मिडिल ईस्ट में युद्ध का साउथ एशिया पर असर, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बढ़ीं आर्थिक मुश्किलें
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर दक्षिण एशिया तक पहुंच गया है। बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसी अर्थव्यवस्थाएं ईंधन की कमी, महंगाई और आपूर्ति बाधित होने स ...और पढ़ें

मिडिल ईस्ट में युद्ध का साउथ एशिया पर असर। (रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब साउथ एशिया तक पहुंचने लगा है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बादा इलाके में बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसी अर्थव्यवस्थाओं को तगड़ा झटका दिया है, जिससे ईंधन की कमी, मंहगाई और सप्लाई बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
रिपोर्ट की माने तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था ऊर्जा आयात और क्षेत्रीय व्यापार पर काफी निर्भर है। संकट के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़ गए हैं और कई जगहों लोगों में घबराहट के चलते ईंधन की खरीद बढ़ गई है।
बांग्लादेश में ईंधन राशनिंग
बांग्लादेश सरकार ने हालात को संभालने के लिए ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी है और जमाखोरी पर कार्रवाई तेज कर दी है। गैस की कमी के कारण कुछ उर्वरक कारखानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। सरकार वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अमेरिका से एलएनजी आयात पर भी विचार कर रही है।
पाकिस्तान में महंगाई की मार से बढ़ा तनाव
पाकिस्तान में भी तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। ईंधन महंगा होने से परिवहन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं और कुछ जगहों पर विवाद तथा झड़पों की खबरें भी सामने आई हैं।
तेल की कीमतों से बढ़ी आर्थिक चिंता
एक्सपर्ट की मानें तो मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आता है, जिसका सीधा असर आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऊर्जा लागत बढ़ने से महंगाई और व्यापार घाटा दोनों बढ़ सकते हैं।
यह संकट दिखाता है कि भले ही युद्ध मिडिल ईस्ट में हो, लेकिन उसके आर्थिक झटके पूरी दुनिया में महसूस किए जाते हैं। खासकर साउथ एशिया के विकासशील देशों में इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है।
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