संपादकीय: जनसांख्यिकीय बदलाव
गृह मंत्री अमित शाह ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के साथ बैठक की। यह बदलाव घुसपैठ के कारण हुआ है, जिससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हुआ है और राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
HighLights
अमित शाह ने जनसांख्यिकीय परिवर्तन समिति के साथ बैठक की।
सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ से सामाजिक ताना-बाना बदला।
देशव्यापी एनआरसी और घुसपैठ रोकने पर जोर दिया गया।
गृह मंत्री अमित शाह ने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की जांच के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय समिति के साथ बैठक कर जिस तरह उसे आवश्यक निर्देश दिए, उससे यही पता चलता है कि यह मामला केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में है।
यह होना भी चाहिए, क्योंकि बीते कुछ दशकों में देश के कई सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ के चलते सामाजिक तानाबाना जिस तरह बदला है, वह किसी से छिपा नहीं। वैसे तो सबसे अधिक असामान्य जनसांख्यिकीय परिवर्तन पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में हुआ है, लेकिन यह देश के अन्य राज्यों में भी देखा जा सकता है।
आखिर यह एक तथ्य है कि बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ से प्रभावित राज्यों में झारखंड और बिहार भी हैं। इसी तरह यह भी किसी से छिपा नहीं कि किस तरह रोहिंग्या घुसपैठिए हैदराबाद से लेकर जम्मू तक में जाकर बस गए हैं। रोहिंग्याओं का बंगाल या पूर्वोत्तर से घुसकर जम्मू, हैदराबाद जैसे शहरों में अपना ठिकाना बना लेना किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा ही जान पड़ता है।
यह एक तथ्य है कि बांग्लादेश से बंगाल, मेघालय, त्रिपुरा, असम आदि में घुसपैठ कराने वाले तत्व संगठित रूप से काम कर रहे हैं। इसी कारण घुसपैठिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और उनके सहारे पासपोर्ट तक हासिल कर लेते हैं। बांग्लादेश से बंगाल और मेघालय के रास्ते आने वाले घुसपैठिए देश के हर हिस्से में फैल गए हैं।
असम में तो वे एक बड़ी समस्या बन गए हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण असम की जनसांख्यिकीय में जो बदलाव हुआ और यहां की स्थानीय संस्कृति के लिए जैसा खतरा पैदा हुआ, उसी कारण एनआरसी का सहारा लेना पड़ा। उचित यह होगा कि देशव्यापी स्तर पर एनआरसी हो। यह पता चलना ही चाहिए कि भारत में रहने वाले कितने लोग वैध हैं और कितने अवैध?
इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि यदा-कदा किन्हीं-किन्हीं राज्यों में घुसपैठियों की पकड़-धकड़ होती है, क्योंकि जब तक यह काम राष्ट्रव्यापी स्तर पर नहीं होगा, तब तक उन सबकी पहचान करना कठिन है। घुसपैठ केवल बांग्लादेश से ही नहीं होती। यह म्यांमार से भी होती है और मणिपुर के समस्याग्रस्त होने के कारणों में से एक कारण घुसपैठ भी है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन के अस्वाभाविक कारणों और उसके प्रभाव का अध्ययन करने वाली समिति यह भी बताएगी कि इससे उत्पन्न चुनौतियों का समाधान कैसे किया जाए? चूंकि यह समिति सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर पड़ताल करेगी, इसलिए उसकी रिपोर्ट आने में समय लगेगा। उसकी रिपोर्ट आने तक यह तो सुनिश्चित किया ही जाए कि बांग्लादेश, म्यांमार आदि से होने वाली घुसपैठ थमे। नेपाल सीमा पर भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।












