तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में से दो में भाजपा की हार यह संदेश देने वाली है कि उसकी चुनौतियां बढ़ भी सकती हैं। इनमें से बिहार की बांकीपुर सीट के परिणाम ने इसलिए सबसे अधिक ध्यान खींचा, क्योंकि 1995 से यह भाजपा के पास थी। इसके अलावा यह भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से रिक्त हुई थी। भाजपा केवल अपने अध्यक्ष की सीट बचाने में ही नाकाम नहीं, बल्कि उसे पराजय का स्वाद बिहार में भाजपा के मुख्यमंत्री रहते हुए चखना पड़ा।

चूंकि मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस के पास थी और यह क्षेत्र उसका ही गढ़ है, इसलिए भाजपा यहां अपनी पराजय को हल्के में ले सकती है। इसके बाद भी वह इसकी अनदेखी नहीं कर सकती कि आम तौर पर उपचुनावों में सत्ताधारी दल जीत हासिल करते हैं, जैसे गुजरात की मांजलपुर सीट भाजपा ने आसानी से जीत ली। निःसंदेह उपचुनाव नतीजों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि वे सदैव किसी बड़ी लहर का सूचक होते हैं।

इतना अवश्य है कि कई बार वे बदलते राजनीतिक माहौल का परिचायक बन जाते हैं। यह समय बताएगा कि बांकीपुर और दतिया के नतीजे भाजपा के लिए स्थायी झटका हैं या अस्थायी, क्योंकि एक समय वह उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य की ओर से छोड़ी गईं लोकसभा सीटें हार गई थी।

बांकीपुर से जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर का चुनाव जीतना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक तो वे प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर सवाल उठा रहे थे और दूसरे, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सीधे तौर पर चुनौती दे रहे थे। यह भी उल्लेखनीय है कि वे मुख्य विपक्षी दल राजद को तीसरे स्थान पर धकेलने में सफल रहे। स्पष्ट है कि बांकीपुर का नतीजा राजद के लिए भी चिंता का कारण बनना चाहिए। कहना कठिन है कि बांकीपुर से जीत हासिल कर पहली बार विधायक बने प्रशांत किशोर बिहार में तीसरी राजनीतिक शक्ति खड़ी कर पाएंगे या नहीं, लेकिन उनकी जीत कहीं न कहीं जनता के असंतोष को बयान करती है।

इस असंतोष के कारणों में राज्य के साथ केंद्र सरकार की रीति-नीति भी हो सकती है और स्थानीय समीकरण भी। यह ध्यान रहे कि उपचुनाव एक ऐसे माहौल में हुए, जब नीट पेपर लीक को लेकर युवाओं के आक्रोश को भुनाया जा रहा था। इसके पहले उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने वाले यूजीसी के नियमों ने सामान्य वर्ग के लोगों को नाराज किया था। इसके अतिरिक्त बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर जैसे मामले भी चर्चा में थे। यह भी न भूला जाए कि बांकीपुर से भाजपा ने अपना प्रत्याशी बदलकर अपने लिए मुसीबतें बढ़ाईं। दतिया में भी उसने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र को हाशिए पर किया।