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    देश के संसाधनों पर पाकिस्तानी सेना के कब्जे से आईएमएफ चिंतित, ये है वजह

    Updated: Sat, 30 May 2026 02:01 AM (IST)

    प्रेसेंजा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएमएफ से नए राहत पैकेज के लिए बातचीत के पीछे, आईएमएफ और पाकिस्तानी सेना के बीच देश क ...और पढ़ें

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    देश के संसाधनों पर पाकिस्तानी सेना के कब्जे से आईएमएफ चिंतित (फोटो- सोशल मीडिया)

    HighLights

    1. पाकिस्तानी मॉडल पर आईएमएफ की आपत्ति

    2. आईएमएफ की रडार पर पाकिस्तानी सेना

    आईएएनएस, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) देश के संसाधनों पर पाकिस्तानी सेना के कब्जे को लेकर चिंतित है।

    प्रेसेंजा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएमएफ से नए राहत पैकेज के लिए बातचीत के पीछे, आईएमएफ और पाकिस्तानी सेना के बीच देश की प्रमुख आर्थिक शक्ति संरचनाओं पर नियंत्रण को लेकर एक खामोश, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सत्ता संघर्ष चल रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार, देश के स्वामित्व वाले उद्यम, ऊर्जा संयंत्र, खदानें, बंदरगाह और बैंक आर्थिक शासन के दो प्रतिस्पर्धी मॉडलों के बीच टकराव का सामना कर रहे हैं।

    एक ओर गति और त्वरित निवेश समझौतों का सैन्य-प्रेरित तर्क है, तो दूसरी ओर, एक अधिक संस्थागत और नियम-आधारित दृष्टिकोण है जिसे आRएमएफ जवाबदेही और पारदर्शिता के तंत्र के माध्यम से लागू करना चाहता है।

    इस रणनीति के केंद्र में विशेष निवेश सुविधा परिषद (एसआईएफसी) स्थित है। आधिकारिक तौर पर, एसआईएफसी को नौकरशाही को कम करने और निवेश प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।

    हालांकि, व्यवहार में, यह सेना का शक्तिशाली आर्थिक उपकरण बन गया है, जिससे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी देश और विदेश के निवेशकों के बीच प्रमुख मध्यस्थ के रूप में कार्य कर सकते हैं।

    सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर बहुमूल्य धातुओं और महत्वपूर्ण खनिजों के खनन जैसे क्षेत्रों में अमेरिका जैसे विदेशी देशों के साथ खुले तौर पर बातचीत कर रहे हैं। यह तथ्य रिपोर्ट के तर्क का समर्थन करता प्रतीत होता है।