रमेश कुमार दुबे। पिछले दिनों पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल‑डीजल का सीमित और समझदारी से इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा दें और जहां निजी वाहन की जरूरत हो वहां कारपूलिंग अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि हमें विदेशी मुद्रा बचानी होगी।

प्रधानमंत्री की अपील का जनता पर कितना असर पड़ा यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन भारतीय रेल द्वारा विद्युतीकरण मुहिम के जरिये डीजल की बचत की जा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय रेल ने विद्युतीकरण के जरिये 185 करोड़ किलो लीटर डीजल बचाया। यह मात्रा देश की कुल चार दिन की डीजल की मांग के बराबर है। सबसे बड़ी बात यह है कि विद्युत कर्षण (रेल के पहियों को खींचने में लगने वाली ऊर्जा) पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ डीजल ट्रैक्शन की तुलना में 70 प्रतिशत किफायती भी है।

उल्लेखनीय है कि 2014 से पहले देश में मात्र 21,801 किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण हुआ था। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने रेल विद्युतीकरण को प्राथमिकता दी। तत्कालीन रेल मंत्री के निर्देशन में रेल विद्युतीकरण मिशन शुरू किया गया। इस मिशन का लक्ष्य रेलवे के पूरे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण करना है।

रेलवे ने यह मिशन डीजल इंजनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और ट्रेनों की सामान्य गति को बढ़ाने के लिए तैयार की है। डीजल इंजनों की कार्यक्षमता काफी कम होती है और इन्हें चलाने में बहुत लागत आती है। मार्च 2026 तक रेलवे के कुल 70,175 किलोमीटर ब्राडगेज नेटवर्क में 69,906 किलोमीटर नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है। अर्थात कुल ब्राडगेज नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकृत किया जा चुका है।

अब मात्र 269 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क ऐसा है, जिसका विद्युतीकरण किया जाना बाकी है। जिन राज्यों में रेल विद्युतीकरण अभी लंबित है, उनमें गोवा, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम और राजस्थान शामिल हैं। गोवा में 91 प्रतिशत, तमिलनाडु में 97 प्रतिशत, कर्नाटक में 97 प्रतिशत, असम में 98 प्रतिशत, राजस्थान में 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वर्ष 2014 से पहले देश में प्रतिदिन औसत 1.42 किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण हुआ।

वहीं रेल विद्युतीकरण मिशन शुरू होने के बाद 2019-2025 में प्रतिदिन औसतन 15 किलोमीटर रेललाइनों का विद्युतीकरण किया गया। 2023-24 में रेल विद्युतीकरण का रिकार्ड बना जब प्रतिदिन औसतन 19.7 किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण हुआ। यह परिवर्तन भारतीय रेल को अधिक तेज, स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाते हुए नए भारत की विकास रीढ़ को और मजबूत कर रहा है।

स्पष्ट है कि 1925 में बांबे वीटी (वर्तमान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) और कुर्ला के बीच हार्बर लाइन पर चली पहली बिजली चालित रेलगाड़ी के 100 वर्ष बाद भारतीय रेल ने शत प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। रेल विद्युतीकरण के मामले में भारत दुनिया की कई अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ चुका है। जहां भारत में 96.6 प्रतिशत रेल लाइनों का विद्युतीकरण हो चुका है वहीं ब्रिटेन में 39 प्रतिशत, रूस में 52 प्रतिशत और चीन में 82 प्रतिशत रेलमार्गों का ही विद्युतीकरण हो पाया है।

रेल विद्युतीकरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रेलवे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों क इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। नवंबर 2025 तक रेलवे अपने कुल परिचालन में 898 मेगावाट सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहा था। 2014 में मात्र 3.68 मेगावाट सौर ऊर्जा का इस्तेमाल रेलवे कर रहा था। 898 मेगावाट में से 629 मेगावाट का उपयोग रेलगाड़ियों को चलाने के लिए किया जा रहा है, जबकि 269 मेगावाट अन्य जरूरतों को पूरा करने में। इनमें स्टेशन की लाइटिंग, वर्कशाप, सर्विस बिल्डिंग और रेलवे क्वार्टर शामिल हैं।

वर्तमान में 2,626 रेलवे स्टेशन सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं। इस तरह के उपाय 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय रेल की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। भारत ने हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन के तहत 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन तथा 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।

रेलवे ने हरित ऊर्जा स्रोतों को विविधीकरण करते हुए हरियाणा कजींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली 10 कोच वाली ट्रेन को मंजूरी दे दी है। इससे प्रदूषण काफी कम होगा। रेलवे अपने ऊर्जा स्रोतों को विविधीकृत कर रहा है। वर्तमान में रेलवे ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 4,260 मेगावाट सौर और 3,427 मेगावाट पवन ऊर्जा के लिए समझौता किया है। इसके अलावा भी रेलवे ने 1,500 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी के लिए अनुबंध किया है।

रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पावर लिमिटेड अपने सोलर पार्क से भारतीय रेलवे को सौर ऊर्जा की आपूर्ति कर रही है। इसके साथ-साथ 2025-26 में रेलवे ने 81.59 लाख पौधे लगाए, 185 जल पुनर्चक्रण संयंत्र एवं 8,313 वर्षा जल संचयन संरचनाएं भी स्थापित किए। इस प्रकार भारतीय रेल पर्यावरण संरक्षण में मौन क्रांति ला रहा है।

(लेखक केंद्रीय सचिवालय सेवा में अधिकारी हैं)