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    'साहित्य में AI की भूमिका शून्य, क्रिएटिव काम नहीं हो सकता', लेखक सलमान रुश्दी का बड़ा बयान

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 09:04 PM (IST)

    प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी का मानना है कि रचनात्मक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि इसमें मौलिकता की क्षमता नही ...और पढ़ें

    रचनात्मक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कोई भूमिका नहीं- लेखक सलमान रुश्दी

    रचनात्मक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कोई भूमिका नहीं- लेखक सलमान रुश्दी

    HighLights

    1. रुश्दी ने रचनात्मक कार्यों में एआई की भूमिका नकारी।

    2. एआई में मौलिकता की क्षमता बिल्कुल नहीं होती।

    3. खुद पर बायोपिक बनाने से सलमान रुश्दी का इनकार।

    डिजिटल डेस्क, लंदन। प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी का मानना है कि रचनात्मक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की कोई भूमिका नहीं है क्योंकि इसमें मौलिकता की क्षमता बिल्कुल नहीं होती।

    लंदन में आयोजित एक समारोह में 14वां 'लिबरेटम कल्चरल ऑनर' स्वीकार करने से पहले उन्होंने एआइ और सिनेमा पर खुलकर अपने विचार रखे। जब उनसे पूछा गया कि रचनात्मक कार्यों में एआइ की क्या भूमिका होनी चाहिए, तो उन्होंने दो टूक कहा, 'कुछ भी नहीं। शून्य।'

    सलमान रुश्दी ने कहा कि कला का असली मतलब वह ढूंढना है जो पहले किसी ने न किया हो, जबकि एआइ सिर्फ भारी मात्रा में जानकारी इकट्ठा करके उसका एक नया संस्करण पेश कर सकता है, वह कुछ नया नहीं रच सकता। 'कला अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में मनोरंजन से कहीं बढ़कर है। यह एक चुनौती है और मेरी एआइ में शून्य से भी कम रुचि है।'

    बुकर पुरस्कार विजेता रुश्दी ने फिल्म निर्माता विशाल भारद्वाज के साथ अपनी पुस्तक 'मिडनाइट्स चिल्ड्रेन' के अधूरे रह गए टेलीविजन रूपांतरण पर भी बात की।

    सलमान रुश्दी ने बताया- मुझे लगता है कि नेटफ्लिक्स को स्क्रिप्ट पसंद नहीं आने और पैसों की कमी के कारण यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।

    हालांकि, रुश्दी ने भारद्वाज को एक बेहद प्रतिभाशाली फिल्म निर्माता बताया। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनकी कई किताबों, जैसे 'द ग्राउंड बिनीथ हर फीट', को पर्दे पर उतारने के लिए बातचीत चल रही है।

    खुद पर बायोपिक बनाने से इनकार

    जब रुश्दी से इस बात पर उनकी राय पूछी गई कि बेहतरीन उपन्यासों पर बनी फिल्में शायद ही कभी मूल रचना जितनी अच्छी बन पाती हैं, तो उन्होंने 'द लार्ड आफ द रींग्स' और 'द एज आफ इनोसेन्स' जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ फिल्में अपने साहित्यिक मूल के बिल्कुल बराबर होती हैं।

    हालांकि, अपनी कहानियों को पर्दे पर देने के लिए तैयार रुश्दी खुद के जीवन पर कोई किताब या फिल्म नहीं चाहते। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में कहा, 'मैं खुद के बारे में लिखने के लिए लेखक नहीं बना था। वास्तव में, मुझे लगता है कि मैं सबसे कम दिलचस्प विषय हूं। मैं तो नई चीजों को गढ़ने और रचने के लिए लेखक बना था।'

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    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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