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    ट्रंप सरकार में पैठ बढ़ाने की कोशिश में पाकिस्तान, अमेरिकी कंपनी के साथ किया 12 लाख डॉलर का समझौता

    Updated: Sun, 31 May 2026 08:14 PM (IST)

    पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी नीति-निर्माण में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए वॉशिंगटन डीसी में लॉबिंग तेज कर दी है। इसके तहत, पाकिस्तान ने एक ...और पढ़ें

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    अमेरिकी सरकार में पैठ बढ़ाने की कोशिश में पाकिस्तान। (फाइल)

    HighLights

    1. पाकिस्तान ने अमेरिकी लॉबिंग फर्म से 12 लाख डॉलर का समझौता किया।

    2. वॉशिंगटन डीसी में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया।

    3. आतंकवाद विरोधी अभियानों में विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करना लक्ष्य।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान ने वॉशिंगटन डीसी में अपनी लॉबिंग तेज कर दी है।

    अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (एफएआरए) के दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान ने एक मई को अमेरिकी नीति-निर्माण हलकों में अपना प्रभाव मजबूत करने के उद्देश्य से एक कंपनी के साथ 12 लाख डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने अमेरिका स्थित सरकारी संबंध और पैरवी फर्म, एरविन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप एलएलसी के साथ एक औपचारिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

    एक मई 2026 से प्रभावी इस समझौते के तहत, पाकिस्तान 24 महीनों की अवधि के लिए प्रति माह 50,000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे अनुबंध का कुल मूल्य लगभग 12 लाख अमेरिकी डॉलर हो जाता है। इस समझौते में पहले तीन महीनों की सेवाओं के लिए 150,000 अमेरिकी डॉलर का अग्रिम भुगतान भी शामिल है।

    यह समझौता व्यापक सरकारी संबंध, नीति सलाहकार सहायता और विधायी निगरानी सेवाएं प्रदान करने पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य अमेरिका में पाकिस्तान के राजनयिक, आर्थिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना है।

    समझौते की शर्तों के तहत, एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों और उनके कर्मचारियों से संपर्क स्थापित करेगा, जिसमें विदेश मामलों, रक्षा, व्यापार और विनियोग संबंधी समितियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    समझौते की शर्तों में एक प्रमुख प्राथमिकता आतंकवाद विरोधी अभियान और क्षेत्रीय स्थिरता में पाकिस्तान को एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करना है।

    (समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)