आखिरी कानूनी लड़ाई भी हारा भगोड़ा नीरव मोदी, प्रत्यर्पण का रास्ता साफ; कभी भी हो सकती है भारत वापसी
भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) में अपनी अंतिम कानूनी लड़ाई हार गया है, जिससे उसके भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो ...और पढ़ें

भगोड़ा नीरव मोदी, (File Photo)
HighLights
नीरव मोदी ECHR में अंतिम कानूनी लड़ाई हारा।
भारत प्रत्यर्पण का रास्ता अब पूरी तरह साफ।
ब्रिटेन सरकार कभी भी भारत को सौंप सकती है।
डिजिटल डेस्क, लंदन। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें सातवें आसमान पर पहुंच गई है। इसके साथ ही अब ये बात भी लगभग-लगभग तय हो गई है कि उसे अब जल्द ही भारत लाया जा सकता है। इस पूरे मामले को ऐसे समझिए कि भगोड़ा नीरव मोदी यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) में अपनी आखिरी कानूनी लड़ाई भी हार गया, जिसके बाद अब उसके प्रत्यर्पण यानी भारत वापसी का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।
दस्तावेजों के अनुसार, नीरव मोदी के पास मौजूद सभी कानूनी रास्ते अब खत्म हो चुके हैं और ब्रिटेन सरकार कभी भी उसे भारत को सौंप सकती है। मीडिया रिपोर्टस की माने तो इस पूरे मामले में अब सिर्फ कुछ कागजी और प्रशासनिक औपचारिकताएं ही बाकी रह गई हैं।
समझिए इस मामले में अब तक क्या हुआ?
बता दें कि नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में ब्रिटेन की अदालतों से निराशा मिलने के बाद ECHR में गुहार लगाई थी। अदालत ने इस याचिका को पूरी तरह गुप्त रखा था, लेकिन अब वहां से भी नीरव मोदी की उम्मीदें टूट चुकी हैं।
2019 से जेल में बंद है नीरव
नीरव मोदी मार्च 2019 में गिरफ्तारी के बाद से लंदन की 'वैंड्सवर्थ जेल' में बंद हैं। भारत में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उसकी तलाश है।
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कभी भी हो सकती है भारत वापसी
अब इस कानूनी लड़ाई में मिली हार के बाद नीरव मोदी की मुश्किलें सातवें आसमान पर पहुंच गई। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन के अधिकारियों ने नीरव मोदी को भारत सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उसे किसी भी वक्त भारत लाया जा सकता है।
प्रताड़ना का डर दिखाकर बचना चाहते था नीरव मोदी
गौरतलब है कि नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालत में बचने के लिए 'भंडारी जजमेंट' का हवाला दिया था। दरअसल, रक्षा दलाल संजय भंडारी के मामले में ब्रिटेन की अदालत ने भारत में प्रताड़ना के डर को आधार मानकर प्रत्यर्पण से इनकार कर दिया था।
नीरव मोदी ने भी यही दलील दी कि भारत की जेलों में उसे प्रताड़ित किया जा सकता है। हालांकि, सीबीआई के अधिकारियों ने कोर्ट में पुख्ता सबूत और आश्वासन पेश करके नीरव मोदी के इन दावों को पूरी तरह खारिज करवा दिया। ब्रिटेन के हाई कोर्ट ने माना कि भारत सरकार द्वारा जेल की स्थितियों को लेकर दिए गए आश्वासन पूरी तरह पर्याप्त हैं।
अदालत ने मामे में क्या टिप्पणी की?
ब्रिटेन की अदालत ने साफ कहा कि नीरव मोदी का मामला कोई असाधारण मामला नहीं है और इस केस को दोबारा खोलने का कोई ठोस आधार नहीं है। ऐसे में अब चूंकि इंटरनेशनल कोर्ट (ECHR) से भी उसे कोई राहत नहीं मिली है, इसलिए नीरव मोदी के भारत आने में अब कोई कानूनी अड़चन नहीं बची है।