एक नियुक्ति और चली गई स्टारमर की कुर्सी: ब्रिटेन पीएम के इस्तीफे का क्या है एपस्टीन कनेक्शन? Inside Story
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है, उनके कार्यकाल के दो साल से भी कम समय में नीतिगत विवादों और पार्टी ...और पढ़ें

ब्रिटेन पीएम के इस्तीफे का क्या है एपस्टीन कनेक्शन। (रॉयटर्स)
HighLights
कीर स्टारमर ने लेबर पार्टी नेता पद से इस्तीफा दिया।
पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति और एपस्टीन विवाद कारण।
स्थानीय चुनावों में हार ने इस्तीफे को अंतिम झटका दिया।
डिजिटल डेस्क, लंदन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। दो साल से भी कम समय तक सत्ता में रहने के बाद उनका कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतिगत विवादों, पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और पीटर मैंडेलसन से जुड़े विवाद ने उनकी स्थिति को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई।
इस्तीफे की घोषणा करते हुए स्टारमर भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अब यह सवाल उठा रही है कि क्या वह अगले आम चुनाव में लेबर पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि संसदीय दल की राय का सम्मान करते हुए वह पद छोड़ रहे हैं। हालांकि, नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।
राजनीतिक अनुभव की कमी भी बनी चुनौती
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के राजनीतिक वैज्ञानिक रॉब फोर्ड के अनुसार, स्टारमर ने एक सफल कानूनी करियर के बाद अपेक्षाकृत देर से राजनीति में प्रवेश किया था। इंग्लैंड और वेल्स के पूर्व चीफ प्रॉसिक्यूटर रहे स्टारमर को उनके योगदान के लिए ‘नाइटहुड’ की उपाधि भी मिली थी।
विरोधी अक्सर उन्हें एक अभिजात्य और लंदन-केंद्रित नेता के रूप में पेश करते रहे, हालांकि उनकी सार्वजनिक छवि एक सादगीपूर्ण व्यक्ति की रही है। फुटबॉल के प्रति उनका लगाव और निजी जीवन को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने की शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती रही।
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ऐतिहासिक जीत, लेकिन सीमित जनसमर्थन
4 जुलाई 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी ने 14 साल बाद सत्ता में वापसी करते हुए हाउस ऑफ कॉमन्स की 650 में से 411 सीटें जीती थीं। हालांकि पार्टी को कुल वोटों का लगभग 34 प्रतिशत समर्थन ही मिला था।
विश्लेषकों का कहना है कि इस जीत का बड़ा हिस्सा कंजर्वेटिव पार्टी के प्रति मतदाताओं की नाराजगी का परिणाम था। इसलिए सरकार बनने के बाद भी जनता के बीच लेबर के लिए कोई खास उत्साह नहीं दिखा।
शुरुआती महीनों में मुफ्त उपहार स्वीकार करने को लेकर विवाद हुए। इसके अलावा कई नीतियों पर सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा। कल्याणकारी योजनाओं में कटौती के प्रयासों ने लेबर पार्टी के भीतर भी असंतोष पैदा कर दिया।
पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति बनी बड़ा विवाद
स्टारमर सरकार ने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था। माना जा रहा था कि उनके व्यापक अंतरराष्ट्रीय संपर्क और अमेरिकी राजनीतिक हलकों में पहुंच ब्रिटेन के लिए फायदेमंद साबित होगी। हालांकि बाद में सामने आए दस्तावेजों में दावा किया गया कि मैंडेलसन ने 2003 में खुद को जेफ्री एपस्टीन का सबसे अच्छा दोस्त बताया था। सितंबर 2025 में सामने आए दस्तावेजों ने एपस्टीन के साथ उनके कथित संबंधों पर नए सवाल खड़े कर दिए।
विवाद बढ़ने के बाद स्टारमर ने मैंडेलसन को पद से हटा दिया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। लेबर पार्टी के कई सांसदों ने सवाल उठाया कि इतने संवेदनशील पद पर नियुक्ति से पहले पर्याप्त जांच क्यों नहीं की गई।
इसके बाद जनवरी 2026 में सार्वजनिक हुए कुछ ईमेलों में आरोप लगाया गया कि मैंडेलसन ने 2009 में सरकारी पद पर रहते हुए एपस्टीन के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की थी। पुलिस ने उनसे पूछताछ भी की, हालांकि उन पर कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया।
स्टारमर ने इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें अफसोस है कि उन्होंने मैंडेलसन पर भरोसा किया और उन्हें इस पद के लिए चुना।
सुरक्षा जांच पर उठे सवाल
विवाद तब और बढ़ गया जब यह दावा सामने आया कि मैंडेलसन राजदूत पद के लिए आवश्यक सुरक्षा मंजूरी हासिल नहीं कर पाए थे, इसके बावजूद उनकी नियुक्ति की गई। स्टारमर ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं थी, लेकिन विपक्ष और पार्टी के असंतुष्ट सांसद उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए।
स्थानीय चुनावों की हार बनी आखिरी झटका
मई 2026 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में लेबर पार्टी को इंग्लैंड भर में 1,100 से अधिक काउंसिल सीटों का नुकसान हुआ। वहीं, रिफॉर्म यूके पार्टी ने 1,450 से ज्यादा सीटें जीतकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
चुनावी झटके के बाद लेबर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा। 80 से अधिक सांसदों ने स्टारमर के नेतृत्व पर सवाल उठाए। इसके बाद कई वरिष्ठ नेताओं ने इस्तीफा दिया, जिनमें स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग और बाद में रक्षा मंत्री जॉन हीली भी शामिल थे।
एंडी बर्नहम बने नए दावेदार
इसी दौरान लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता एंडी बर्नहम तेजी से उभरते हुए दिखाई दिए। उन्होंने दावा किया कि वह रिफॉर्म यूके को चुनौती देने में सक्षम हैं। मैनचेस्टर क्षेत्र की एक संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में 19 जून को उनकी बड़ी जीत ने पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया।
आर्थिक और विदेश मामलों पर बर्नहम की सोच स्पष्ट नहीं
राष्ट्रीय स्तर की राजनीति से ज्यादा वास्ता न रखने वाले बर्नहम के बारे में अभी ज्यादा जानकारियां उपलब्ध नहीं हैं। ब्रिटेन के लिए उनकी अर्थ नीति, विदेश नीति और सुरक्षा नीति क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आव्रजन को लेकर वह क्या सोच रखते हैं यह भी स्पष्ट नहीं है। हाल के वर्षों में ब्रिटेन में विदेशियों की आमद बड़ा मुद्दा बनी है और कई शहरों में इसके चलते टकराव भी सामने आया है।
ईयू से अलग होने के बाद ब्रिटेन के समक्ष नई तरह की चुनौतियां पैदा हुई हैं। कोई भी सरकार उनसे निपटते हुए ब्रिटेन के विकास और सुरक्षा का खाका पेश नहीं कर पाई है। यूक्रेन युद्ध और उसके बाद ईरान युद्ध के चलते ब्रिटेन में महंगाई तेजी से बढ़ी है, जनजीवन मुश्किल हुआ है।
हाल के दिनों में बनी कोई भी सरकार जन अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है, इसी के चलते वहां पर जल्दी-जल्दी सरकारें बदली हैं।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
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