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    ब्रिटेन में 40 डिग्री पर पिघल रहीं सड़कें, जानें भारत में 45°C पर भी क्यों सुरक्षित रहते हैं हाईवे

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 11:54 PM (IST)

    ब्रिटेन में 40 डिग्री तक तापमान पहुंचने पर सड़क पिघल गई वहीं भारत की सड़कों को या उससे ज्यादा 45 डिग्री पर भी ऐसा कुछ क्यों नहीं हो रहा है। इसका कारण ...और पढ़ें

    ब्रिटेन में 40 डिग्री पर पिघल रहीं सड़कें, जानें भारत में 45°C पर भी क्यों सुरक्षित रहते हैं हाईवे

     ब्रिटेन में 40 डिग्री पर पिघल रहीं सड़कें, जानें भारत में 45°C पर भी क्यों सुरक्षित रहते हैं हाईवे

    HighLights

    1. असल अंतर सड़क बनाने की सामग्री और डिजाइन में है

    2. भारत की सड़कें भीषण गर्मी का सामना करने के लिए बनाई गई हैं

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों यूरोप की गर्मी को लेकर चर्चा तेज हो गई है, अक्सर यूरोप सर्दी के लिए जाना जाता है लेकिन अब वहां का तापमान 40 के पार चला गया है। सोशल मीडिया पर एक फोटो काफी वायरल हो रही है जिसमें ब्रिटेन में 40 डिग्री तापमान पहुंचने पर सड़कों का तारकोल पिखल गया है।

    वहीं, लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि ब्रिटेन में 40 डिग्री तक तापमान पहुंचने पर सड़क पिघल गई, वहीं भारत की सड़कों को उससे ज्यादा 45 डिग्री पर भी ऐसा कुछ क्यों नहीं हो रहा है। इसका कारण क्या है?

    मुख्य वजह: जलवायु के अनुसार सामग्री का चयन

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह कोई देश की सड़कें दूसरों से मजबूत होने की बात नहीं है। असल अंतर सड़क बनाने की सामग्री और डिजाइन में है, जो स्थानीय मौसम के हिसाब से तैयार किया जाता है।

    यूके और यूरोपीय सड़कें ठंड के लिए बनी हैं

    • ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों में सड़कें मुख्य रूप से ठंडे मौसम और बार-बार होने वाले फ्रीज-थॉ (जमना और पिघलना) चक्र को झेलने के लिए डिजाइन की जाती हैं।
    • इनमें हॉट रोल्ड एस्फाल्ट और डेंस एस्फाल्ट कंक्रीट का इस्तेमाल होता है।
    • इनमें बिटुमेन की मात्रा ज्यादा और महीन कंकड़ होते हैं, जिससे सड़क लचीली बनती है।
    • सर्दियों में तापमान शून्य से नीचे जाने पर यह लचीलापन सड़क को फटने से बचाता है।
    • लेकिन गर्मी में यही बिटुमेन नरम हो जाता है। 40 डिग्री के आसपास भारी वाहनों के दबाव से सड़क पर गड्ढे, रट और नरम पैच बन जाते हैं।

    भारत की सड़कें भीषण गर्मी का सामना करने के लिए बनाई गई हैं

    भारत का मौसम यूरोप के मौसम तरह नहीं रहता है, यहां पांच महीने से तक भीषण गर्मी पड़ती है। इसी देखते हुए यहां की सड़क यूरीप की सड़कों सड़कों से अलग बनाई जाती है।

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    इस समस्या से निपटने के लिए, भारतीय सड़क निर्माण में आमतौर पर वीजी-30 और वीजी-40 सहित कठोर श्रेणी के बिटुमेन का उपयोग किया जाता है। इन सामग्रियों की चिपचिपाहट अधिक होती है और तापमान में काफी वृद्धि होने पर भी ये अपनी मजबूती बनाए रखने में बेहतर सक्षम होती हैं।

    भारत में सड़क निर्माण सामग्री में अक्सर बड़े आकार के कण शामिल होते हैं, जिससे भीषण गर्मी के दौरान भी सतह स्थिर बनी रहती है। इससे लगातार यातायात भार के कारण सड़क के नरम होने या स्थायी विकृति विकसित होने की संभावना कम हो जाती है। भारतीय सड़क मिश्रण में बड़े कंकड़ भी इस्तेमाल किए जाते हैं, जो गर्मी में सड़क को स्थिर रखते हैं।