जागरण संपादकीय: पाकिस्तान की बर्बरता
भारत का हित इसी में है कि विश्व समुदाय इससे भली तरह परिचित हो कि इस भारतीय क्षेत्र पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। इससे ही पाकिस्तान दबाव में आएगा और भारत का अपने इस भूभाग पर दावा मजबूत होगा।
HighLights
पाकिस्तानी सेना के दमन से PoJK में 30 लोग मारे गए।
मुजफ्फराबाद समझौते के वादे खोखले साबित हुए, असंतोष बढ़ा।
भारत को PoJK पर अपना दावा मजबूत करना होगा।
यह अच्छा हुआ कि भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के लोगों पर पाकिस्तानी सेना के दमन चक्र का संज्ञान लिया। ऐसा किया जाना इसलिए आवश्यक था, क्योंकि पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी के चलते 30 लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त तमाम लोगों को गिरफ्तार कर जेलों में ठूंस दिया गया है, ताकि असंतोष की आग किसी तरह शांत हो, लेकिन वह और भड़क रही है। इसका कारण पाकिस्तान सरकार की वहां के लोगों से की गई वादाखिलाफी है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में मुजफ्फराबाद समझौते के तहत पाकिस्तान सरकार ने वहां के लोगों की समस्याओं का समाधान करने के जो वादे किए थे, वे खोखले ही साबित हुए। वहां के लोगों का धैर्य इसलिए जवाब दे गया है, क्योंकि महंगाई बढ़ने के साथ बुनियादी सुविधाओं का अभाव बढ़ रहा है। यह पहली बार नहीं, जब पाकिस्तान के कब्जे वाले इस भारतीय भूभाग के लोगों ने अपनी उपेक्षा और दुर्दशा से त्रस्त होकर बगावती तेवर दिखाए हों। वे पहले भी ऐसा करते रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें प्रताड़ना ही मिली है।
पाकिस्तान अपने कब्जे वाले इस भारतीय हिस्से के संसाधनों का दोहन तो करता है, लेकिन वहां के लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं उपलब्ध कराता। भारत को तंग करने के लिए जब-तब कश्मीर का राग अलापने वाला पाकिस्तान अपने हिस्से के लोगों का जैसा उत्पीड़न करने में लगा हुआ है, उसकी मिसाल मिलना कठिन है।
निःसंदेह केवल इतना ही पर्याप्त नहीं कि भारत गुलाम जम्मू-कश्मीर के बिगड़ते हालात पर चिंता जताए। उसके लिए ऐसे कदम उठाना भी आवश्यक है, जिससे वहां की चिंताजनक स्थितियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय गंभीरता से ध्यान दे। यह ठीक है कि ब्रिटेन के 50 सांसदों ने वहां के लोगों के खिलाफ जारी अत्याचार पर चिंता जताई, लेकिन आखिर क्या कारण है कि यूरोपीय समुदाय के देश और विशेष रूप से अमेरिका मौन है? इन देशों का मौन यही बताता है कि वे किस तरह मानवाधिकारों के बर्बर उल्लंघन पर दोहरे रवैये का परिचय देते हैं?
भारत का हित इसी में है कि विश्व समुदाय इससे भली तरह परिचित हो कि इस भारतीय क्षेत्र पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। इससे ही पाकिस्तान दबाव में आएगा और भारत का अपने इस भूभाग पर दावा मजबूत होगा। भारत को गुलाम जम्मू-कश्मीर पर अपना दावा मजबूत करने के लिए इसलिए और अधिक सक्रिय होना होगा, क्योंकि इस क्षेत्र पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे के कारण ही भारत की अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच स्थापित नहीं हो पा रही है। भारत को संसद में पारित प्रस्ताव के अनुरूप इसके प्रति प्रतिबद्ध रहना होगा कि वह अपने इस हिस्से को हासिल करने और अपनी सीमा अफगानिस्तान तक ले जाने को लेकर गंभीर है।












