विचार: वैश्विक चिंताओं से निपटने की चुनौती
भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मजबूत विकास दर बनाए हुए है, डिजिटल विकास और सुधारों से अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है। सरकार मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से निर्यात और निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।
HighLights
भारत की अर्थव्यवस्था 6.6% विकास दर के साथ सबसे तेज।
सरकार 'रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफार्म' मंत्र से सुधारों को गति दे रही।
नौ मुक्त व्यापार समझौते लागू होंगे, निर्यात में वृद्धि।
डॉ. जयंतीलाल भंडारी। हाल में विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वैश्विक विकास दर घटकर 2.5 प्रतिशत रह जाएगी, वहीं भारत 6.6 प्रतिशत विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। वस्तुतः वैश्विक आर्थिक झटकों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था डिजिटल विकास, जीएसटी-आयकर सुधार, परमाणु ऊर्जा, व्यापार समझौते, सेवा क्षेत्र, बुनियादी ढांचा और मैन्यूफैक्चरिंग विकास से बेहतर स्थिति में है।
सरकार तेजी से रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफार्म के मंत्रों के साथ संरचनात्मक सुधारों को गति देते हुए अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रही है। इसकी बदौलत वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.7 प्रतिशत की दर से वृद्धि की है। यह वित्त वर्ष 2024-25 की 7.1 प्रतिशत की विकास दर के मुकाबले बेहतर है। स्पष्ट है कि देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी बनी हुई है, जिससे अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिल रही है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और सब्सिडी के भारी बोझ के बावजूद आर्थिक रफ्तार नहीं थमी है, लेकिन चालू वित्त वर्ष 2026-27 में पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत के सामने भी आर्थिक चुनौतियां और बढ़ेंगी। अत: भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नए उपाय सुनिश्चित करने होंगे। इसके लिए सरकार को ईज आफ लिविंग (जीवन को आसान बनाने) और ईज आफ डूइंग बिजनेस (कारोबारी सुगमता) में सुधार के लिए प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ना होगा।
अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श किया है। इस दौरान लोगों के जीवन स्तर में सुधार, आपूर्ति शृंखलाओं में आने वाले व्यवधानों से निपटना, आर्थिक सुधारों को गति देना तथा उद्योग और व्यापार की सुगमता बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
इन प्रयासों का उद्देश्य देश के सामने मौजूद चुनौतियों के बीच उपलब्ध संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए विकास दर को बनाए रखना और अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है। साथ ही रणनीतिक दृष्टि से आगे बढ़ते हुए दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत आगामी 10 महीनों में नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) लागू करेगा। अमेरिका के साथ भारत का व्यापार समझौता भी अगले माह के मध्य तक संभावित है। इससे देश निर्यात, विनिर्माण और निवेश का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर आगे बढ़ते हुए दिखाई देगा। यह कोई छोटी बात नहीं है कि जब इस समय वैश्विक निर्यात का ग्राफ तेजी से घट रहा है, वहीं अप्रैल-मई माह 2026 में भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत बढ़ गया है।
बीते वर्ष मारीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), आस्ट्रेलिया और चार यूरोपीय देशों-आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नार्वे और लिंकेस्टाइन के समूह यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के साथ हुए एफटीए का लाभ मिलते दिख रहा है। हाल में भारत और ओमान के बीच भी वृहद आर्थिक एवं साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू हो गया है। इससे आगामी पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 20 अरब डालर के पार पहुंचने का अनुमान है।
इसके जरिये ओमान में भारत के कृषि, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा, फुटवियर और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को निर्यात विस्तार का अवसर मिलेगा। यह समझौता दक्षिण एशिया, खाड़ी क्षेत्र और पूर्वी अफ्रीका को जोड़ने वाला एक रणनीतिक आर्थिक गलियारा स्थापित करेगा। इससे कारोबार बढ़ने के साथ रोजगार मौके भी बढ़ेंगे। इसमें कोई दो मत नहीं कि भारत एफटीए की डगर पर तेजी से बढ़ रहा है।
विगत दिनों भारत और न्यूजीलैंड के बीच भी एक ऐतिहासिक एफटीए पर हस्ताक्षर हुआ और यह जल्द ही लागू होगा। भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए एफटीए तथा ब्रिटेन के साथ हुए एफटीए का भी क्रियान्वयन इसी वर्ष संभावित है। इनके साथ भारत कनाडा, इजरायल, रूस, पेरू, चिली, दक्षिण अफ्रीका और मेक्सिको के साथ मुक्त व्यापार समझौते करने पर बात कर रहा है।
अब सरकार को अर्थव्यवस्था के समक्ष आने वाली चुनौतियों, जैसे कमजोर मानसून, सूखे की आशंका, महंगाई, मांग में कमी तथा वित्तीय दबावों से निपटने पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए इस वर्ष के बजट में विनिवेश से प्राप्त किए जाने वाले 80 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य को हासिल करने, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रवाह को बढ़ाने तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को प्रोत्साहित करने जैसे उपायों पर तेजी से कार्य किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही व्यापार से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाते हुए व्यापारिक समझौतों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में भी ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। सेवा क्षेत्र, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे की मजबूत नींव के आधार पर चालू वित्तीय वर्ष में लगभग सात प्रतिशत की विकास दर प्राप्त करने तथा अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ना चाहिए।
(लेखक अर्थशास्त्री हैं)












