मजबूत हेल्थ इंफ्रा के साथ आसान और सस्ता इलाज उपलब्ध कराने पर जोर, आयुष को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 10% की वृद्धि हुई, आयुष्मान ...और पढ़ें
स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 10% की वृद्धि हुई
नई दिल्ली, जागरण प्राइम । देश में बेहतर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास सरकार की प्राथमिकता है। बजट में भी इसकी झलक साफ तौर पर दिखाई दी। वित्त मंत्री ने बजट 2026-27 में हेल्थ सेक्टर के बजट में लगभग 10 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इस साल स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए। वहीं वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के बजट में 67.66 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। ये साफ तौर पर दर्शाता है कि सरकार देश में बेहतर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर दे रही है। सरकार हेल्थ सेक्टर को सामाजिक दायित्व के साथ ही राष्ट्रीय उत्पादकता और आर्थिक विकास का आधार मान रही है। वित्त मंत्री ने देश में पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब, और हेल्थकेयर के क्षेत्र में मानव संसाधन को मजबूत करने के लिए कदम उठाने का ऐलान किया है। बजट में मानसिक स्वास्थ्य के लिए NIMHANS-2.0 और राष्ट्रीय स्तर के नए संस्थानों की घोषणा भी है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के बजट में 407 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है। इस योजना के तहत नए एम्स, मौजूदा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों के विकास के लिए काम किया जाएगा। पीपुल्स हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन एंड ऑर्गेनाइज्ड मेडिसिन अकेडेमिक गिल्ड के सेक्रेटरी जनरल डॉ ईश्वर गिलाडा कहते हैं कि इस बार बजट में हेल्थ सेक्टर का बजट बढ़ा है, रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर दिया गया है जो अच्छा कदम है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए हमें अपनी जीडीपी का कम से कम 2 फीसदी हेल्थ सेक्टर पर खर्च करना चाहिए। आज हमें पूरे देश में प्राइमरी हेल्थकेयर को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है ताकि सेकेंडरी और बड़े अस्पतालों पर दबाव कम किया जा सके। इससे लोगों को जल्द और बेहतर इलाज भी उपलब्ध हो सकेगा।
आज हमारे देश में प्रजनन दर लगातार गिर रही है। आज देश की प्रजनन दर 1.9 पर है। यूपी और बिहार के योगदान को हटा दें तो ये 1.6 तक पहुंच जाती है। ऐसे ही हालात रहे तो जल्द ही हमारे देश में भी बुजुर्ग लोगों की संख्या ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में हेल्थकेयर सिस्टम पर भारी दबाव पड़ेगा। सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। देश युवा रहे इसके लिए जरूरी है कि कम से कम प्रजनन दर को 2.1 पर मेंटेन किया जाए।
नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के बजट में में 30.64 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इस संस्था का बजट लगभग 3,477 करोड़ तक बढ़ गया है। ये एक अच्छा कदम है। दरअसल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में लगभग 25 लाख लोग एचआईवी से पीड़ित है। इनमें से लगभग 16 लाख लोगों को ही इलाज मिल पा रहा है। सरकार के इस कदम से इस बीमारी से पीड़ित लोगों की पहचान और उनके इलाज में मदद मिलेगी।
रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय बजट 2026-27 से चिकित्सा के क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के लिए आवंटन को बजट 2026-27 में बढ़ाकर रुपये 4,000 करोड़ कर दिया गया है। इसके बजट में लगभग 26.98 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। फार्मा में रिसर्च को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग 10 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे देश में नई दवाओं की खोज और विकास को बढ़ावा मिलेगा। इंडियन मेडिकल काउंसिल की एएमआर कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र सैनी कहते हैं कि सरकार की ओर से रिसर्च पर जोर दिया जाना अच्छा कदम है। आज देश में एंटी माइक्रोबियल रजिस्टेंस बड़ी समस्या बन गई है। कई एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में नई एंटीबायोटिक दवाओं की रिसर्च पर जोर दिए जाने की जरूरत है। वहीं देश में बढ़ती कैंसर की बीमारी के चलते इसकी रिसर्च पर भी काफी काम किए जाने की जरूरत है।

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