जागरण संपादकीय: मार्ग दुर्घटनाओं का सिलसिला
जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर जिले में बस दुर्घटना में 20 से अधिक लोगों की जान चली गई, जिससे देश में सड़क सुरक्षा की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
HighLights
ऊधमपुर में बस खाई में गिरने से 20 से अधिक की मौत
तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग दुर्घटना का मुख्य कारण
सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता
जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर जिले में एक बस के गहरी खाई में गिरने से 20 से अधिक यात्रियों की मौत आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में से एक है। चूंकि इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या अधिक है, इसलिए शीर्ष स्तर पर शोक व्यक्त किया जाया जा रहा है और दुर्घटना के कारणों की जांच का भरोसा दिया जा रहा है, पर सब जानते हैं कि ऐसे आश्वासन मार्ग दुर्घटनाओं को कम करने में कतई सहायक नहीं बन पा रहे हैं।
अपने देश में मार्ग दुर्घटनाएं और उनमें मरने एवं घायल होने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। आम तौर पर हर सड़क दुर्घटना के बाद वही-वही कारण सामने आते हैं, जिनके चलते तमाम मार्ग दुर्घटनाएं हो चुकी होती हैं। जैसे ओवर लोडिंग, तेज रफ्तार, लापरवाह ड्राइविंग, अकुशल चालक, यातायात नियमों की अनदेखी या फिर खराब सड़कें अथवा उस पर खतरनाक मोड़।
ऊधमपुर में यात्रियों से भरी जो बस खाई में गिरी, उसके दुर्घटनाग्रस्त होने का कारण उसकी तेज रफ्तार के साथ उसमें आवश्यकता से अधिक यात्री सवार होना बताया जा रहा है। ध्यान रहे यह सरकारी बस थी और फिर भी उसमें इतनी ओवरलोडिंग थी कि कुछ यात्री खड़े होकर यात्रा कर रहे थे। पहाड़ी रास्तों पर तो अतिरिक्त सतर्कता बरती जानी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं किया गया।
यह संभव नहीं कि बस अड्डे से निकली इस बस पर पुलिस की निगाह न पड़ी हो, लेकिन अपने देश में इस तरह के उल्लंघन इतने आम हो चुके हैं कि उन पर कोई भी ध्यान नहीं देता। विडंबना यह है कि प्रायः यात्री भी खड़े होकर यात्रा करने में गुरेज नहीं करते। वे जोखिम का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।
ऐसा नहीं है कि केवल यात्री वाहन ही ओवरलोडिंग करते हों। यही काम कमर्शियल वाहन भी करते हैं और इसके चलते वे भी दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। हमारे नीति-नियंता उन सभी कारणों से भली तरह परिचित हैं, जिनके चलते सड़क हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन उनका निवारण करने के नाम पर केवल कोरे आश्वासन दिए जा रहे हैं।
आम सड़कों से लेकर राजमार्गों तक का निर्माण इस तरह सुनिश्चित नहीं किया जा पा रहा है कि उनकी डिजाइन में कोई खामी न रहे और उनमें ब्लैक स्पाट यानी जोखिम वाले ठौर न बनने पाएं। इसी तरह पुलिस यह सुनिश्चित नहीं कर पा रही है कि कोई भी वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन न करने पाए।
लगातार बढ़ती मार्ग दुर्घटनाओं और उनमें हो रही मौतों को रोकने के लिए जिस तरह खोखले आश्वासन देकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है, उससे तो यही लगता है कि लोगों की जान की कोई कीमत ही नहीं। यह समझा जाए तो अच्छा कि मार्ग दुर्घटनाओं में प्रति वर्ष होने वाली लाखों अकाल मौतें विधि का विधान नहीं, बल्कि लापरवाही का दुष्परिणाम हैं।



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