डॉ. जयंतीलाल भंडारी। हाल में भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। टैरिफ में यह बड़ी कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इस समझौते से जहां कई क्षेत्रों में भारत से अमेरिका को निर्यात बढ़ेगा, वहीं भारत में अमेरिकी निवेश में भी वृद्धि होगी। साथ ही दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी। वैश्विक कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में भारत में निवेश बढ़ाएंगी और भारत का निर्यात तेजी से बढ़ेगा। इससे भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिकी बनने की दिशा में और तेजी से बढ़ेगा। गत दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा भी कि अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए व्यापार समझौते भारत की बढ़ती आर्थिक अहमियत के प्रतीक हैं।


नई वैश्विक व्यवस्था भारत की ओर झुकती दिखाई दे रही है। पहले कहा जाता था कि भारत अवसर गंवा देता है, लेकिन अब दुनिया का मानना है कि यदि वे तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था से नहीं जुड़े, तो महत्वपूर्ण अवसर खो देंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत का तेज आर्थिक विकास और महंगाई पर नियंत्रण एक दुर्लभ संयोजन है। मजबूत बुनियादी ढांचा, विशाल घरेलू बाजार, मध्यवर्ग की बढ़ती क्रयशक्ति, एमएसएमई की गति, ऊर्जा विकास, युवा शक्ति, डिजिटल प्रगति तथा मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र की ताकत ने भारत को दुनिया के लिए आकर्षक बना दिया है। इसी कारण विकसित देश भारत से द्विपक्षीय और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) कर रहे हैं।

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के अनुसार भारत मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनाल, तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे संवेदनशील कृषि एवं डेरी उत्पादों के मामले में पूरी तरह सुरक्षित है। यह समझौता भारत के टेक्सटाइल एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, प्लास्टिक एवं रबर उत्पाद, आर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में बड़े अवसर देगा। इसके अलावा जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरे और एयरक्राफ्ट पार्ट्स सहित कई उत्पादों के निर्यात को गति मिलेगी।

विशेष रूप से एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन डालर के अमेरिकी बाजार के द्वार खुलेंगे। निर्यात बढ़ने से महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार बढ़ेगे। इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों की बड़ी शृंखला पर टैरिफ घटाएगा या समाप्त करेगा तथा अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डालर के ऊर्जा उत्पाद, एयरक्राफ्ट एवं पार्ट्स, कीमती धातुएं, टेक्नोलाजी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

अमेरिका भारत के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण बाजार है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच 131.84 अरब डालर का व्यापार हुआ, जिसमें भारत का निर्यात 86.51 अरब डालर और आयात 45.33 अरब डालर रहा। वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत ने अमेरिका को 65.88 अरब डालर का निर्यात किया। 18 प्रतिशत टैरिफ भारत को चीन-प्लस-वन रणनीति के स्वाभाविक विकल्प के रूप में और मजबूत करता है। वर्तमान में अमेरिका ने ब्राजील पर 50 प्रतिशत, चीन पर 34 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत तथा मलेशिया, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और थाइलैंड पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है। ऐसे में भारत-अमेरिका समझौता वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।

पिछले दिनों हुआ भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इससे दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा। बीते वर्ष ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ हुए एफटीए का इस साल कार्यान्वयन महत्वपूर्ण होगा। साथ ही मारीशस, यूएई, आस्ट्रेलिया और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नार्वे और लिकटेंस्टाइन) के साथ लागू एफटीए के लाभ भी बढ़ेंगे। इस वर्ष पेरू, चिली, आसियान, मेक्सिको, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, इजरायल और गल्फ कंट्रीज काउंसिल सहित अन्य देशों के साथ नए एफटीए हो सकते हैं।

इन समझौतों का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को आर्थिक सुधारों और घरेलू ढांचागत बदलावों की गति बढ़ानी होगी। नियमों और नियामक संस्थाओं के कामकाज में सुधार, कर सुधारों को गहराई देना और जीएसटी को अधिक प्रभावी बनाना आवश्यक है। घरेलू कंपनियों को गुणवत्ता, तकनीक और कुशल मानव संसाधन पर ध्यान देना होगा। साथ ही प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, गैर-टैरिफ बाधाएं कम करने, सेवा क्षेत्र का लाभ उठाने, निर्यात विविधीकरण, कृषि सुरक्षा तथा पर्यावरण और श्रम मानकों के पालन पर विशेष ध्यान देना होगा।

उम्मीद है भारत-अमेरिका शीघ्र ही व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इससे 2030 तक दोनों के बीच 500 अरब डालर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। यह समझौता भारत के निर्यात और रोजगार सृजन में मील का पत्थर साबित हो सकता है तथा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


(लेखक अर्थशास्त्री हैं)