विचार: नए नेपाल के निर्माण का जनादेश
नेपाल के आम चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की ऐतिहासिक जीत ने लोकतांत्रिक इतिहास में नया अध्याय लिखा है। 35 वर्षीय बालेंद्र शाह के नेतृत्व में आरएसपी लगभग पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही है। जेन-जी युवा आंदोलन से प्रेरित यह बदलाव पारंपरिक दलों के वर्चस्व, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता के अंत का संकेत है, जो एक स्थिर और नए नेपाल के निर्माण का जनादेश देता है।
HighLights
आरएसपी ने नेपाल चुनावों में ऐतिहासिक पूर्ण बहुमत हासिल किया।
बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नेपाल में नया राजनीतिक युग।
युवाओं ने भ्रष्टाचार मुक्त, स्थिर नेपाल का जनादेश दिया।
डॉ. ऋषि गुप्ता। नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा चुका है। आम चुनावों के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) देश की पहली लगभग पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने जा रही है। इस जीत के नायक 35 वर्षीय बालेंद्र शाह उर्फ बालेन हैं, जिनका प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है।
नेपाल में इस राजनीतिक बदलाव की नींव सितंबर 2025 में जेन-जी युवा आंदोलन ने रखी थी। नेपाल के राजनीतिक इतिहास में, जहां हर वर्ष दर्जनों नए दल बनते और मिटते हैं, जहां नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-एमाले और माओवादी केंद्र जैसे दशकों पुराने पारंपरिक दलों का एकछत्र वर्चस्व रहा है, जहां शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और गगन थापा जैसे दिग्गजों ने लंबे समय तक सत्ता की धुरी को नियंत्रण में रखा, जहां राजनीति सदैव पहाड़ बनाम मधेश, धार्मिक ध्रुवीकरण और नृजातीय समीकरणों के तराजू में तौली जाती रही है। ऐसे जटिल परिवेश में जिस दल की स्थापना महज चार वर्ष पूर्व हुई हो, उसकी ऐसी अभूतपूर्व चुनावी जीत कल्पना से परे थी।
इस चुनावी सुनामी के पीछे दो प्रमुख कारण दिखते हैं। पहला, नए नेपाल की परिकल्पना का मूल आधार एक ऐसे राष्ट्र की स्थापना था, जो भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से मुक्त हो। इस यात्रा की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2008 में राजशाही के अंत और लोकतंत्र की स्थापना के साथ हुई। माना गया था कि सैकड़ों वर्षों के राजतंत्र, जिसमें सत्ता दरबार के वफादारों तक सीमित थी और जनता का एक बड़ा वर्ग हाशिये पर था, उसका अंत लोकतांत्रिक व्यवस्था से होगा।
विडंबना यह रही कि 2008 के बाद जो भी राजनीतिक दल उभरे, उनकी कार्यशैली और जड़ें पुरानी व्यवस्था से ही प्रभावित थीं। यद्यपि माओवादी दलों पर भी सत्ता की लोलुपता हावी रही। परिणामस्वरूप लोकतंत्र आने के बावजूद आम जनता को कोई वास्तविक राहत नहीं मिल सकी। नेपाल के पिछले 18 वर्षों के लोकतांत्रिक यात्रा में चार आम चुनावों के दौरान देश ने एक दर्जन से अधिक प्रधानमंत्री और दर्जनों उप-प्रधानमंत्री बदलते देखे हैं।
राजनीतिक उठापटक के कारण कोई भी सरकार अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। इस अनिश्चितता के बीच जनता ने आरएसपी को पूर्ण बहुमत देकर न केवल राजनीतिक अस्थिरता को समाप्त किया है, बल्कि गठबंधन की मजबूरियों वाली राजनीति का भी अंत कर दिया है। चूंकि आरएसपी का कोई विवादास्पद पुराना इतिहास नहीं था, इसलिए जनता ने बालेन शाह के नेतृत्व पर अटूट भरोसा जताया।
दूसरा, आरएसपी की जीत का श्रेय नेपाल के युवाओं को भी जाता है, जिन्होंने बालेन शाह को एक नए नेपाल के उद्भव का महत्वपूर्ण कारक माना। बालेन पेशे से इंजीनियर रहे हैं और बाद में रैप संगीत की दुनिया में उतरे। अपने संगीत के माध्यम से उन्होंने ऐसे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया, जिनसे न केवल युवा, बल्कि आम जनता भी जुड़ पाई। यही कारण था कि जब उन्होंने 2022 में काठमांडू के मेयर का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा तो उन्हें भारी जीत मिली। देश को बालेन के रूप में एक नया नेता तो मिल गया था, लेकिन किसी राजनीतिक दल के समर्थन के बिना राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष तक पहुंचना आसान नहीं था।
पुराने दलों को कमजोर किए बिना यह संभव भी नहीं था और यही काम जेन जी आंदोलन ने किया। हालांकि युवाओं ने बालेन को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने का न्योता दिया था, लेकिन उसकी अवधि केवल छह महीने की थी, जबकि बालेन का सपना पांच वर्षों और उससे आगे की राजनीति का था। ऐसे में उन्होंने अंतरिम नेतृत्व स्वीकार करने के बजाय चुनावी रास्ता चुना और उसमें विजयी हुए। आरएसपी पत्रकार से राजनेता बने रबी लामिछाने के नेतृत्व में तेजी से आगे बढ़ी, जो अपने पहले ही चुनाव में 2022 में 20 सीटों के साथ एक वैकल्पिक राजनीतिक पार्टी के रूप में उभरी थी। आरएसपी के पास युवाओं की मजबूत अपील है, लेकिन बालेन जैसे लोकप्रिय नेता के जुड़ जाने से पार्टी को और अधिक मजबूती मिली और अब उसके परिणाम भी सामने हैं।
अब जब आरएसपी के पास जनमत है और बालेन शाह जैसे लोकप्रिय युवा नेता तो सवाल उठता है कि क्या वे देश चलाने में मजबूत साबित होंगे? क्योंकि लोकप्रिय होना एक बात है, लेकिन देश के विकास और हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों का निर्माण करना, मजबूत विदेश नीति बनाना और सत्ता की शक्ति से परे देश का शांतिपूर्ण संचालन करना बिल्कुल अलग बात है। बालेन शाह लोकप्रिय नेता हैं। काठमांडू के मेयर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उन पर कई बार नियमों की अनदेखी के आरोप भी लगते रहे हैं।
ऐसे में यदि प्रधानमंत्री के पद पर भी उनकी कार्यशैली वैसी ही रही तो इससे देश में नीतिगत स्थिरता प्रभावित हो सकती है और जनता की शिकायतों का कारण भी बन सकती है। आने वाले सौ दिनों में सरकार की कार्यप्रणाली काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। हालांकि संभावनाओं और आशंकाओं से परे नेपाली जनादेश प्रशंसनीय है। अपने मताधिकार का प्रयोग कर जनता ने लोकतंत्र को नया आयाम दिया है। लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता और गठबंधन की खींचतान की समाप्ति के संकेत दिए हैं। देश में समय-समय पर उठने वाले राजशाही की वापसी जैसे मुद्दों को भी यह जनादेश काफी हद तक विराम देता दिखाई देता है।
(लेखक अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं)












