ब्रिटेन का सत्ता संघर्ष: डेविड कैमरन से शुरुआत, अब स्टारमर का भी इस्तीफा..., 10 साल में क्यों बदल गए छह PM?
ब्रिटेन में डेविड कैमरन के इस्तीफे से शुरू हुआ राजनीतिक अस्थिरता का दौर कीर स्टारमर तक जारी है। आंतरिक बगावत, ब्रेक्जिट और आर्थिक संकटों के चलते डाउनि ...और पढ़ें

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का इस्तीफा।
HighLights
कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी में बगावत के बाद इस्तीफा दिया।
ब्रिटेन में 10 साल में 6 प्रधानमंत्री बदले, अस्थिरता बढ़ी।
डाउनिंग स्ट्रीट अब 'घूमने वाला दरवाजा' बन गया है।
डिजिटल डेस्क, लंदन। ब्रिटेन की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और विस्फोटक खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक ब्रिटेन की राजनीति आज उस चौराहे पर खड़ी है जहां 'स्थायित्व' शब्द मजाक बनकर रह गया है। इस बात को ऐसे समझिए कि देश के प्रमुख वामपंथी दल लेबर पार्टी के भीतर मचे भीषण सियासी घमासान और आंतरिक बगावत ने आखिरकार प्रधानमंत्री कीर स्टार की भी कुर्सी छीन ली।
चौतरफा आलोचनाओं, अपनों के ही तीखे तीरों और पार्टी सहयोगियों के अविश्वास से घिरे स्टारमर को आज यानी 22 जून को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सिर्फ एक प्रधानमंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र की रीढ़ पर लगा वो गहरा जख्म भी है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
ब्रिटेन ने 10 साल में बदल दिए छह प्रधानमंत्री
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हालांकि चौंकाने वाली हकीकत यह है कि स्टारमर के इस इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन ने बीते महज एक दशक (10 साल) के भीतर अपने छह प्रधानमंत्री बदल दिए हैं। यानी जो देश कभी अपनी राजनीतिक स्थिरता के लिए मिसाल दिया जाता था, वो आज 'म्यूजिकल चेयर' का खेल बन चुका है, जहां अगले कुछ ही दिनों में ब्रिटेन की जनता 10 साल के भीतर अपना सातवां प्रधानमंत्री देखने को मजबूर होगी।
डाउनिंग स्ट्रीट कैसे बना घूमने वाला दरवाजा?
इस स्थिति में यह भी कहना गलत नहीं है कि ब्रिटेन की राजनीति की यह अंतर्कलह चीख-चीखकर गवाही दे रही है कि डाउनिंग स्ट्रीट का वो ऐतिहासिक दरवाजा अब प्रधानमंत्री का आवास नहीं, बल्कि एक 'घूमने वाला दरवाजा' बन चुका है, जहां नेता देश संभालने कम और अपनी ही पार्टी की गुटबाजी की बलि चढ़ने ज्यादा आते हैं।
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ऐसे में सवाल यह है कि आखिर क्यों और कैसे ब्रिटेन की महाशक्तिशाली लेबर पार्टी के भीतर यह सियासी खेल शुरू हुआ? क्यों चंद महीनों में ही स्टारमर का जादू इस कदर काफूर हुआ कि उन्हें अपनी ही फौज ने खदेड़ दिया? आइए, इस विस्फोटक राजनीतिक दंगल की पूरी इनसाइड स्टोरी को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।
ब्रिटेन की राजनीति में 'कतार' की भूमिका क्या?
इस बात को ऐसे समझिए कि इन राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ब्रिटेन के लोगों को कतार यानी लाइन में लगना बेहद पसंद है, चाहे वह बस स्टॉप हो, रेलवे स्टेशन हो, सुपरमार्केट हो या फिर बैंक। शायद यही वजह है कि देश के प्रधानमंत्री के सरकारी आवास '10 डाउनिंग स्ट्रीट' के बाहर भी आजकल कुछ ऐसा ही नजारा है, जहां एक के बाद एक प्रधानमंत्री अपनी बारी के इंतजार में खड़े नजर आते हैं।
100 से अधिक सांसदों स्टार्मर के विरोध में कैसे?
कीर स्टारमर ने लेबर पार्टी के 100 से अधिक सांसदों का समर्थन खोने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वह पिछले 10 साल के भीतर ब्रिटेन के छठे प्रधानमंत्री थे और अब उनकी जगह मेकर्सफील्ड के सांसद और ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने की सबसे ज्यादा संभावना जताई जा रही है।

स्टार्मर से पहले सुनक की 20 महीनों की सरकार
स्टारमर के प्रधानमंत्री बनने से पहले ब्रिटिश सत्ता की कमान ऋषि सुनक के हाथों में थी, जिन्होंने पहले ही कंजर्वेटिव पार्टी की नेता लिज ट्रस की नीतियों को परियों की कहानी वाली अर्थव्यवस्था कहकर चेतावनी दी थी। भारतीय मूल के इस राजनेता के हाथ में जब ब्रिटिश सरकार की कमान आई, तो पूरी दुनिया में इसे लेकर खूब चुटकुले भी बने और लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब भारत की गुलामी का बदला लेने का समय आ गया है।

ऋषि सुनक डाउनिंग स्ट्रीट में करीब 20 महीने तक टिके रहे और उन्होंने देश को सुधारने की पूरी कोशिश की, लेकिन प्रवासियों की संख्या को कम करने के उनके वादे पूरी तरह नाकाम रहे और उन्होंने स्कूलों में भांग पर प्रतिबंध लगाने जैसी ऐसी घोषणाएं भी कीं जिसकी किसी ने मांग ही नहीं की थी। फिर भी, सुनक 2024 के आम चुनाव तक पद पर बने रहने में कामयाब रहे।
सुनक से पहले लिज ट्रस की 44 दिनों की सरकार
सुनक से ठीक पहले कंजर्वेटिव पार्टी की नेता लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनी थीं, जिन्होंने सितंबर 2022 में पद संभालते ही देश की सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के नाम पर 45 अरब पाउंड के भारी-भरकम टैक्स कटौती पैकेज का एलान कर दिया था। इस विवादित योजना के तहत सालाना डेढ़ लाख पाउंड से ज्यादा कमाने वाले अमीर लोगों को दो अरब पाउंड की टैक्स राहत दी जानी थी, जिससे देश के सबसे अमीर पांच फीसदी लोगों को सीधा फायदा पहुंचता।

अब एक तरफ जहां ब्रिटेन की आम जनता महंगाई और बिजली-पानी के गंभीर संकट से जूझ रही थी, वहीं अमीरों को और अमीर बनाने वाली इस योजना का चौतरफा विरोध शुरू हो गया।
बढ़ते विरोध के बीच दावों का भी आया दौर
बात तो यहां तक पहुंच गई कि एक ब्रिटिश अखबार ने तो बकायदा लाइव इंटरनेट पर लेट्टिस रखकर यह शर्त लगा दी कि लिज ट्रस इस पत्ते के सड़ने से पहले ही अपने पद से हटा दी जाएंगी। अंत में वह पत्ता जीत गया और लिज ट्रस को महज 44 दिनों के भीतर ही इस्तीफा देकर डाउनिंग स्ट्रीट छोड़ना पड़ा।
बोरिस जॉनसन का वो तीन साल का कार्यकाल
लिज ट्रस से पहले ब्रिटेन की कमान बिखरे बालों वाले बोरिस जॉनसन के हाथों में थी, जिन्होंने हर हाल में ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से बाहर निकालने यानी ब्रेक्सिट को पूरा करने का वादा किया था और उन्होंने इसे बखूबी निभाया भी। अपने लगभग तीन साल के कार्यकाल में जॉनसन ने दुनिया के कई देशों के साथ नए व्यापार समझौते किए और कोरोना महामारी के दौरान अरबों पाउंड का राहत पैकेज भी जारी किया।

लेकिन उनकी विदाई का कारण कोरोना काल में उनका खुद का रवैया बना, जब पूरा देश सख्त लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहा था और बोरिस जॉनसन अपने सरकारी आवास में पार्टियां कर रहे थे। इस 'पार्टीगेट' घोटाले से देश की जनता और उनकी खुद की कैबिनेट के मंत्री इस कदर नाराज हुए कि उन्हें मजबूरन कुर्सी छोड़नी पड़ी।
थेरेसा मे ने रोते हुए दिया था इस्तीफा, समझिए उनका कार्यकाल
बोरिस जॉनसन से ठीक पहले थेरेसा मे देश की प्रधानमंत्री थीं, जिन्हें अपने पूर्ववर्ती डेविड कैमरन से विरासत में ब्रेक्सिट का एक ऐसा उलझा हुआ मुद्दा मिला था जिसे सुलझाना उनके लिए नामुमकिन साबित हुआ। थेरेसा मे ने यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए जो भी समझौता तैयार किया, उसे ब्रिटिश संसद ने एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे तीन बार खारिज कर दिया।

इस गतिरोध के कारण न तो यूरोपीय संघ झुकने को तैयार था और न ही उनकी अपनी कंजर्वेटिव पार्टी समझौता करने को राजी थी, जिसके बाद साल 2019 में उनकी अपनी ही पार्टी ने डाउनिंग स्ट्रीट का ताला बदल दिया और उन्हें रोते हुए इस्तीफा देना पड़ा।
डेविड कैमरन से कैसे शुरू हुआ था, अदला-बदली का दौर
बता दें कि इस पूरे राजनीतिक संघर्ष की शुरुआतक दरअसल डेविड कैमरन से हुई थी, जो इस दशक में सबसे लंबे समय यानी लगभग छह साल तक प्रधानमंत्री रहे। कैमरन ने अपनी पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को दबाने के लिए साल 2016 में देश को यूरोपीय संघ में रखने या उससे अलग करने के लिए एक जनमत संग्रह कराने का बड़ा जुआ खेला था।

उन्हें पूरा भरोसा था कि जनता यूरोपीय संघ के साथ रहने के पक्ष में मतदान करेगी, लेकिन पासा पूरी तरह उल्टा पड़ गया और ब्रिटिश जनता ने अलग होने का फैसला चुन लिया, जिसके बाद हैरान-परेशान कैमरन ने तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस तरह पिछले दस सालों में छह प्रधानमंत्रियों के आने-जाने के बाद अब देखना यह है कि डाउनिंग स्ट्रीट की इस कतार में अगला नंबर किसका आता है और क्या वह इस राजनीतिक अस्थिरता को रोक पाता है या नहीं?