रैपर से किंगमेकर तक... कौन हैं बालेन शाह? जिसने नेपाल की राजनीति में किया बड़ा उलटफेर
नेपाल में 35 वर्षीय बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने शानदार प्रदर्शन किया है, जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना बढ़ गई है। आइए ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। जहां 35 वर्षीय बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने शानदार प्रदर्शन किया है। लगभग एक चौथाई सीटों की गिनती हो चुकी है। आरएसपी ने अब तक 120 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। जिसके बाद बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बढ़ गई है।
दरअसल, पूर्व रैपर बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने Gen Z विद्रोह के दम पर पुराने नेताओं को हटाने की ताकत को पूरी तरह से साबित करते हुए भारी जीत हासिल की है। बालेन शाह की पार्टी ने तीन बार के प्रधानमंत्री रहे केपी शर्मा ओली को भारी अंतर से हराकर अनी पार्टी को सबसे बड़ी चुनावी जीत की ओर ले गए हैं।
अपनी 'टेक्नोक्रेटिक' छवि और डिजिटल पकड़ के दम पर उभरी RSP ने दशकों से जमे राजनीतिक दलों के दबदबे को खत्म कर दिया है। बालेन शाह ने नेपाल के चुनाव में न सिर्फ प्रचंड जीत दर्ज की, बल्कि पुरानी पीढ़ी के दिग्गजों को सत्ता से बेदखल कर दिया है।
बीते गुरुवार को नेपाल में हुआ चुनाव पिछले साल Gen Z विद्रोह के बाद पहला चुनाव था। इस चुनाव में नेपाल की जनता ने एक ऐसी सरकार को गिरा दिया था जिसे भ्रष्ट और अछूत माना जाता था।
क्यों और कैस गिरी नेपाल की सरकार?
गौरतलब है कि पिछले साल नेपाल में लगे सोशल मीडिया बैन का कुछ युवा विरोध कर रहे थे। इस दौरान सिक्योरिटी फोर्स ने 19 लोगों को मार डाला। इसके कुछ देर बाद ही नेपाल में अफरा-तफरी मच गई, दर्जनों और लोग मारे गए और बड़े पैमाने पर आगजनी के कैंपेन में देश भर में हजारों इमारतें जल गईं। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को हटा दिया गया और नेपाल की सरकार सत्ता से बेदखल हो गई।

नेपाल में बालेन शाह की पार्टी आरसीपी जिसकी सरकार बनना तय है, उस पार्टी को चार साल से भी कम समय पहले बनाया गया था। आरसीपी ने खुद को टेक्नोक्रेटिक और डिजिटल रूप से युवाओं के बीच पैठ बनाई, जिसमें सिविल सोसाइटी के दिग्गज और शाह के मेयर रहने के दौरान उनके ईमानदार सहयोगी शामिल हैं। आरसीपी के उम्मीदवारों की औसत उम्र तीन बड़ी पार्टियों की तुलना में दशकों कम है।
नेपाली सरकार का इतिहास
बदलाव के अवतार के तौर पर देखे जाने वाले शाह बेशक पॉपुलर हैं। काठमांडू के मेयर के तौर पर, उन्होंने कचरे के पहाड़ों से निपटा और स्कूलों को ठीक किया। लेकिन अब देखना यह भी होगा कि क्या बालेन शाह नेपाल की सत्ता में अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे। क्योंकि, नेपाल के इतिहास में कोई भी चुनी हुई सरकार पूरे पांच साल का समय नहीं दे पाई है।
भारत-चीन और अमेरिका को लेकर बालेन शाह का रवैया ?
बालेन शाह का सोशल मीडिया का रवैया लड़ाकू है। उन्होंने नेपाल के पॉलिटिकल सिस्टम के साथ-साथ भारत, चीन और अमेरिका के खिलाफ भी आवाज उठाई है। बालेन शाह जिस पार्टी के बूते सरकार में आ रहे है, उसके नेता रवि लमिछाने हैं। रवि लमिछाने पहले भी कई मौकों पर चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट की निंदा कर चुके हैं।

बालेन शाह ने पिछले महीने, उन्होंने एक इलेक्शन रैली में कहा था कि जो कॉन्ट्रैक्टर सड़क बनाने में रुकावट डालते हैं, उन्हें पेड़ों से बांध देना चाहिए, शेड में बंद कर देना चाहिए या सड़क पर लिटा देना चाहिए।
पहले मैथिली भाषी पीएम
35 वर्षीय बालेन शाह विश्व के पहले मैथिल भाषी प्रधानमंत्री होंगे। इनसे पहले कोई भी मैथिल भाषी प्रधानमंत्री कभी नहीं बना है। इनकी शिक्षा दीक्षा भारत के कर्नाटक में हुई है। इनकी शिक्षा दीक्षा भारत के कर्नाटक में हुई है। अपने चुनाव प्रचार के दौरान बालेन ने जनकपुर के तिरहुतिया गाछी में एक बड़ी जनसभा को मैथिल भाषा में संबोधित करते हुए स्वयं को मधेशी छौरा कहा था।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के द्वारा घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पूर्व मेयर बालेन शाह मधेश प्रदेश के महोत्तरी जिला के एकडारा का निवासी हैं। वे नेपाल में जेनजी आंदोलन और उसके बाद तक काठमांडू महानगरपालिका के मेयर पद पर कार्यरत थे और नेपाल में अपने कामों को लेकर काफी चर्चित थे।
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