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    होर्मुज से बाब-अल-मंदेब तक तनाव:... US-ईरान वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर, ट्रंप का आखिरी अल्टीमेटम

    Updated: Sun, 19 Apr 2026 11:47 PM (IST)

    अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता मंगलवार से इस्लामाबाद में शुरू होगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने और बैलिस्टिक ...और पढ़ें

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    अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता कल ट्रंप बोले- आखिरी मौका (फाइल फोटो)

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम के बीच दूसरे दौर की वार्ता मंगलवार से इस्लामाबाद में शुरू होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रविवार को फाक्स न्यूज को बताया कि वार्ता में शामिल होने के लिए पश्चिम एशिया के विशेष दूत स्टीव विटकाफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद रवाना हो गए हैं और वे सोमवार शाम तक वहां पहुंच जाएंगे।

    उन्होंने उप राष्ट्रपति जेडी वेंस का नाम नहीं लिया, जिन्होंने पहले दौर की वार्ता का नेतृत्व किया था। हालांकि, व्हाइट हाउस के एक सूत्र ने कहा कि वेंस भी वार्ता में शामिल होंगे। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के लिए ये आखिरी मौका है। समझौता न हुआ तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

    ट्रंप के बयान पर ईरान की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन अल जजीरा ने तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से रिपोर्ट दी है कि होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी को देखते हुए तेहरान की ओर से शांति वार्ता में शामिल होने का कोई फैसला नहीं किया गया है। शांति वार्ता को लेकर इस्लामाबाद और रावलपिंडी में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

    इन तैयारियों की निगरानी के लिए पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपनी विदेश यात्राओं से लौट आए हैं। ईरान की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा बंद किए जाने के बाद तेहरान समर्थक यमन के हाउती विद्रोहियों ने भी वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दी है।

    गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की शांति वार्ता विफल होने के बाद पूरी दुनिया की निगाहें युद्धविराम अवधि की समाप्ति से पहले होनेवाली दूसरे दौर की वार्ता पर टिक गई हैं। बुधवार को ये अवधि समाप्त हो रही है और ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वह इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे। इसे देखते हुए दोनों पक्षों को बातचीत के लिए केवल एक दिन का ही समय मिलेगा।

    दोनों पक्षों के बीच वार्ता में दो अहम पेच फंसे हुए हैं। अमेरिका की मांग है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़े और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी सीमित करे। साथ ही, अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के साथ संयुक्त नियंत्रण भी चाहता है। ईरान दोनों ही मुद्दों पर झुकने के लिए तैयार नहीं है।

    अमेरिका को ये भी स्वीकार्य नहीं है कि ईरान होर्मुज से गुजरनेवाले जहाजों से टोल ले। न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, रविवार को दूसरे दौर की वार्ता के बारे में एलान करते हुए ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी वार्ताकार ईरान से बातचीत के लिए सोमवार को इस्लामाबाद में रहेंगे। हम ईरान को बहुत ही अच्छी और तार्किक डील का प्रस्ताव दे रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि वे इसे स्वीकार करेंगे क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो अमेरिका उनके हर एक पावर प्लांट को उड़ा देगा।

    ईरान का हर पुल ध्वस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुझे अब और 'मिस्टर नाइस गाई' नहीं बनना है। ट्रंप ने ये भी आरोप लगाया कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी कर संघर्षविराम का उल्लंघन किया, जिसमें फ्रांस के एक जहाज और ब्रिटेन के एक मालवाहक पोत को निशाना बनाया गया।

    उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा अजीब है, क्योंकि अमेरिकी नाकेबंदी पहले ही इसे बंद कर चुकी है। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज बंद रहने से ईरान को रोजाना करीब 50 करोड़ डालर का नुकसान हो रहा है, जबकि अमेरिका पर इसका कोई असर नहीं है।

    ईरानी दल के पाकिस्तान जाने पर असमंजस

    रायटर ने तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया कि ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान की तरफ से वार्ताकारों के प्रतिनिधिमंडल को इस्लामाबाद भेजने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। हालांकि, सीएनएन के अनुसार, ईरानी दल मंगलवार को पाकिस्तान पहुंच सकता है, जिसमें मुख्य रूप से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष एमबी गलीबाफ शामिल होंगे।

    अगर बातचीत सकारात्मक रही और ट्रंप इस्लामाबाद आने पर सहमत हुए तो ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी वहां जा सकते हैं। ऐसे में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों की बैठक हो सकती है जिसमें 'इस्लामाबाद घोषणा' पर हस्ताक्षर किया जा सकता हैं।

    हालांकि, होर्मुज की अमेरिकी नाकेबंदी से शांति वार्ता काफी जटिल हो गई है। माना जा रहा है कि ईरान इस मुद्दे पर अमेरिका पर दबाव बना रहा है। इसके समाधान के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची ने रविवार को बातचीत भी की।

    पाकिस्तान में चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

    प्रेट्र के अनुसार, हाई प्रोफाइल शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद और रावल¨पडी में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार के अनुसार, रावलपिंडी में 10,000 से ज्यादा सुरक्षा कर्मी 600 से अधिक चेकपोस्ट पर तैनात किए गए हैं। गौरतलब है कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी दोनों देशों के विमानों को यहां स्थित नूर खान एयरबेस पर ही उतरने की संभावना है।

    वहीं, इस्लामाबाद में भी पिछली बार की ही तरह लाकडाउन जैसे हालात बनाए जा रहे हैं। नूर खान एयरबेस और इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के संवेदनशील इलाकों को रविवार आधी रात से सील कर दिया गया है। ड्रोन उड़ानों, कबूतर उड़ाने और हवाई फाय¨रग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। यहां तक कि छतों, बालकनियों और खिड़कियों के आसपास गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

    पुलिस के अनुसार, इलाकों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। इस्लामाबाद जिला कमिश्नर ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि जिले में भारी वाहन और नागरिक ट्रांसपोर्ट को अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जा रहा है। स्कूल और कार्यालय भी बंद रहेंगे और वर्क फ्राम होम लागू कर दिया गया है।

    हाउती की बाब अल मंदेब पर कड़ी चेतावनी अल जजीरा के अनुसार, यमन के विद्रोही संगठन हाउती के उप विदेश मंत्री हुसैन अल-इज्जी ने कहा कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अपनी शांति में बाधा डालने वाली नीतियां नहीं बदलते, तो बाब अल मंदेब स्ट्रेट को बंद करने का सख्त कदम उठाया जा सकता है।

    वहीं, यमन के रक्षा मंत्री मेजर जनरल मोहम्मद आतिफी ने चेताया है कि यमन के नागरिकों के खिलाफ किसी भी आक्रामकता के मद्देनजर हाई अलर्ट घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि हाल में जायनिस्ट और अमेरिकी दुश्मनों से संघर्ष के बाद मोर्चों पर एकता बढ़ी है और इससे सैन्य अभियानों में सटीकता साबित होती है।

    इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अल-इज्जी ने लिखा कि अगर हमने बाब-अल-मंदेब को बंद करने का फैसला कर लिया, तो कोई भी ताकत उसे दोबारा खोल नहीं पाएगी। उन्होंने ट्रंप और उनके सहयोगियों से तत्काल नीतियां बदलने और यमन के लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की मांग की।

    इसलिए महत्वपूर्ण है बाब अल मंदेब बता दें कि बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के जरिए यूरोप-एशिया के बीच समुद्री यातायात का अहम मार्ग है। यह अपने सबसे संकरे हिस्से में करीब 29 किलोमीटर चौड़ा है, जहां जहाजों के आवागमन के लिए सीमित मार्ग उपलब्ध हैं।

    यह मार्ग खाड़ी क्षेत्र से भूमध्य सागर तक कच्चे तेल और ईंधन की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, साथ ही एशिया की ओर जाने वाले कई वैश्विक व्यापारिक शिपमेंट भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग को बंद करने की किसी भी धमकी से अंतरराष्ट्रीय बाजार और सप्लाई चेन पर व्यापक असर पड़ सकता है।

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