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    ऑपरेशन सिंदूर पर आसिम मुनीर ने फिर बोला झूठ, कहा- भारत के साथ संघर्ष दो विचारधाराओं की जंग

    Updated: Mon, 11 May 2026 08:40 AM (IST)

    पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भारत के साथ पिछले साल हुए सैन्य संघर्ष को 'दो विचारधाराओं की लड़ाई' बताया है। ...और पढ़ें

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    पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर(फोटो: रॉयटर्स)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पिछले वर्ष भारत के साथ हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को 'दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई' करार दिया है। रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय में 'मारका-ए-हक' की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह में मुनीर ने यह बयान दिया।

    पाकिस्तान ने पिछले साल छह से 10 मई के बीच हुए इस संघर्ष को 'मारका-ए-हक' का नाम दिया है। समारोह को संबोधित करते हुए मुनीर ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की रणनीति भारत की तुलना में 'श्रेष्ठ' थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया, जिसका जवाब पाकिस्तान ने 'राष्ट्रीय एकता और सैन्य शक्ति' के साथ दिया।

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    मल्टी-डोमेन युद्ध पर फोकस

    मुनीर के अनुसार, यह केवल दो सेनाओं के बीच का पारंपरिक युद्ध नहीं, बल्कि एक वैचारिक निर्णायक युद्ध था। भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब युद्ध 'मल्टी-डोमेन' (बहु-आयामी) होंगे।

    इसके लिए पाकिस्तान अपनी सैन्य तकनीक, हार्डवेयर और प्रशिक्षण को आधुनिक बना रहा है। उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए 'विश्वसनीय प्रतिरक्षा' पर जोर दिया और हेंगोर-श्रेणी की पनडुब्बियों, नए राकेट बल और लड़ाकू विमानों की खरीद जैसे आधुनिकीकरण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।

    पाक मंत्री ने खुद को मुनीर का 'साधारण कार्यकर्ता' बताया, बयान पर विवाद शुरू पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान खुद को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की टीम का एक ''साधारण कार्यकर्ता'' बताया।

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    तेल की कीमतों में गिरावट

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ जनता तक पहुंचाने के वादे के बीच दिए गए इस बयान ने इंटरनेट मीडिया पर हंगामा खड़ा कर दिया है।

    आलोचकों का तर्क है कि एक मंत्री द्वारा सेना प्रमुख को अपना नेता मानना पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य हस्तक्षेप और 'हाइब्रिड' शासन व्यवस्था को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इंटरनेट मीडिया पर लोग इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ और सैन्य प्रतिष्ठान को खुश करने की कोशिश बता रहे हैं।

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