आपके घर में खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बने कीमती धातुओं की नई खान
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सोने की बढ़ती कीमतों के बीच ई-कचरा कीमती धातुओं का नया स्रोत बन रहा है। खराब मोबाइल और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद अब 'शहरी सोने की खान' बन गए हैं...और पढ़ें
विवेक तिवारी जागरण न्यू मीडिया में एसोसिएट एडिटर हैं। लगभग दो दशक के करियर में इन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार् ...और जानिए
ई-कचरा बना सोने की नई 'शहरी खान', कीमतें बढ़ीं।
एक टन ई-कचरे में अयस्क से अधिक सोना।
रीसाइक्लिंग से पर्यावरण को लाभ, प्रदूषण कम होता है।
नई दिल्ली, जागरण प्राइम । दुनिया भर में सोने की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिख रहा है और सोने की औसत कीमत करीब 1.32 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुकी है। कीमतों में इस उछाल के साथ ही सोने की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर भी बढ़ता जा रहा है। खदानों से सोना निकालने और उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया लंबी और खर्चीली होती है। ऐसे में सोने की सप्लाई बढ़ाने का एक अहम और तेजी से उभरता स्रोत हमारे घरों में पड़े खराब मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनते जा रहे हैं। कीमती धातुओं की बढ़ती मांग और कीमतों के चलते ई-कचरे का आर्थिक महत्व भी तेजी से बढ़ा है। कई अध्ययनों के मुताबिक, दुनिया का केवल 20 फीसदी ई-कचरा ही रिसाइकिल हो पाता है, जबकि एक टन ई-कचरे से खनन किए गए अयस्क की तुलना में 10 से 800 गुना तक अधिक सोना निकाला जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में करीब 62 मिलियन टन ई-कचरा पैदा हुआ, जिसमें लगभग 91 अरब डॉलर मूल्य की कीमती धातुएं शामिल थीं और इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी सोने की थी।
स्क्रैप गोल्ड अब सोने की आपूर्ति का एक अहम स्रोत बन चुका है। वैश्विक मार्केट रिसर्च एवं और परामर्श फर्म वेरिफाइड मार्केट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीब 1,200 टन सोना पुरानी ज्वैलरी, इंडस्ट्रियल कचरे और ई-वेस्ट से निकाला जा रहा है। वैश्विक स्क्रैप गोल्ड खपत का लगभग 40 फीसदी इस्तेमाल भारत में होता है। चीन और अमेरिका भी ई-कचरे से सोने की माइनिंग के बड़े हब बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में सोने की वैश्विक मांग की आपूर्ती में सोने की खानों से माइनिंग की तुलना में ई कचरे से रीसाइक्लिंग की भूमिका तेजी से बढ़ंगी।
इलेक्टॉनिक कचरे की रीसाइकलिंग करने वाली कंपनी स्क्रैपकार्ट के संस्थापक विनीत रेलिया कहते हैं कि पिछले कुछ समय में पूरी दुनिया में कई धातुओं की कीमतों में काफी तेजी देखी गई है। इससे इन धातुओं की आपूर्ति के लिए ई कचरे की रीसाइकलिंग को भी बल मिला है। गौरतलब है कि किसी भी धातु के अयस्क से धातु को निकालने की तुलना में ई कचरे से उसे निकालना काफी सस्ता पड़ता है। उदाहरण के तौर पर अगर हम सिर्फ सोने की बात करें तो ई-कचरे में प्राकृतिक सोने के अयस्क से 10-100 गुना ज़्यादा सोना होता है। इससे ये 'शहरी सोने की खान' बन जाता है। आज के समय में दुनिया भर में सोने के कुल उत्पादन का 15 फीसदी से ज्यादा रीसाइकिल किए गए ई-कचरे से आता है। सिर्फ सोना ही नहीं कॉपर, सिल्वर और पेलेडियम जैसी धातुएं ही बड़े पैमाने पर ई कचरे से निकाली जाती हैं। धातुओं की बढ़ती कीमतों के चलते भारत में ई-कचरे की मांग काफी बढ़ गई है। आज एक टन कचरा खरीदने के लिए लगभग एक महीने पहले की तुलना में 10 से 20 फीसदी तक ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। ग्लोबल तौर पर ई-कचरे से निकाली जाने वाली कीमती धातुओं की रिकवरी का बाजार 2025 में लगभग 11 बिलियन डॉलर का था, ये हर साल लगभग 6.8 फीसदी के CAGR की दर से बढ़ रहा है। भारत हर साल 3.8 मिलियन टन ई-कचरा पैदा होता है। फिलहाल इसमें से सिर्फ 16 फीसदी ही औपचारिक रूप से रीसायकल किया जा रहा है। भारत के ई-कचरे में कुल रिकवर की जा सकने वाली धातु का मूल्य सालाना लगभग 6 बिलियन डॉलर है।
स्क्रैप गोल्ड रीसाइक्लिंग का वैश्विक बाजार 2023 में 13.50 बिलियन डॉलर का था। 2031 तक इसके 14.73 बिलियन डॉलर तक हो जाने का अनुमान है। मार्केट रिसर्च एवं और परामर्श फर्म वेरिफाइड मार्केट रिसर्च के मुताबिक यह सेक्टर एआई-आधारित रिफाइनिंग तकनीक के विकास, ऑटोमेशन और केमिकल-मुक्त रीसाइकलिंग की तकनीकों के विकास के चलते तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे खनन पर निर्भरता कम हो रही है। जानकारों का मानना है कि सोने की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए अगर बेहतर कानून, तकनीक और जागरूकता को बढ़ावा दिया जाए तो बड़ी मात्रा में इस्तेमाल हुआ सोना रिसाइकिल कर वापस पाया जा सकता है।

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