संपादकीय: चढ़ावे की चोरी
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद दान के प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रस्ट ने पहले इनकार किया, लेकिन अब विशेष जांच दल गठित किया गया है ताकि दोषियों को पकड़ा जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
HighLights
राम मंदिर चढ़ावे की चोरी से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस।
दान प्रबंधन में लापरवाही, ट्रस्ट पर उठे गंभीर सवाल।
विशेष जांच दल गठित, दोषियों को जवाबदेह ठहराने की मांग।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है। सदियों के संघर्ष और प्रतीक्षा के बाद बना यह मंदिर विश्व भर के हिंदुओं की श्रद्धा का केंद्र है। ऐसे मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना को बहुत ही गंभीरता से लेने की आवश्यकता थी, लेकिन कोई नहीं जानता कि दान की राशि में हेराफेरी की बात सामने आते ही उच्चस्तरीय जांच का निर्णय क्यों नहीं लिया गया?
इस मामले में जिस प्रकार एफआईआर दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं समझी गई, उससे अनेक सवाल खड़े होते हैं। यह विचित्र है कि राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की भनक सबसे पहले विपक्षी नेताओं को लगी और उनकी ओर से आवाज उठाने के बाद ही मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों का ध्यान इस ओर गया। इससे तो यही इंगित होता है कि दान में मिले धन के प्रबंधन की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। कम से कम अब तो ऐसा अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
यह समझना कठिन है कि चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इससे इन्कार क्यों किया कि इस तरह की कहीं कोई घटना हुई है? इसके उपरांत जब दान राशि की गिनती से जुड़े लोगों के ठिकानों से लाखों रुपये मिले, तब जाकर इस मामले में थोड़ी गंभीरता दिखाई गई। इनमें से कुछ व्यक्ति तो ऐसे हैं, जिन्होंने महंगी संपत्ति खरीदी और अपने वैभव का सार्वजनिक प्रदर्शन करने में लगे हुए थे। इस सबको देखते हुए यह कहना कठिन है कि दान की राशि में हेराफेरी का सिलसिला पिछले कितने समय से चला आ रहा था।
यह ठीक है कि अंतत: ट्रस्ट के आग्रह पर एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया गया है। यह जांच दल दानपात्रों के सुरक्षा प्रबंध के साथ राशि गिनने और उसे बैंक में जमा करने की प्रक्रिया जांचेगा, लेकिन उचित यह होगा कि यह दल उन कारणों की तह तक भी जाए, जिनके चलते आरंभ में ही चढ़ावे की राशि में हेराफेरी का पता नहीं चल सका।
किसी के लिए भी यह समझना कठिन है कि इतने प्रतिष्ठित मंदिर में पहले दिन से ही ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई कि दान में मिली पाई-पाई का रखरखाव सही तरीके से हो? किसी को इस प्रश्न का उत्तर देना चाहिए कि प्रारंभ में ही उस कक्ष में सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए, जिसमें दानपात्रों को खोला जाता था और फिर राशि की गिनती होती थी।
उचित यह होगा कि विशेष जांच दल अपनी छानबीन इस तरह करे कि सभी दोषी पकड़े जाएं और ट्रस्ट के जिन भी लोगों ने अपेक्षित जिम्मेदारी का परिचय नहीं दिया, उन्हें भी जवाबदेह बनाया जाए। यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि श्रद्धा का कोई भी केंद्र हो, वहां यदि भक्तों के दान की राशि के साथ किसी भी तरह की हेराफेरी होती है तो उनकी आस्था को गहरी चोट पहुंचती है।












