ईरान का 'जैसे को तैसा': मिसाइल-ड्रोन से दहल उठे खाड़ी देश, तेहरान का दावा- अमेरिकी सैन्य ठिकाने किए तबाह
पश्चिम एशिया में शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका और ईरान में भीषण जंग छिड़ गई है। इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत स् ...और पढ़ें
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ईरान ने खाड़ी देशों पर बरसाए बम।
HighLights
ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के जवाब में 'जैसे को तैसा' बताई गई।
अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की दखलअंदाजी रोकने की चेतावनी दी।
डिजिटल डेस्क, तेहरान। पश्चिम एशिया में पिछले चार महीनों से जारी संघर्ष अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है। कुछ दिनों पहले तक जिस शांति वार्ता से उम्मीद की किरण दिख रही थी, वह अमेरिका और ईरान के बीच 'शर्तें न मानने' के आरोपों की भेंट चढ़ गई। ऐसे में शांति की कोशिशें थमते ही दोनों देशों के बीच भीषण हमलों का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है।
इसी बीच, ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने सोमवार को एक सनसनीखेज दावा करके वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। IRGC का कहना है कि उसने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से तीन चरणों में बड़ा हमला किया है। ईरान ने इस सैन्य कार्रवाई को 'जैसे को तैसा' नाम दिया है। हालांकि, ईरान के इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
⚡BREAKING: Iran's IRGC says it has “completely destroyed” fuel tanks and Patriot air defence systems and a strategic FPS radar system at two Kuwaiti air bases, and it targeted several facilities at Sheikh Isa Air Base in Bahrain.#Irán #IranWar #pakistán #Pakistan #Kuwait… pic.twitter.com/uhjrq4RVTC
— Iran Flash News (@FlashWireNews) July 13, 2026
ईरान ने कहां-कहां हमले का दावा किया?
ईरानी मीडिया के अनुसार, यह हमला पिछले 48 घंटों से अमेरिकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद किया गया। IRGC ने हमले को तीन चरणों में बांटकर अंजाम देने का दावा किया है।
तीन चरण में कहां-कहां हमले किए गए
पहला चरण में ईरान के द्वारा जॉर्डन को निशाना बनाया गया। दावा है कि ईरान ने जॉर्डन के 'प्रिंस हसन एयरबेस' पर मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे वहां मौजूद ईंधन डिपो और गोला-बारूद के गोदामों में आग लग गई।
दूसरे चरण के तहत ईरान ने बहरीन के 'शेख ईसा एयरबेस' को निशाना बनाया गया। ईरान के मुताबिक, यहाँ अमेरिकी हेलीकॉप्टर मेंटेनेंस सेंटर, पी-8 विमान के हैंगर और ड्रोन कमांड सेंटर को भारी नुकसान पहुंचा है।
वहीं तीसरा चरण के तहत ईरानी सेना ने कुवैत के 'अली अल-सालेम एयरबेस' पर हमला कर अमेरिकी 'पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम' और ईंधन टैंकों को तबाह करने का दावा किया गया है। साथ ही 'अहमद अल-जाबेर एयरबेस' पर लगे एक खास रणनीतिक राडार (FPS राडार) को भी नष्ट करने की बात कही गई है।
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क्यों हुआ यह हमला?
ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है। ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में दखल दे रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इस समुद्री रास्ते में किसी भी विदेशी सेना की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगा।
अमेरिकी सेना का क्या कहना है?
बता दें कि ईरान के इस दावे से ठीक एक दिन पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आदेश पर हुए इन हमलों का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में बाधा डालने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था।
अमरीकी सेना के अनुसार, उन्होंने लड़ाकू विमानों, नौसेना के जहाजों और आत्मघाती ड्रोनों की मदद से ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, राडार और ड्रोन लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया था। CENTCOM ने साफ शब्दों में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए एक बेहद जरूरी समुद्री रास्ता है और इस पर ईरान का कोई नियंत्रण नहीं है। नागरिक जहाजों की सुरक्षा के लिए ईरानी सेना को जवाबदेह ठहराया जाता रहेगा।