विचार: अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला कदम
इसे भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिरता के संकेत दे रही हो, लेकिन वैश्विक स्थितियां व्यापक रूप से अनिश्चित एवं अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे फिसलन भरे परिदृश्य में मजबूती देने वाले ऐसे ही बजट की आवश्यकता थी कि भारत के कदम फिसलें नहीं और वह सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में चमकता रहे।
HighLights
2047 तक विकसित भारत बनाने का दीर्घकालिक लक्ष्य।
बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, एमएसएमई पर विशेष ध्यान।
राजकोषीय अनुशासन संग विकास को प्राथमिकता।
जीएन वाजपेयी। केंद्रीय बजट भारत सरकार की सबसे व्यापक वार्षिक आर्थिक गतिविधियों में से एक है। यह कई उद्देश्यों की पूर्ति करता है। सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है। कराधान और व्यय नीति को निर्धारित करता है। कल्याणकारी एवं विकास संबंधी योजनाओं पर खर्च का खाका तैयार करता है। इसकी नीतियां जीडीपी वृद्धि, निवेश और रोजगार से लेकर महंगाई के रुझान को भी प्रभावित करती हैं। गत रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट प्रस्तुत किया, वह भारत की आर्थिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
वैसे तो बजट एक वार्षिक आयोजन है, लेकिन इस बजट के मूल में एक दूरगामी लक्ष्य है और वह है 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र के लिए बुनियाद को मजबूत बनाना। इस बजट में भारत की उत्पादक क्षमताओं को बढ़ाने एवं विकसित भारत को मूर्त रूप देने वाले पहलुओं का समावेश है। इसमें वित्तीय नीति, बुनियादी ढांचा और पूंजीगत व्यय, विनिर्माण और रणनीतिक क्षेत्र, एमएसएमई और उद्यमिता समर्थन, कराधान उपाय और सामाजिक, स्वास्थ्य एवं कृषि की आवश्यकताओं को भलीभांति चिह्नित कर उनके लिए अपेक्षित उपाय किए गए हैं।
वैश्विक अनिश्चित माहौल में वित्त मंत्री ने विकास संबंधी आवश्यकताओं एवं वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधा है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया है। बजट में वर्ष 2031 तक जीडीपी के मुकाबले ऋण अनुपात को 50 प्रतिशत तक कम करने की राह तैयार की गई है। यह राजकोषीय घाटे को घटाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। घाटे को नियंत्रित रखने के बावजूद सरकार ने विकास गतिविधियों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने में भी उदारता दिखाई है।
बजट ब्याज के बोझ को नियंत्रित करते हुए सार्वजनिक निवेश की आवश्यकता को भी संतुलित करता है। इसमें बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर जारी है। इसके लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। कई महत्वाकांक्षी नई परियोजनाओं का भी एलान किया गया है। इनमें सात हाई स्पीड रेल कारिडोर प्रमुख हैं। इनके अलावा नए डेडिकेडेट फ्रेट कारिडोर का निर्माण, 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों का निर्माण, एक तटीय कार्गो प्रमोशन योजना और सात सिटी इकोनमिक जोन भी शामिल हैं।
रोजगार सृजन के लिहाज से महत्वपूर्ण विनिर्माण क्षेत्र भी बजट की प्राथमिकता के केंद्र में है। इसमें विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इस क्रम में सेमीकंडक्टर मिशन, घरेलू चिप निर्माण, आपूर्ति शृंखला में लचीलेपन और प्रौद्योगिकी आधारित मूल्य शृंखलाओं को आकार देने पर ध्यान दिया गया है। बायोफार्मा उत्पादन और इलेक्ट्रानिक्स निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भी योजनाएं तैयार की गई हैं। रेयर अर्थ कारिडोर की पहल रेखांकित करती है कि भविष्य की योजनाएं सरकार की प्राथमिकताओं में हैं।
बायोफार्मा शक्ति मिशन और कार्बन कैप्चर, उपयोग, और भंडारण जैसी पहल भी सरकार के रणनीतिक सोच को रेखांकित करती हैं। सैकड़ों पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के पुनरुत्थान और डेडिकेटेड रासायनिक पार्कों की स्थापना के माध्यम से सरकार इकोसिस्टम संचालित ढांचे पर दांव पर लगा रही है। यह ‘वाल्यूम प्रोड्यूसर’ से ‘वैल्यू प्रोड्यूसर’ यानी मात्रात्मक उत्पादक से नवाचार प्रेरित गुणात्मक उत्पादक बनने की योजना पर काम कर रही है।
अगर 2030 तक देश को सात ट्रिलियन (लाख करोड) डालर की इकोनमी बनाना है तो ऐसा परिवर्तन आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है। बजट में छोटे उद्यमों के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये के बड़े कोष की स्थापना का भी प्रविधान है। इसका उद्देश्य उद्यमों तक पूंजी तक पहुंच को बढ़ाना और आर्थिकी की रीढ़ को मजबूत करना है। इसके अतिरिक्त क्रेडिट गारंटी, बिल डिस्काउंटिंग के माध्यम से तरलता में सुधार जैसे तमाम उपाय भी उद्यमों के अनुकूल हैं।
बजट ने कई सामाजिक आयामों का भी ध्यान रखा है। जैसे कृषि को 1.6 लाख करोड़ रुपये का आवंटन मिला है। इसमें उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे नारियल, चंदन, काजू और कोको के लिए सार्थक उपाय किए गए हैं। साथ ही पारंपरिक अनाज फसलों और प्रौद्योगिकी की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया है। भारत विस्तार एआइ किसानों को मौसमी जानकारियां, मिट्टी की सेहत और बाजार कीमतों को एकीकृत करके आवश्यक मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध होगा। इसकी सेवाएं कई भाषाओं में होंगी।
लाभार्थी दीदी की सफलता के बाद ‘शी-मार्ट योजना ग्रामीण महिलाओं के उत्थान पर केंद्रित है। चिकित्सा हब की स्थापना भारत को एक वैश्विक चिकित्सा पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। इसके अतिरिक्त, 1.5 लाख विशेष कर्मियों को प्रशिक्षित करना हेल्थकेयर सेवाओं की बढ़ती मांग के अनुरूप ही है। उच्च शिक्षा से संबंधित एक नई समिति शैक्षणिक ढांचे और औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच सेतु का काम करेगी। पर्यटन को प्राथमिकता में रखते हुए 50 महत्वपूर्ण गंतव्यों में प्राचीन पुरातात्विक स्थलों के कायाकल्प और विभिन्न हितधारकों के प्रशिक्षण की योजना से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और पर्यटन आर्थिकी की संभावनाओं को भुनाना आसान होगा।
कराधान ढांचे में कोई क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं हुआ है, लेकिन सुगमता के तमाम उपाय अवश्य किए गए हैं। कुछ आलोचकों को यह अखरेगा कि बजट में क्रांतिकारी घोषणाएं नहीं की गईं। इस पर यही कहना अधिक उचित होगा कि वित्त मंत्री ने कोई तात्कालिक राहत देने के बजाय दीर्घकालिक मजबूती को वरीयता दी। इसे भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिरता के संकेत दे रही हो, लेकिन वैश्विक स्थितियां व्यापक रूप से अनिश्चित एवं अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे फिसलन भरे परिदृश्य में मजबूती देने वाले ऐसे ही बजट की आवश्यकता थी कि भारत के कदम फिसलें नहीं और वह सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में चमकता रहे।
(लेखक सेबी एवं एलआइसी के पूर्व चेयरमैन हैं)













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