जली हुई गाड़ियां, पत्थरों से पटी सड़कें और भारी सुरक्षा... अशांति के बीच हुआ PoK में दूसरे चरण का मतदान
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद में अशांति और सुरक्षा बलों से झड़पें हुईं। ...और पढ़ें
HighLights
PoK में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में अशांति देखी गई।
मुजफ्फराबाद में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं।
भारत ने PoK चुनावों को खारिज कर अवैध कब्जा बताया।
डिजिटल डेस्क, मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में रविवार को विधानसभा चुनावों का दूसरा चरण हुआ। इस दौरान नए सिरे से अशांति देखी गई। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों के बाद मुजफ्फराबाद के कई इलाकों में लोगों ने जली हुई गाड़ियां, पत्थरों से भरी सड़कें और भारी सुरक्षा व्यवस्था देखी गईं।
53 सदस्यों वाली विधानसभा की 45 सीधे चुने जाने वाली सीटों के लिए तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से यह दूसरा चरण है। हालांकि, चुनाव पर लगभग दो महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शनों, चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों, राजनीतिक बहिष्कार और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई का साया छाया रहा।
हिंसा ने बढ़ाई चिंता
मुजफ्फराबाद के निवासियों ने कहा कि मतदान से ठीक पहले हुई नई हिंसा ने इस बात की चिंता बढ़ा दी है कि चुनाव प्रक्रिया पर अशांति हावी रहेगी। स्थानीय रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प के बाद कई इलाकों में जली हुई गाड़ियां, पत्थरों से अवरुद्ध सड़कें और पुलिस, अर्धसैनिक बलों व सेना के जवानों की भारी तैनाती का जिक्र किया गया।
भारी सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों का चुनाव पर असर
पाकिस्तान ने पीओके में तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है, जिसमें पुलिस, पाकिस्तान रेंजर्स, फेडरल कांस्टेबुलरी और लगभग 2,100 सेना के जवान मतदान केंद्रों की सुरक्षा कर रहे हैं।
ये चुनाव जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच हो रहे हैं। यह कमेटी ज्यादा राजनीतिक आजादी, आर्थिक सुधार और पाकिस्तान में बसे शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करने की मांग कर रही है।
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समूह ने बेहतर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, रोजगार के अवसर और राजनीतिक विशेषाधिकारों में कटौती की भी मांग की है। JAAC ने चुनावों का बहिष्कार किया है। उनका तर्क है कि शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों के कारण पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां इस क्षेत्र में सरकार गठन को प्रभावित कर सकती हैं।
अधिकारियों के साथ बातचीत विफल होने के बाद हाल के हफ्तों में विरोध आंदोलन तेज हो गया है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, हड़तालें और झड़पें हुई हैं। सुरक्षा हालात बिगड़ने की वजह से दो निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान टाल दिया गया।
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग, संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार समूहों ने प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई, इंटरनेट पर लगी पाबंदियों और आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध की आलोचना की है।
भारत ने PoK चुनावों को खारिज किया
भारत ने इन चुनावों को खारिज करते हुए इन्हें महज दिखावटी कवायद बताया है, जिसका मकसद इस इलाके पर पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे को जायज ठहराना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाके भी शामिल हैं भारत का अभिन्न अंग हैं।
उन्होंने कहा कि ये चुनाव पाकिस्तान की ओर से अपने गैर-कानूनी कब्जे को छिपाने और इस इलाके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर पर्दा डालने की कोशिश थी।
जायसवाल ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था, "पाकिस्तान में अभी जो दिखावटी चुनावी कवायद चल रही है, वह असल में उस इलाके पर अपने गैर-कानूनी कब्जे को छिपाने और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन पर पर्दा डालने की पाकिस्तान की एक कोशिश भर है। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जो बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, वे वहां के लोगों के आर्थिक शोषण, उन्हें बुनियादी अधिकार न देने और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा हैं।"