Middle East War: धमाकों से दहल रहा ईरान, युद्ध खत्म करने की कोशिश तेज; पाकिस्तान में बैठकों का दौर
मध्य पूर्व में जारी ईरान युद्ध को समाप्त करने के प्रयास तेज हो गए हैं। पाकिस्तान में कई देशों के मध्यस्थ शांति वार्ता के लिए एकत्र हुए हैं। ...और पढ़ें
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ईरान युद्ध खत्म करने के लिए पाकिस्तान में बैठकों का दौर जारी(फोटो: रॉयटर्स)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बढ़े तनाव के बीच सऊदी अरब, मिस्त्र और तुर्किये के विदेश मंत्री चर्चा के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। पाकिस्तानी नेताओं के साथ मिलकर ये नेता क्षेत्र में तनाव कम करने के तरीकों पर विचार करेंगे।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के मुस्लिम जगत पर असर पर भी चर्चा होगी। मिस्त्र के विदेश मंत्री बद्र आब्देलेत्ती और तुर्किये के विदेश मंत्री हकान फिदान शनिवार को ही इस्लामाबाद आ गए थे। जबकि उनके सऊदी समकक्ष प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद रविवार को इस्लामाबाद पहुंचे।
पाकिस्तान की कोशिश क्षेत्रीय विकास पर चर्चा
ये सभी नेता पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार के बुलावे पर इस्लामाबाद आए हैं। इस बैठक के जरिये पाकिस्तान की कोशिश होगी कि वह शांति की कोशिश करता दिखाई दे जिससे आतंकी संगठनों को प्रश्रय देने वाले और आर्थिक तंगी से त्रस्त देश की उसकी विश्व में बनी पहचान थोड़ी बदले।
डार ने शनिवार-रविवार रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से भी टेलीफोन पर बात की है और बैठक का उद्देश्य बताया है। रविवार को डार ने मिस्त्र और तुर्किये के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय मसलों पर चर्चा की।
पता चला है कि पाकिस्तान की कोशिश क्षेत्रीय विकास पर चर्चा करने की भी है जिससे वह लाभान्वित हो। विदेश विभाग के अनुसार तीनों देशों के आमंत्रित विदेश मंत्री प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही चारों देश इजरायल के बढ़ते प्रभाव और मुस्लिम देशों के लिए बढ़ रही चुनौतियों समेत कई मसलों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
तत्काल हिंसा रोकने पर जोर
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, बैठक में सबसे पहले तत्काल हिंसा रोकने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मानवीय संकट को कम किया जा सके। इसके बाद लंबी अवधि के समाधान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
पाकिस्तान इस वार्ता की मेजबानी कर रहा है और खुद को एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल भी उठाए हैं, लेकिन इसके बावजूद बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए यह मंच अहम माना जा रहा है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर
इस युद्ध ने अब तक भारी जन-धन की हानि की है और वैश्विक तेल बाजार सहित दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाला है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए दबाव बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बैठक से सकारात्मक संकेत निकलते हैं, तो आने वाले दिनों में औपचारिक शांति वार्ता शुरू हो सकती है, जो इस संघर्ष को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
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