कतर के साथ इस विचार पर बात की है।

    चीन को सस्ता तेल बेच रहा ईरान

    अमेरिका के साथ शांति समझौते के बाद ईरान ने चीन को बेचे जाने वाले कच्चे तेल की कीमतों में कटौती कर दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान प्रति बैरल ढाई से पांच डालर तक की छूट पर तेल बेच रहा है।

    समझौते से पहले यह छूट करीब एक डालर प्रति बैरल थी। ईरान ने तेल भेजने की मात्रा भी बढ़ा दी है। ईरान ने 15 जून के बाद से करीब 3.6 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया है।

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