धान और दलहन की बुआई पिछले साल से ज्यादा, असंतुलित बारिश ने बढ़ाई चिंता

अनियमित बारिश ने फसलों की उपज को प्रभावित किया है। हालांकि देश के कुछ हिस्सों में हो रही चक्रवाती बारिश ने कुछ राहत पहुंचाई हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि...और पढ़ें
विवेक तिवारी जागरण न्यू मीडिया में एसोसिएट एडिटर हैं। लगभग दो दशक के करियर में इन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार् ...और जानिए
नई दिल्ली, विवेक तिवारी। अनियमित बारिश ने फसलों की उपज को प्रभावित किया है। देश के कुछ हिस्सों में हो रही चक्रवाती बारिश ने राहत पहुंचाई हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले 15 दिन खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में देश के जिन हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है वहां पैदावार सामान्य से ज्यादा होने की संभावना बढ़ी है। वहीं, जिन हिस्सों में कम बारिश से फसलें खराब हो गई हैं, उन इलाकों में किसानों को राहत पहुंचाने के लिए भारत सरकार की संस्था भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और उसके वैज्ञानिकों की ओर से किसानों को वैकल्पिक फसलों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस साल 413 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई की गई है जो पिछले साल से लगभग 9 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। इसी तरह इस साल दलहन की बुआई 128.58 लाख हेक्टेयर में हुई है जो पिछले साल की तुलना में लगभग 10 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। लेकिन इस साल देश में हुई असंतुलित बारिश से पैदावार को लेकर चिंता बढ़ी है। आईसीएआर के संस्थान सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइलैंड एग्रीकल्चर के निदेशक डॉक्टर विनोद कुमार सिंह कहते हैं कि धान की पैदावार को लेकर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी लेकिन अगले 15 दिन बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल इस मौसम में धान के पौधों में बालियां फूटने और उनमें दाने आने का समय है। इस समय पौधे को पानी की काफी जरूरत होगी। इस साल मानसून की बारिश बेहद असंतुलित रही है। कुछ जगहों पर सामान्य से कहीं अधिक बारिश हुई है तो धान के उत्पादन वाले कुछ राज्यों में बारिश सामान्य से कम है। पूर्वी और उत्तर पूर्व भारत में सामान्य से कम बारिश रही है। जिन जगहों पर अच्छे सिंचाई के साधन हैं या जहां ग्राउंड वॉटर की स्थिति बेहतर है। वहां किसान का खर्च जरूर बढ़ जाएगा पर फसल हो जाएगी। लेकिन लौटते मानसून और कुछ जगहों पर चक्रवाती बारिश ने राहत दी है। दक्षिण भारत के कई जिलों में चक्रवाती बारिश ने पैदावार के नुकसान को कम किया है।
ICAR के संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ राइस रिसर्च में एग्रोनॉमी विभाग के प्रमुख डॉक्टर आर महेंद्र कुमार कहते हैं कि इस साल मानसून की असंतुलित बारिश से धान के किसानों के सामने कई चुनौतियां पैदा की हैं। कुछ जगहों पर पानी की कमी से जहां धान की फसल को बचाए रखना मुश्किल हो रहा है वहीं कुछ जगहों पर ज्यादा बारिश की वजह से हल्दिया या अन्य रोग लगने का खतरा बढ़ा है। लेकिन कुछ जगहों से राहत भरी खबर भी आ रही है। दक्षिण भारत में चक्रवाती बारिश के चलते धान की खेती में कुछ सुधार देखा जा रहा है। कुछ जगहों पर धान की फसल जहां खराब हो गई थी वहां फिर से फसल लगाने का भी प्रयास किया जा रहा है। कुछ जगहों पर अच्छी बारिश से पैदावार बढ़ने की भी संभावना बनी है। उम्मीद है कि पिछले साल की तुलना में पैदावार कम नहीं होगी।
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