जागरण संपादकीय: मोदी सरकार के 12 वर्ष
इसकी अनदेखी न की जाए कि स्मार्ट सिटी और मेक इन इंडिया जैसी योजनाएं अपेक्षा के अनुरूप सफल नहीं हो सकीं और आत्मनिर्भर भारत भी अभी एक नारा ही अधिक है।
HighLights
विकास और जन कल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिला।
अनुच्छेद 370 हटाना और तीन तलाक कानून जैसे साहसिक फैसले।
स्मार्ट सिटी, मेक इन इंडिया में अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे समय तक केंद्रीय सत्ता का नेतृत्व करने का रिकार्ड कायम करना उनकी एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन केवल इसे ही रेखांकित किया जाना सही नहीं होगा। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह जानना है कि इन 12 वर्षों में देश में क्या बदला? मोदी सरकार की 12 वर्ष की उपलब्धियों की एक लंबी सूची है। इस सूची में केवल देश की तस्वीर बदलने वाली सफल विकास योजनाएं ही नहीं, बल्कि ऐसी जनकल्याणकारी योजनाएं भी हैं, जिन्होंने करोड़ों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला।
इन योजनाओं में उज्ज्वला, आवास, बिजली, पानी, शौचालय जैसी योजनाएं ही नहीं, बल्कि जनधन, मुद्रा, स्वनिधि, आयुष्मान, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं भी हैं, जिनसे लोगों को गरीबी रेखा से बाहर आने में मदद मिली। इनमें से अधिकांश योजनाओं की सफलता का आधार प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डीबीटी बना। डिजिटल भुगतान प्रणाली भी मील का पत्थर बनी। इसी तरह पिछले वर्षों में देश में बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे का निर्माण हुआ। इसके तहत सड़कें, पुल, हवाईअड्डे, बिजलीघर, आइआइटी, आइआइएम जैसे शिक्षा संस्थान और एम्स सरीखे अस्पताल तो बने ही, रेल और मेट्रो नेटवर्क की भी उल्लेखनीय प्रगति हुई। इस सबसे एक ऐसे भारत का निर्माण हुआ, जिसे नया भारत कहा जा सकता है।
मोदी सरकार की सफलताओं में केवल विकास एवं जनकल्याण की योजनाओं की ही गिनती नहीं की जानी चाहिए। उसके कुछ साहसिक फैसलों का भी स्मरण किया जाना चाहिए, जैसे जम्मू-कश्मीर से विभाजनकारी अनुच्छेद 370 को हटाना, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाना, पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक के साथ आपरेशन सिंदूर के तहत अकल्पनीय सैन्य कार्रवाई करना और माओवाद को खत्म करना। मोदी सरकार को देश की तस्वीर बदलने में जो सफलता मिली, उसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का कद बढ़ा। प्रधानमंत्री मोदी के एक सक्षम शासक के रूप में गहरी छाप छोड़ने के चलते ही आज भाजपा तीसरी बार केंद्र की सत्ता में है और 21 राज्यों में उसकी अथवा उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं।
भाजपा को बीते 12 वर्षों में जो राजनीतिक बढ़त मिली, उसका श्रेय प्रधानमंत्री के प्रति देश की जनता के भरोसे को जाता है, लेकिन आज जब मोदी सरकार की उपलब्धियों का गुणगान किया जा रहा है, तब यह भी अवश्य देखा जाना चाहिए कि इन 12 वर्षों में वह क्या है, जो हासिल नहीं हो सका अथवा किन क्षेत्रों में सुधार नहीं हो सका। इसकी अनदेखी न की जाए कि स्मार्ट सिटी और मेक इन इंडिया जैसी योजनाएं अपेक्षा के अनुरूप सफल नहीं हो सकीं और आत्मनिर्भर भारत भी अभी एक नारा ही अधिक है।












