विचार: उन्नत एआई की रेस जीते भारत
भारत डिजिटल भारत अभियान की नींव पर एजेंटिक एआई की नई दुनिया बना रहा है, जो साधारण एआई से कहीं अधिक उन्नत है।
HighLights
भारत का डिजिटल ढाँचा एजेंटिक एआई के लिए मजबूत आधार।
सरकारी सेवाओं, कृषि, बैंकिंग में एजेंटिक एआई की क्षमता।
रोजगार, सुरक्षा, असमानता एजेंटिक एआई की प्रमुख चुनौतियाँ।
डॉ. रोहित यादव। डिजिटल भारत अभियान की मजबूत नींव पर देश में इन दिनों तकनीक की एक नई दुनिया खड़ी हो रही है। इस नई दुनिया का नाम है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इसका सबसे उन्नत रूप है 'एजेंटिक एआई।' साधारण एआई केवल सवालों के जवाब देती है, जबकि एजेंटिक एआई उससे कहीं आगे की तकनीक है। यह योजना बना सकती है, अलग-अलग प्रणालियों से जुड़ सकती है और कई काम अपने आप पूरा कर सकती है। यह केवल यह नहीं बताएगी कि आप किसी सरकारी योजना के पात्र हैं या नहीं, बल्कि खुद जानकारी जांचकर आवेदन भी कर सकती है और आपको सूचित भी कर सकती है कि आपका काम गया।
आज दुनिया में एआई की ताकत अक्सर इस से मापी जाती है कि किस देश के पास सबसे बड़े डाटा सेंटर हैं। इस मामले में भारत अभी सबसे आगे नहीं है, लेकिन एजेंटिक एआई इस सोच को बदल सकती है। इसके लिए केवल विशाल कंप्यूटर सिस्टम नहीं, बल्कि मजबूत डिजिटल ढांचे की जरूरत होती है और भारत के पास यह व्यवस्था पहले से मौजूद है। भारत का 'इंडिया स्टैक' इसी का सबसे बड़ा उदाहरण है।
आधार ने नागरिकों को विश्वसनीय डिजिटल पहचान दी। यूपीआइ ने एक खुली और जुड़ी हुई भुगतान व्यवस्था तैयार की। डिजिलाकर ने दस्तावेजों को सुरक्षित डिजिटल तिजोरी में रखा और ओएनडीसी ने व्यापार के लिए खुला डिजिटल नेटवर्क बनाया। इन सभी व्यवस्थाओं को ऐसे डिजिटल मंच के रूप में तैयार किया गया, जिस पर दूसरे लोग और संस्थाएं नई सेवाएं विकसित कर सकें। यही वह ढांचा है, जिसकी एजेंटिक एआई को सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
भविष्य में कोई एआई एजेंट किसी नागरिक की ओर से कर रिटर्न भरना, लाइसेंस नवीनीकरण करना, सरकारी लाभ की पात्रता जांचना या सहायता राशि जारी करना चाहे तो उसे पहचान सत्यापित करनी होगी, दस्तावेजों तक पहुंचना होगा, भुगतान करना होगा और सरकारी प्रणालियों से जुड़ना होगा। भारत ने ये सभी डिजिटल परतें पहले ही बना ली हैं और वे करोड़ों लोगों के स्तर पर सक्रिय रूप से काम भी कर रही हैं। यही कारण है कि भारत का डिजिटल सार्वजनिक ढांचा दुनिया की पहली वास्तविक 'एजेंटिक इन्फ्रास्ट्रक्चर' व्यवस्था बन सकता है।
अभी अमेरिका के पास राष्ट्रीय डिजिटल पहचान व्यवस्था नहीं है और यूरोप का ढांचा अलग-अलग बंटा हुआ है। ऐसे में भारत की यह व्यवस्था दुनिया के लिए एक अलग माडल बन सकती है। इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता कम हो सकती है। भविष्य में ऐसी व्यवस्था संभव है, जहां लोगों को योजनाओं की जानकारी ढूंढ़ने की जरूरत ही न पड़े। किसी किसान की फसल बीमा की शर्तें पूरी होते ही उसका दावा अपने आप दर्ज हो जाएगा या कोई बच्चा छह वर्ष का होते ही उसके स्कूल प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
एजेंटिक एआई से बैंकिंग क्षेत्र में ऋण जांच, धोखाधड़ी की पहचान और ग्राहक सहायता जैसे काम तेज और आसान हो सकते हैं। कृषि क्षेत्र में एआई किसानों को उनकी भाषा में मौसम की जानकारी और फसल रोगों की पहचान दे सकती है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी यह तकनीक प्रारंभिक जांच और रोगी के रिकार्ड विश्लेषण जैसे कामों में मदद कर सकती है। छोटे व्यापारियों के लिए भी यह तकनीक नए अवसर दे सकती है।
भारत में लगभग छह करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देते हैं और 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। एजेंटिक एआई इन छोटे व्यवसायों को भी बड़ी कंपनियों जैसी डिजिटल क्षमता दे सकती है। भारत में सर्वम एआई जैसी कंपनियां इस दिशा में तेजी से काम कर रही हैं।
हालांकि इस उत्साह के बीच कुछ गंभीर सवाल भी हैं। सबसे बड़ा सवाल रोजगार का है। आने वाले वर्षों में एआई करोड़ों नौकरियों की प्रकृति बदल सकती है। दूसरा सवाल जवाबदेही का है। जब एआई यह तय करे कि किसे ऋण मिलेगा, किस रोगी को प्राथमिकता दी जाएगी या किस विद्यार्थी को कौन सा पाठ्यक्रम मिलेगा, तो गलती होने पर जिम्मेदार कौन होगा? तीसरा बड़ा सवाल साइबर सुरक्षा का है। भारत में हर वर्ष लाखों साइबर हमलों और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों की शिकायतें दर्ज होती हैं। जब एजेंटिक एआई करोड़ों लोगों के लिए फैसले लेने लगेगी, तब एक छोटी सी तकनीकी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
चौथा सवाल असमानता का है। एआई का लाभ केवल शहरों या संपन्न वर्ग तक सीमित रह गया तो यह नई तकनीक एक नई डिजिटल खाई पैदा कर सकती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को स्पष्ट और दूरदर्शी नीति की आवश्यकता होगी। तकनीकी शिक्षा संस्थानों और कौशल विकास कार्यक्रमों में एआई प्रशिक्षण को बढ़ावा देना होगा। भारतीय स्टार्टअप और उद्यमियों को प्रोत्साहन देना जरूरी है। साथ ही एआई को प्रमुख भारतीय भाषाओं में विकसित करना भी उतना महत्वपूर्ण है।
आने वाले समय में सफलता केवल उसी देश की नहीं होगी, जिसके पास सबसे शक्तिशाली एआई होगी, बल्कि उसकी होगी, जिसके पास सबसे भरोसेमंद, सुरक्षित और लोगों के लिए उपयोगी डिजिटल व्यवस्था होगी। डिजिटल भारत ने देश को डिजिटल रूप से मजबूत बनाया है और अब एजेंटिक एआई भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।
(लेखक नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं)












