अद्वितीय शक्ति का उत्सव है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, अदम्य हौसले का राज
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस स्त्री शक्ति के अद्वितीय योगदान का उत्सव है। भारत की स्टार्टअप क्रांति में महिलाएं असाधारण भूमिका निभा रही हैं। आकृति गुप्ता (लूपी), अपर्णा शाही (गैबिट) और मानेसा गरेमेल्ला (काइंडलाइफ) जैसी महिला संस्थापिकाएं अपनी दृढ़ता, सीखने की ललक और समय प्रबंधन से प्रेरणा बन रही हैं।
HighLights
महिला उद्यमी भारत की स्टार्टअप क्रांति में अग्रणी।
दृढ़ता, सीखने की ललक महिला संस्थापकों की खूबी।
वित्तीय आत्मनिर्भरता, नेतृत्व से समाज में बदलाव।
सीमा झा। स्त्री की अद्वितीय शक्ति का उत्सव है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस। एक दशक से भारत की स्टार्टअप क्रांति में असाधारण योगदान दे रही है स्त्री शक्ति और बनी है असंख्य महिलाओं की प्रेरणा। परंतु स्वयं उनकी प्रेरणा क्या है, क्या है उनके अदम्य हौसले का राज, जाना सीमा झा ने...
‘अपनी दोनों टांगें तुड़वाकर अपने पैरों पर खड़ा होना सीखा है सर, बड़ी मुश्किल से आया है यह एटीट्यूड, नहीं होगा सर..आप अपनी नौकरी रखिए और मैं अपना एटिट्यूड।’ चर्चित फिल्म ‘थ्री इडियट’ में शरमन जोशी का किसी कंपनी में नौकरी मांगने के दौरान का यह संवाद वास्तविक जीवन में भी दिख जाता है। दरअसल, इस वर्ष शार्क टैंक के सीजन पांच में बच्चों के लिए स्ट्रोलर व अन्य प्रोडक्ट तैयार करने वाली कंपनी लूपी की सीईओ आकृति गुप्ता ने भी कुछ इसी एटीट्यूड का प्रदर्शन किया था। कई बार एटीट्यूड को अहंकार से जोड़ लिया जाता है पर वास्तव में यह उस दृढ़ता व अथाह सामर्थ्य से जुड़ा है जो आकृति गुप्ता जैसी महिला सीईओ, संस्थापकों की खूबी रही है।
सीखने की ललक
आकृति गुप्ता बताती हैं, ‘आधुनिक माता-पिता को लक्ष्य करते हुए लूपी की स्थापना हुई । यह भारत की पहली प्रीमियम बेबी गीयर कंपनी है जो कि होप स्ट्रोलर, लैप बेबी कार सीट, डायपर बैग आदि तैयार करती हैं। लूपी की संस्थापक व सीईओ आकृति सोलो वुमन फाउंडर हैं यानी उन्होंने अपने दम पर बिजनेस को खड़ा किया है। धनबाद, झारखंड की आकृति बताती हैं कि पिता के व्यवसाय में होने के कारण इसकी बारीकी वह पहले ही समझ रही थीं पर बाद में यही लक्ष्य बन गया। आइआइएम, अहमदाबाद से एमबीए करने का उनका उद्देश्य ही था कि अपनी कंपनी शुरू करनी है। वह मानती हैं कि लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो एटीट्यूड बहुत जरूरी है। यह निरंतर उतार-चढ़ाव का सामना करने, नवाचार व बेहतर प्रदर्शन से आता है। आकृति कहती हैं, ‘स्टार्टअप शुरू करने से पूर्व एक लंबी योजना होनी चाहिए यानी पूरा खाका हो। इसी तरह, कई बार रुक जाना जरूरी है। इसका अफसोस न करें। मार्केट में लंबे समय तक बने रहना है तो निरंतर बदलने व हर मोड़ पर कुछ नया सीखने की ललक होनी ही चाहिए।’ आकृति ने पहले बच्चों के कपड़ों का ब्रांड शुरू किया, फिर ई-कामर्स में हाथ आजमाया, फिर कारपोरेट में कुछ समय काम कर अंततः वे बेबी गियर के क्षेत्र में उतरी हैं।
बड़ी शर्त है समय प्रबंधन
स्मार्ट डिवाइस कंपनी गैबिट की सह-संस्थापक अपर्णा शाही के पास कई स्टार्टअप विकसित करने व उनमें काम का लंबा अनुभव है। पूर्णिया, बिहार की अपर्णा शाही ने जब आइआइटी किया तो उस मामले में भी अपने शहर की पहली लड़की बनीं। आइआइएम, कोलकाता से एमबीए कर मैंकेजी जैसी कंपनी में काम करने के बाद उन्हें बड़ा एक्सपोजर मिला, जिसमें वे सीइओ, बोर्ड मैंबर, डायरेक्टर से सीधे मिल सकती थीं। अपर्णा बताती हैं, ‘पिता डाक्टर व मां कामकाजी रहीं तो परिवार के स्तर पर कोई बाधा नहीं आई। कार्पोरेट दुनिया में लंबे अनुभव के बाद गैबिट शुरू करने का निर्णय लिया। यह कोविड का समय था जब चर्चा का केंद्रीय विषय सेहत व अपनी देखभाल पर आकर ठहर गया। उस डरावने दौर ने सबको सिखा दिया कि यही असली दौलत है लेकिन इसके लिए कोई एक प्लेटफार्म नहीं था। अपर्णा ने दो साल के लंबे रिसर्च के बाद गैबिट को होलिस्टिक हेल्थ उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया।’ अपर्णा के अनुसार, ‘आप मार्केट में किस चीज की कमी है यानी गैप को पहचानें, तब काम शुरू करें। आवश्यक नहीं कि बड़े स्केल पर ही बिजनेस शुरू किया जाए। कम पैसे, संसाधन व समय देकर भी बिजनेस शुरू कर सकते हैं। महिलाएं अक्सर स्वयं को दूसरे नंबर पर रखती हैं, यह गलत है। अपने जीवन की कमान अपने हाथ होनी चाहिए। समय प्रबंधन सफल होने की बड़ी शर्त है।’
अदृश्य दबाव से उबरना होगा
बेसन-दही, शहद-नींबू आदि त्वचा की देखभाल के लिए पारंपरिक रूप से प्रयोग किया जाता रहा है लेकिन नई पीढ़ी कोरियाई स्किन केयर पसंद करने लगी है। उसके पास अब कई नए विकल्प हैं। इसी बदलाव को पहचानकर कर्नाटक की मानेसा गरेमेल्ला ने काइंडलाइफ ब्रांड शुरू किया है।तकरीबन ढाई करोड़ से अधिक उपभोक्ता आधार वाली काइंडलाइफ की सह-संस्थापक मानेसा अपनी मेंटर व प्रेरणा कंपनी की सीईओ राधिका घई को मानती हैं, जिन्होंने यूनीकार्न कंपनी शापक्लूज का संचालन किया है। मानेसा कहती हैं, ‘महिलाओं पर एक अदृश्य दबाव रहता है। यदि हम यह समझकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें तो बड़ा बदलाव संभव है। बचपन से ही लड़कियों को पैसे संभालने, वित्तीय आत्मनिर्भरता की सीख देनी चाहिए।’ मानेसा कभी योजनानुसार कुछ चीजें न होने या हार जाने या ग्राहकों से खराब फीडबैक मिलने पर अधिक दबाव नहीं लेतीं। वह अगले दिन फिर से पुराने दमखम से जुट जाती हैं। वह कहती हैं, ‘फीडबैक अच्छा हो या बुरा, उसे इंसान से जोड़कर देखेंगे तो आगे बढ़ना कठिन हो जाएगा!’
फिक्की से सम्मानित मानेसा कुशल उद्यमी हैं! वे चर्चित अमेरिकी फैशन पत्रिका ‘हापर्स बाजार’ की उस सूची में हैं, जिसमें उन्हें उन 25 शख्सियतों में शामिल किया गया, जो कि वर्ष 2025 में सौंदर्य प्रसाधनों के बाजार में चर्चा में रही हैं!
नजर आता है बड़ा लक्ष्य
भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने और इकोसिस्टम विकसित करने वाली संस्था के रूप में (टीआइइ) का उल्लेखनीय योगदान है। टाइ, दिल्ली-एनसीआर की महानिदेशक गीतिका दयाल के अनुसार, महिला निदेशकों की उपस्थिति शक्तिशाली और सकारात्मक प्रभाव पैदा करती है। जब कोई युवा महिला किसी स्टार्टअप में प्रवेश करती है और बोर्ड की बैठक में एक महिला का चेहरा देखती है, तो उसकी भी महत्वाकांक्षाएं बदल जाती हैं और उसे एक बड़ा लक्ष्य दिखाई देता है!
19 प्रतिशत महिलाएं कार्पोरेट जगत में हैं वही स्टार्टअप में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत है।
(वाइजर रिपोर्ट 2023 के अनुसार)
18 प्रतिशत स्टार्टअप में सीइओ व संस्थापक महिलाएं हैं जबकि कार्पोरेट दुनिया में यह आंकड़ा महज 5 प्रतिशत है।( नैस्कॉम रिपोर्ट 2023 के मुताबिक)
साथी हाथ बढ़ाना
‘व्हेन वी गिव, वी गेन’ यानी जब हम महिलाओं को आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं, उनकी प्रतिभा में निवेश करते हैं तो यह केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं होता बल्कि इससे पूरी मानवजाति लाभान्वित होती है। यही है इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का विषय। इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने का अर्थ है स्त्री-पुरुष भेदभाव से इतर समतामूलक समाज निर्माण में सहयोग देना।












