चीन की उड़ान में पाकिस्तान सवार, तियांगोंग स्पेस स्टेशन में होगी PAK एस्ट्रोनॉट की एंट्री
चीन ने अपने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के लिए दो पाकिस्तानी नागरिकों को अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण हेतु चुना है। यह पहली बार है जब कोई विदेशी अंतरिक्ष यात् ...और पढ़ें
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पाकिस्तान के अंतरिक्ष यात्रियों को चीन के तियांगोंग स्टेशन पर ट्रेनिंग (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन ने अपने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के लिए दो पाकिस्तानी नागरिकों को अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के लिए चुना है। यह पहली बार होगा जब कोई विदेशी अंतरिक्ष यात्री चीन के स्पेस मिशन में शामिल होगा। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, यह कदम चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती साझेदारी का नया उदाहरण माना जा रहा है।
चीन की मानव अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम दाऊद को रिजर्व अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया है। दोनों जल्द ही चीन जाकर ट्रेनिंग शुरू करेंगे। ट्रेनिंग और जरूरी टेस्ट पूरे होने के बाद इनमें से एक को तियांगोंग स्टेशन पर 'पेलोड स्पेशलिस्ट' के तौर पर भेजा जाएगा। यह चयन फरवरी 2025 में इस्लामाबाद में हुए चीन-पाकिस्तान समझौते के बाद हुआ है। इसके बाद तीन चरणों की कड़ी जांच प्रक्रिया के जरिए इन दोनों उम्मीदवारों को चुना गया।
चीन-पाकिस्तान की बढ़ती अंतरिक्ष साझेदारी
बीजिंग ने इस कदम को अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। साथ ही इसे चीन-पाकिस्तान के 'हर मौसम में साथ निभाने वाले रणनीतिक साझेदारी' का हिस्सा बताया जा रहा है, जो अब अंतरिक्ष तक पहुंच गई है।
चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी कहा कि तियांगोंग स्पेस स्टेशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए खुला है। इसमें वैज्ञानिक प्रयोग, तकनीकी परीक्षण और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में दूसरे देशों की भागीदारी हो सकती है।
भारत का अलग रास्ता
जहां चीन और पाकिस्तान मिलकर अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के जरिए भारत ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनकी दुनियाभर में चर्चा हुई है। चंद्रयान-3 मिशन के जरिए भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बना। वहीं मार्स ऑर्बिटर मिशन ने कम लागत में अंतरग्रहीय मिशन पूरा कर दुनिया का ध्यान खींचा।
आने वाले समय में गगनयान मिशन के जरिए भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता हासिल करने की तैयारी में है। इसके साथ ही 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की भी योजना है। भारत की खासियत इसकी स्वदेशी तकनीक, कम लागत और मजबूत वैज्ञानिक क्षमता मानी जाती है।
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